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24 अक्तूबर, 2020|3:20|IST

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डाक्टर्स डे:कोरोना को मात दे फिर मरीजों की सेवा में जुटेंगे बहादुर डॉक्टर, कैसे हर मोर्चे पर योद्धा बनकर डटे हैं डाक्टर, पढ़ें

pak hindu doctors ready to work for corona patients

डाक्टरों को धरती का भगवान कहा जाता है। कोरोनाकाल में उनके इस रूप को दुनिया ने साक्षात देखा है। कोरोना से जंग में तमाम डाक्टरों का सबसे अहम योगदान है, आठ घंटे ड्यूटी करने वाले डाक्टर अपने घर का रास्ता भूल दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे हैं।

इलाज करते संक्रमित हुए, पीपीई किट में तमाम परेशानी झेली। लेकिन कोरोना को मात देकर फिर से मरीजों की सेवा में जुटने को तैयार है।

उपचार, जांच, सैंपलिंग, सर्विलांस, प्रबंधन, टेलीमेडिसन सेवा समेत तमाम मोर्चों पर डाक्टर योद्धाओं की तरह डटे हैं। बच्चों, परिजनों से दूर रहकर मरीजों की सेवा में जुटे है।

कोई वीडियो कॉल पर बच्चों से बात करता, तो कोई घर जाने पर घंटों तक बच्चों से अलग रहता हैं। डाक्टर्स डे पर उनके जज्बे पर हिन्दुस्तान संवाददाता की रिपोर्ट : 
 


जज्बा : मरीजों की सेवा जिंदगी का मकसद 
दून अस्पताल की तीन महिला डाक्टर उपचार करते-करते संक्रमित हो गई। उनका जज्बा देखिए होम आइसोलेशन का समय पूरा होते ही दोबारा ड्यूटी पर आकर मरीजों की सेवा की इच्छा जाहिर की है।

एक ने तो ज्वाइन भी कर लिया है। मरीजों की सेवा को उन्होंने जिंदगी का मकसद बना लिया है। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि महिला विंग की डा. समीक्षा गर्ग ने ज्वाइन कर लिया था।

उनका चयन स्वास्थ्य विभाग में हो गया है, विकासनगर में वह ज्वाइन करेगी। एनेस्थिसिया विभाग की डा. दीपिका तिवारी एवं आईसीयू में ड्यूटी कर रही डा. चारू शर्मा की ड्यूटी रोटेशन में लगाई जा रही है।

जल्द ही दोनेां ज्वाइन करेगी। तीनों के जज्बे पर उन्हें नाज है। वहीं, कोरोनेशन अस्पताल के जिन डाक्टरों की रिपोर्ट पहले पॉजिटिव और फिर नेगेटिव आई थी।

वो भी होम आइसोलेशन का टाइम खत्म होते ही ड्यूटी पर लौटेंगे। सीएमओ डा. बीसी रमोला, प्रमुख अधीक्षक भागीरथी जंगपांगी कहती है कि सभी चिकित्सकों की सेवाएं सराहनीय है। 
 

साहस : पीपीई किट में सांस लेना मुश्किल हो जाता 
उमस भरी गर्मी में डाक्टर आठ आठ घंटे तक वार्डों में रहकर मरीजों को देखते हैं। डिप्टी एमएस डा. मनोज शर्मा, वरिष्ठ फिजीशियन निधि उनियाल बताती है कि पीपीई किट में कई बार सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है।

चेहरे पर मास्क की वजह से निशान पड़ गये हैं। दस से पंद्रह मिनट में पसीने से बदन तर बतर हो जाता है। पानी भी पी नहीं सकते हैं। लेकिन मरीजों को बचाना है, तो देशहित में ये सब सहने की अब आदत हो गई है।  

समर्पण : रविवार की छुट्टी भी नहीं लेते डाक्टर 
दून अस्पताल की डाक्टरों की कोर कमेटी के डाक्टर रविवार को भी छुट्टी नहीं लेते हैं। डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री, नोडल अधिकारी डा. अनुराग अग्रवाल, डा. नारायणजीत सिंह, डा. निधि उनिलयाल, डा. धवल गोटचा रविवार को भी छुट्टी नहीं लेते हैं। तीन माह से लगातार अस्पताल आते है। वार्डों में मरीजों को देखकर मरीजों का रात-रात तक डाटा तैयार करते हैं। 

बच्चों से दूर : 3.5 माह से घर नहीं गये प्राचार्य  
प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना डाक्टरों के लिए प्रेरणा है। वह 3.5 माह पहले अपने घर हल्द्वानी गये थे। उसके बाद से रोजाना कई कई बैठकें लेकर यहां ट्रेनिंग एवं व्यवस्थाओं को जुटाने में लगे हैं।

जिससे डाक्टरों एवं स्टाफ का मनोबल बढ़ा हैं। एमएस डा. केके टम्टा की पीठ में चोट की वजह से बेल्ट बंधी है। फिर भी लगातार ड्यूटी आ रहे हैं।

कोरोनेशन गांधी अस्पताल में इस वक्त मरीजों का दबाव है। प्रमुख अधीक्षक डा. भागीरथी जंगपांगी पति के बीमार होने के बावजूद पूरे समर्पण भाव से दोनों अस्पतालों की जिम्मेदारी निभा रही है।  
 


 

सीनियर डाक्टरों के निर्देशन में उपचार : दून अस्पताल में संक्रमित, संदिग्ध वार्डों, फ्लू ओपीडी, आईसीयू एवं इमरजेंसी में डाक्टर गर्मी में घंटों तक पीपीई किट जज्बे के साथ ड्यूटी कर रहे हैं।

