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ओपीडी वाले डॉक्टरों के लिए भी पंजीकरण जरूरी

ओपीडी में मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को भी क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के तहत अब पंजीकरण कराना होगा। स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी सीएमओ को इसके निर्देश दे दिए हैं।  क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट ऐक्ट के तहत अभी तक बड़े अस्पतालों  के पंजीकरण पर ही जोर दिया जा रहा था। मगर, अब ओपीडी डॉक्टरों को भी अनिवार्य रूप से पंजीकरण करने को कहा गया है। ऐलोपैथी के अलावा होम्योपैथी, यूनानी और आयुर्वेद के ओपीडी डॉक्टर भी पंजीकरण कराएंगे। सप्ताह में एक या दो दिन की ओपीडी करने वाले डॉक्टरों के लिए भी पंजीकरण जरूरी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पंजीकरण का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि प्रेक्टिस करने वाले सभी डॉक्टरों का रिकॉर्ड सरकार के पास आ जाएगा। इससे असली और नकली डॉक्टरों की पहचान भी होगी। ओपीडी में डॉक्टरों की ओर से वसूली जाने वाली फीस की जानकारी भी मिलेगी। बंगाली और बिना डिग्री इलाज करने वाले डॉक्टरों की पहचान आसान हो जाएगी। 

 

अजब हाल
राज्य में कई अस्पतालों ने नहीं करवाए हैं पंजीकरण 

उत्तराखंड में दस हजार के करीब सरकारी, निजी अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इनमें से आधे डॉक्टरों ने भी अब तक पंजीकरण नहीं कराए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद पंजीकरण में तेजी तो आई, मगर अस्पताल और डॉक्टर अब भी पंजीकरण से कतरा रहे हैं। देहरादून में 2500 में से महज 11 सौ ने आवेदन किया। पंजीकरण सिर्फ 700 अस्पतालों का हो पाया।

2000 रुपये पंजीकरण फीस 
ओपीडी वाले डॉक्टरों के लिए पंजीकरण फीस दो हजार रुपये तय है। अफसरों  ने बताया कि ओपीडी डॉक्टरों के लिए मामूली फीस इसलिए रखी गई, ताकि उन पर पंजीकरण की वजह से ज्यादा भार न पड़े। घर पर ओपीडी चलाने वाले डॉक्टरों के लिए पंजीकरण जरूरी है। अभी तक आईपीडी वाले अस्पतालों के पंजीकरण पर जोर था। अब ओपीडी डॉक्टरों को भी अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराने को कहा गया है। सभी सीएमओ को इसके निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. रविन्द्र थपलियाल, स्वास्थ्य महानिदेशक 

 

राज्य में गायब डॉक्टरों पर कार्रवाई के निर्देश
देहरादून। एनएचएम समीक्षा के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय पहुंचे सचिव नितेश झा ने स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. रविंद्र थपलियाल समेत सभी सीएमओ को निर्देश दिए कि बॉन्ड वाले गायब डॉक्टरों का ब्योरा लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। मेडिकल कॉलेजों को भी इस कार्रवाई में शामिल करने को कहा गया। उन्होंने एनएचएम कार्यक्रमों में तेजी और हेल्थ इंडिकेटर सुधारने के भी निर्देश दिए। इस दौरान एमडी युगल किशोर पंत, निदेशक अंजलि नौटियाल और अमिता उप्रेती भी मौजूद रहीं।


 

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  • Web Title:doctors sit in opd have to register to practice in uttarakhand