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मानसून से ज्यादा सामान्य दिनों की आपदा में हुईं मौतें, चौंकाने वाले हैं आंकड़ें

हिन्दुस्तान टीम, देहरादूनHimanshu Kumar Lall
Thu, 21 Oct 2021 10:22 AM
मानसून से ज्यादा सामान्य दिनों की आपदा में हुईं मौतें, चौंकाने वाले हैं आंकड़ें

उत्तराखंड में इस साल मानसून के मुकाबले सामान्य दिनों में आपदा की मार ज्यादा पड़ी है। मानसून अवधि से पहले ही आपदा की घटनाओं में 102 लोगों की मौत हुई। जबकि मानसून बीतने के बाद अभी तक 46 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।  राज्य में इस साल मानसून 13 जून को आया था जबकि मानसून की विदाई आठ अक्तूबर को हुई। मानसून की यह अवधि राज्य में सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही लेकिन चार महीने की इस अवधि के दौरान आपदा की सभी घटनाओं में कुल मिलाकर 36 लोगों की मौत हुई।

लेकिन यदि इस साल मानसून से पहले और उसके बाद की अवधि में हुई मौत का आंकड़ा देखें तो वह ज्यादा रहा। मानसून से पहले फरवरी में हुई ऋषिगंगा तपोवन त्रासदी में 102 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि पिछले तीन दिनों में राज्य में हुई बारिश में अभी तक राज्य में 46 लोगों की जान जा चुकी हैं। ऐसे में साफ है कि इस साल मानसून की तुलना में उससे आगे और पीछे आपदा की घटनाओं में ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है। 

मानसून में अन्य सालों की तुलना में कम मौतें 
राज्य में इस साल मानसून अवधि के दौरान अन्य सालों की तुलना में कम मौतें हुई हैं। 2020 में मानसून सीजन के दौरान अलग अलग घटनाओं में राज्य में कुल 77 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। 2019 में मानसून के दौरान कुल 99 लोगों ने जान गंवाई जबकि 2018 में मानसून के दौरान मरने वालों का आंकड़ा 63 रहा। 2021 में मानसून के दौरान घटी घटनाओं के दौरान मरने वालों का आंकड़ा तो कम रहा लेकिन उसके आगे पीछे मरने वालों की संख्या काफी अधिक रही है। 

उत्तराखंड में आपदा से निपटने को मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र हो 
मौसम वैज्ञानिक आनंद शर्मा के अनुसार मौसम में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है और बारिश का कम ज्यादा होना मौसम में होने वाले किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं है। उनका कहना है कि राज्य बारिश की दृष्टि से एक संवेदनशील राज्य है। प्री मानसून और पोस्ट मानसून बारिश एक सतत प्रक्रिया है। लेकिन हमे अपना आपदा प्रबंधन तंत्र मजबूत करना होगा।

दक्षिणी राज्यों में समुद्री तूफान में पहले लाखों लोगों की मौत हो जाती थी लेकिन अब वहां वार्निंग सिस्टम काफी मजबूत हो गया है। जिससे मौत के आंकड़ों में कमी आई है। जबकि उत्तराखंड में बारिश की वजह से होने वाली आपदा में मरने वालों के आंकड़ों में कमी नहीं आ पा रही है। इसके लिए राज्य में एक मजबूत आपदा प्रबंधन तंत्र हो।

चार धाम यात्रा ने पकड़ी तेजी
देहरादून। चार धाम यात्रा ने तेजी पकड़ ली है। मौसम सामान्य होते ही यात्रा शुरू हो गई है। चारों धामों में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। श्री बदरीनाथ धाम पहुंचने को जरूर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। श्री केदारनाथ धाम पहुंचने को यात्रा शुरू हुई। मौसम सामान्य रहा। आठ हजार तीर्थयात्री बुधवार सुबह से सोनप्रयाग, लिंचोली से बेसकेंप केदारनाथ को रवाना हुए।

मंदिर में तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए। श्री यमुनोत्री धाम में यात्रा मंगलवार से ही शुरू हो गई है। अभी तक ढाई हजार से अधिक तीर्थयात्री पहुंच चुके हैं। श्री बदरीनाथ धाम राष्ट्रीय राजमार्ग अवरूद्ध होने के कारण आज यात्रा बीच बीच में प्रभावित रही। तीर्थ यात्रियों को जोशीमठ, पीपलकोटी आदि जगहों पर रोकना पड़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग मंगलवार से टंगड़ी, बेनाकुली, लामबगड़ आदि स्थानों में मलबा आने से अवरूद्ध है। 
 

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