अस्पताल में डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री, नोडल अधिकारी डा. अनुराग अग्रवाल, मेडिसन एचओडी डा. नारायणजीत सिंह, वरिष्ठ फिजीशियन डा. निधि उनियाल की एक कोर कमेटी बनी है। जो डाक्टरों को तमाम निर्देश देती है और पूरा डाटा रखती है। वार्डों में एवं फ्लू ओपीडी में युवा डाक्टरों ने कमाल का जज्बा दिखाया है। 
 


सैंपलिंग, जांच और सर्विलांस : सैंपलिंग, जांच एवं सर्विलांस कोरोना से लड़ाई में अहम साबित हुई। पाबंद कॉलोनियों में सर्विलांस टीम ने प्रभारी डा. दिनेश चौहान एवं डा. राजीव दीक्षित की अगुवाई में बेहतरीन काम किया।

संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों को चिन्हित किया और अस्पतालों में भर्ती कराया। युवा डाक्टरों डा. रचित गर्ग, डा. प्रदीप कांडपाल, डा. दिगेंद्र, डा. अनिल पाल, डा. सचिन चौहान, डा. गार्गी त्यागी, डा. प्रेरणा रौतेला, डा. मानसी नैथानी समेत अन्य ने दिन-रात ड्यूटी की। सैंपलिंग में डा. आलोक जैन, डा. पीयूष त्रिपाठी, डा. एमएस रावत, डा. अंसारी, डा. विपिन पोखरियाल की टीम शिद्दत के साथ जुटी हैं।

डा. पीयूष अगस्टीन रिपेार्टिंग, एंबुलेंस डा. यूएस चौहान, रायपुर में मॉनीटरिंग डा. आनंद शुक्ला, क्वारंटाइन सेंटरों में डा. संजीव दत्त महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दून मेडिकल कॉलेज में कोरोना जांच लैब शुरू कराने में प्रभारी डा. शेखर पाल समेत उनकी टीम का अहम रोल रहा।  
 


अफसर डाक्टरों की नेतृत्व क्षमता शानदार : कोरोना से जंग में अफसर डाक्टरों ने जबरदस्त नेतृत्व क्षमता दिखाई। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना दिन में कई बैठके लेते है, डाक्टरों का मनोबल बढ़ाते हैं।

सीएमओ डा. बीसी रमोला ने प्रवासियों के लौटने के वक्त मुश्किल घड़ी में पदभार संभाला। चेकपोस्टों पर सैंपलिंग, क्वारंटाइन सेंटरों में मेडिकल जांच की खुद मॉनिटरिंग की। डिप्टी एमएस डा. एनएस खत्री, डा. मनोज शर्मा, डा. आरएस बिष्ट दिन रात जुटे हैं। डा. खत्री रात तक मरीजों की समस्या सुनते हैं।

डा. मनोज जिम्मेदारियों के साथ मरीजों का अल्ट्रासाउंड भी करते हैं। कोरोनेशन गांधी अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक डा. भागीरथी जंगपांगी पति के बीमार होने के बाद भी अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित है।

सुबह से शाम तक दोनों अस्पतालों में देखरेख करती है। मरीजों, स्टाफ की समस्याएं सुनती हैं। डा. मनोज उप्रेती कोरोनेशन, डा. प्रवीण पंवार गांधी अस्पताल में तमाम व्यवस्थाएं उनके साथ देख रहे हैं। 

 

टेलीमेडिसन-कंट्रोल रूम से मरीजों का समाधान
कोरोनाकाल में टेलीमेडिसन से मरीजों को काफी राहत मिली। दून अस्पताल में टेलीमेडिसन एवं ई संजीवनी से डा. केसी पंत, डा. एसडी जोशी, डा. एमके पंत, डा. सुशील ओझा, डा. विकास सिकरवार समेत हर विभाग के डाक्टरों ने हजारों मरीजों को ऑनलाइन उपचार दिया।

आठ डाक्टरों की टीम ने मोबाइल हेल्पलाइन से 25 हजार लोगों को समाधान बताया। एचएनबी मेडिकल विवि के कुलपति प्रो. डा. हेमचंद्र पांडेय के निर्देशन में एक टीम ने हजारों को ऑनलाइन उपचार दिया। सीएमओ कार्यालय में कंट्रोल रूम में एसीएमओ डा. एनके त्यागी, डा. वंदना सेमवाल की अगुवाई में डाक्टर रोज सैकड़ों लोगों को ऑनलाइन परामर्श देकर समस्याएं सुलझा रहे। 
 


आयुर्वेद, होम्योपैथी और निजी डाक्टरों की सेवा सराहनीय 
कोरोनाकाल में आयुर्वेद, होम्योपैथी डाक्टरों समेत निजी डाक्टरों का भी अहम योगदान रहा। भारतीय चिकित्सा परिषद् के अध्यक्ष डा. दर्शन कुमार, उपाध्यक्ष डा. जेएन नौटियाल कहते है कि सर्विलांस, क्वारंटाइन सेंटरों में आयुर्वेद डाक्टरों ने दिन रात ड्यूटी की है। जो काबिले तारीफ है।

जिला होम्योपैथी अधिकारी डा. जेएल फिरमाल के मुताबिक विभाग के डाक्टर हर मोर्चे पर मुस्तैद है। वहीं, आईएमए के प्रांतीय सचिव डा. डीडी चौधरी एवं जिला सचिव डा. रूपा हंसपाल कहती है कि निजी डाक्टरों ने अपने रिस्क पर ओपीडी चलाकर लोगों को राहत दी। वहीं, वीडियो के माध्यम से ऑनलाइन परामर्श दिया और दवा भी भिजवाई। 

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  • Web Title:doctors recovering form corona virus would again serve to treat covid 19 patients on doctors day in uttarakhand