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देहरादून के ये इलाके बने ट्रैफिक सेंसेटिव जोन, 25 फरवरी से केवल GPS वाहनों को परमिशन; फैसले की वजह क्या

देहरादून में घंटाघर का डेढ़ किमी दायरा ट्रैफिक सेंसेटिव जोन घोषित किया गया है। यहां 25 फरवरी से केवल जीपीएस वाहनों को चलाने की अनुमति मिलेगी। ऐसा ट्रैफिक जाम को कम कतरने के लिए किया जा रहा है।

देहरादून के ये इलाके बने ट्रैफिक सेंसेटिव जोन, 25 फरवरी से केवल GPS वाहनों को परमिशन; फैसले की वजह क्या
Sneha Baluniहिन्दुस्तान,देहरादूनThu, 25 Jan 2024 09:07 AM
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संभागीय परिवहन विभाग ने घंटाघर, परेड ग्राउंड के डेढ़ से दो किमी के दायरे को ट्रैफिक सेंसेटिव जोन घोषित कर दिया है। इस जोन में 25 फरवरी से वही बस, टैक्सी, मैक्सी, ऑटो, विक्रम, मैजिक, ई रिक्शा चलेंगे, जिन पर जीपीएस लगा होगा। घंटाघर-परेड ग्राउंड क्षेत्र में ट्रैफिक जाम बढ़ता जा रहा है। ट्रैफिक नियंत्रित करना चुनौती बन गया है। इसके लिए 23 दिसंबर को हुई आरटीए की बैठक में इस क्षेत्र में सभी सार्वजनिक वाहनों पर जीपीएस लगाने का निर्णय लिया गया। 

बुधवार को आरटीओ प्रशासन सुनील शर्मा ने इसके आदेश भी कर दिए। कंट्रोल रूम से निगरानी सेंसेटिव जोन में वाहनों को पार्किंग, स्टॉपेज और ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा। यहां कंट्रोल रूम से निगरानी होगी। नियम तोड़ने वालों को कंट्रोल रूम से चेतावनी देने के साथ चालान की भी कार्रवाई की जाएगी। दोबारा नियम तोड़ने पर परमिट जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

ट्रैफिक सेंसेटिव जोन

घंटाघर से दिलाराम चौक 1.8 किमी
घंटाघर से सर्वे चौक 1.4 किमी
घंटाघर से प्रिंस चौक 1.3 किमी
घंटाघर से बिंदाल पुल 1.0 किमी
घंटाघर-सहारनपुर चौक 2.9 किमी
घंटाघर से आराघर चौक 2.2 किमी

2600 रुपये में लगेगा नया जीपीएस सिस्टम

वाहनों में जीपीएस लगाने के लिए परिवहन विभाग की ओर से कंपनी अधिकृत की गई है। कंपनी की प्रतिनिधि ने बताया कि एक वाहन में जीपीएस का खर्च 2600 रुपये तक होगा। मालिक को 15 फरवरी तक अपने वाहन में जीपीएस लगाकर प्रमाण पत्र हासिल करना होगा।

विक्रमों का रंग 15 तक बदलना होगा

विक्रमों का संचालन तय केंद्र में ही हो, इसके लिए आरटीओ ने इनका रंग तय किया है। दून, विकासनगर, धर्मावाला, डोईवाला, बड़ोवाला, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, लक्सर, झबरेड़ा, पथरी के लिए अलग-अलग रंग तय हैं। विक्रम स्वामियों को 15 फरवरी तक रंग बदलना होगा। इसके बाद प्रवर्तन की कार्रवाई होगी।

जीपीएस के फायदे

अफसरों का कहना है कि जीपीएस के कई फायदे होंगे। इससे ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सकेगा। यह भी पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितने वाहन चल रहे हैं। तत्काल क्षेत्र को ग्रीन कॉरिडोर भी बनाया जा सकेगा।

आरटीओ सुनील शर्मा ने कहा, 'घंटाघर-परेड ग्राउंड क्षेत्र में सार्वजनिक वाहनों पर जीपीएस के आदेश कर दिए गए हैं। एक महीने के भीतर सभी वाहनों पर जीपीएस जरूरी है, इसके बाद प्रवर्तन की कार्रवाई शुरू होगी।'

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