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Hindi News उत्तराखंडअतिक्रमण के नाम पर तोड़े मकान बनाकर देगा देहरादून नगर निगम, जानिए क्या है प्लान

अतिक्रमण के नाम पर तोड़े मकान बनाकर देगा देहरादून नगर निगम, जानिए क्या है प्लान

बेदखली के बाद पीड़ितों ने कोर्ट से गुहार लगाई। उन्होंने बताया था कि 1995 में उनको निरंजनपुर में भूखंड दिए गए थे। उन्होंने मकान का निर्माण किया। उनका दावा था कि सरकारी दस्तावेजों में भी नाम दर्ज है।

अतिक्रमण के नाम पर तोड़े मकान बनाकर देगा देहरादून नगर निगम, जानिए क्या है प्लान
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानSun, 05 May 2024 12:40 PM
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द्वितीय अपर सिविल जज इंदू शर्मा की कोर्ट ने हाल में नगर निगम को चार साल पहले अतिक्रमण के नाम पर तोड़े तीन मकान एक महीने में दोबारा बनाने के आदेश दिए। नगर निगम को पीड़ित पक्षों को तब से अब तक एक-एक हजार रुपये रोज के हिसाब से हर्जाना भी देना होगा।

इस मामले में दो पीड़ितों की मौत हो चुकी है। पीड़ितों के अधिवक्ता जितेंद्र कुमार ने बताया कि कोरोना काल (अक्तूबर 2020) में निरंजनपुर के खसरा संख्या 464 में नगर निगम की ओर से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। तब गुड्डी पत्नी सुरेंद्र सिंह, शांति देवी पत्नी बाबूलाल और सरिता पत्नी हरिनाथ के मकान तोड़ दिए गए थे।

बेदखली के बाद पीड़ितों ने कोर्ट से गुहार लगाई। उन्होंने बताया था कि 1995 में उनको निरंजनपुर में भूखंड दिए गए थे। इसके बाद उन्होंने मकान का निर्माण किया। उनका दावा था कि सरकारी दस्तावेजों में भी उनका नाम दर्ज है।

शासन की ओर से आरएफडी परियोजना
के लिए एमडीडीए को करीब 94 हेक्टेयर भूमि सौंपी गई है। इसकी देखरेख और अतिक्रमण रोकने के लिए पूर्व से ही नियमित रूप से छह सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। बस्तियों में अवैध निर्माण पर रोक लगाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। यदि प्राधिकरण से कोई सहयोग चाहिए तो वह किया जाएगा। बशर्ते, अवैध निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। -बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष-एमडीडीए

एमडीडीए और नगर निगम बस्तियों पर आमने-सामने
नगर निगम का दावा है कि 2016 में रिस्पना रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत जो सरकारी भूमि एमडीडीए को सौंपी गई, उस पर कुछ जगह नए अवैध निर्माण हुए हैं। जबकि, एमडीडीए ने यह स्पष्ट किया कि करनपुर खास, खेड़ा मानसिंह और अधोईवाला क्षेत्र में जो अवैध निर्माण चिन्हित किए गए, वे नगर निगम की ही भूमि पर हैं।

एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के अनुसार, ढाकपट्टी काठबंगला बस्ती से बालासुंदरी मंदिर कंडोली तक, बिंदाल नदी में लालपुल से भारूवाला ग्रांट चांदचक पुल तक कुल 94 हेक्टेयर भूमि एमडीडीए को मिली है। होमगार्ड के छह जवान इसकी निगरानी कर रहे हैं। पूर्व में नदी किनारे एक-एक घर का सर्वे किया गया था।

2003 में नगर निगम ने जारी किए थे नोटिस
अधिवक्ता जितेंद्र कुमार ने बताया कि वर्ष 2003 में नगर निगम ने जमीन अपनी बताकर नोटिस जारी किए थे। तब यह मामला कोर्ट भी गया था, लेकिन 2017 में मामला निरस्त हो गया। लेकिन, इसके बाद वाद को पुनर्जीवित करने के लिए प्रार्थनापत्र दिया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसी बीच नगर निगम ने तीनों पीड़ितों के मकान ढहा कर उनको निष्कासित कर दिया।