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28 नवंबर, 2020|10:52|IST

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नई शिक्षा नीति में संस्कृत को उचित स्थान, राज्यस्तरीय टास्क फोर्स गठित

नई शिक्षा नीति में संस्कृत को उचित स्थान दिया जाएगा। इसके लिए हम राज्यस्तरीय टास्क फोर्स में इसके प्रावधानों पर विचार करेंगे। नई नीति और संस्कृत पर ऑनलाइन संवाद में ये बात शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने कही। संस्कृत शिक्षा विभाग और संस्कृत भारती उत्तरांचल के इस संवाद में उच्च शिक्षा राज्य मंत्री धनसिंह रावत ने कहा कि सभी महाविद्यालयों में संस्कृत विषय को सभी विषयों संग लेने के लिए योजना तैयार की जाएगी।

ताकि सभी बच्चों को संस्कृत पढ़ने का अवसर मिल सके। मुख्य वक्ता दिनेश कामत ने कहा कि शिक्षा का एक माध्यम संस्कृत को अगर बनाया जाए तो यह उचित रहेगा इसके लिए प्रारंभिक शिक्षा में हिंदी एवं संस्कृत के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की जानी उचित रहेगी। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर अजीत कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि संस्कृत भाषा को कंप्यूटर और इंटेलिजेंट बौद्धिक संपदा के आधार पर विश्वव्यापी बनाया जा सकता है।

तकनीकी संस्थाओं को भी संस्कृत अपने विद्यार्थियों और शोध अनुसंधान के लिए उपलब्ध करानी चाहिए। इस मौके पर उत्तराखंड मुक्त विवि, उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर देवी प्रसाद त्रिपाठी, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रूप किशोर शास्त्री, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुनील कुमार जोशी, ग्राफिक एरा के कुलपति प्रोफेसर संजय जसोला, उत्तराखंड संस्कृत अकादमी के उपाध्यक्ष  प्रो. प्रेमचन्द शास्त्री, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. कुमकुम रौतेला, माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल, डॉ. संजू प्रसाद ध्यानी और डॉ. सुमन भट्ट भी उपस्थित रहे।

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  • Web Title:education minister arvind pandey says sanskirt would be preferred task force formed to include sanskrit in government schools in uttarakhand