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उत्तराखंडकोरोनो को मात देन के लिए लगा ब्रेक, टीके की कमी से ठप हुआ टीकाकरण

हिन्दुस्तान टीम, देहरादून। विमल पुर्वालPublished By: Himanshu Kumar Lall
Sun, 11 Apr 2021 10:34 AM
कोरोनो को मात देन के लिए लगा ब्रेक, टीके की कमी से ठप हुआ टीकाकरण

केंद्र से कोरोना टीका मिलने में हुई देरी से शनिवार को राज्य के 181 बूथों पर टीकाकरण नहीं हो पाया। कई केंद्रों पर टीका खत्म होने की वजह से लोगों को बिना टीकाकरण के ही वापस लौटना पड़ा। इस वजह से लोगों ने हंगामा भी किया। देहरादून जिले में टीके तकरीबन खत्म हो चुके हैं जबकि अन्य जिलों में भी एक दो दिन का ही स्टॉक बचा हुआ है। टीके मिलने में हो रही देरी का असर शनिवार को टीकाकरण अभियान पर साफ दिखाई दिया। पिछले एक सप्ताह में हर दिन राज्य में साठ हजार से अधिक टीके लगाए जा रहे थे। गुरुवार को तो यह आंकड़ा एक लाख के पार पहुंच गया था। लेकिन शनिवार को टीकों में आई कमी से महज 45 हजार लोगों को ही टीके लग पाए। शनिवार को राज्य में कुल 519 बूथों पर टीकाकरण किया गया जबकि शुक्रवार को राज्य में टीकाकरण बूथों की संख्या 700 के करीब थी। राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह मार्तोलिया ने बताया कि केंद्र से टीके मांगे गए हैं रविवार को टीके मिलने से अगले कुछ दिन के लिए डोज हो जाएंगी।

दून में हंगामे के बीच सिर्फ तीस केंद्रों पर टीकाकरण
देहरादून जिले में शनिवार को वैक्सीन की कमी के चलते केवल तीस केंद्रों पर ही टीकाकरण हो पाया। जबकि शुक्रवार को जिले में 116 केंद्रों पर टीकाकरण किया गया था। दून अस्पताल, रायपुर, खुडबुडा, नेहरूग्राम आदि केंद्रों पर पहुंचे लोगों ने वैक्सीन न लगने पर हंगामा किया। दोपहर तक दून अस्पताल में जैसे तैसे वैक्सीनेशन शुरू हुआ, लेकिन केवल 120 डोज मिलने की वजह से वह भी एक बजे ही खत्म हो गई। जिस पर लोगों ने फिर हंगामा किया। प्राचार्य डा. आशुतोष सयाना का कहना है कि वैक्सीन सीएमओ कार्यालय से नहीं मिल पाने की वजह से दिक्कत हुई। वैक्सीन मिलते ही टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा।

विकासनगर, सहसपुर, सेलाकुई, कालसी में टीका खत्म
सीएचसी सहसपुर, पीएचसी सेलाकुई, पीएचसी कालसी और उपजिला चिकित्सालय विकासनगर में कोरोना टीका समाप्त हो गया है। सीएचसी सहसपुर की नोडल अधिकारी डॉ. विनीता सयाना और उपजिला चिकित्सालय के अधीक्षक डॉ. केके शर्मा ने इस बात की पुष्टी की। सीएचसी चकराता और पीएचसी त्यूणी में टीका उपलब्ध है लेकिन समाप्त होने के कगार पर है।

हरिद्वार में बची 15 हजार डोज
हरिद्वार में महाकुंभ चल रहा है लेकिन वहां अब बेहद सीमित संख्या में टीके रह गए हैं। जिले में 15 हजार के करीब ही टीके उपलब्ध हैं। ऐसे में रविवार से टीकाकरण में परेशानी खड़ी हो सकती है। जिले में रोजाना करीब नौ हजार लोगों को टीका लगाया जा रहा है। 31 मार्च के बाद से जिले को वैक्सीन नहीं मिले हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी एसके झा ने बताया कि जिले में महज डेढ़ दिन का स्टॉक उपलब्ध हैं। उम्मीद है कि आज कल में वैक्सीन मिल जाएगी। 10 दिनों से वैक्सीन नहीं मिली है।

पर्वतीय जिलों में भी एक दिन का स्टॉक
गढ़वाल के टिहरी जिले में छह हजार, पौड़ी जिले में दो हजार, रुद्रप्रयाग में भी दो हजार, नैनीताल में महज 400 डोज, चम्पावत में 10 हजार, बागेश्वर में पांच हजार, पिथौरागढ़ में पांच हजार के करीब वैक्सीन डोज बनी हुई हैं।
 
आज मिलेगी 1 लाख 38 हजार डोज
राज्य प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ कुलदीप सिंह मार्तोलिया ने बताया कि रविवार को राज्य को कोविशील्ड वैक्सीन की एक लाख 38 हजार डोज मिल जाएंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस संदर्भ में पत्र भेजा है। सुबह साढ़े नौ बजे मुम्बई से वैक्सीन की खेप रवाना होगी और तीन घंटे के भीतर वैक्सीन राज्य को पहुंचाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार जौलीग्रांट एयरपोर्ट से ही वैक्सीन को जिलों को भेज दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिकांश जिलों में पहले से ही अपनी जरूरत के अनुसार एक दिन का स्टॉक है तो रविवार को भी टीकाकरण अभियान ज्यादा प्रभावित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि एक लाख 38 हजार डोज भी राज्य की जरूरत को देखते हुए दो या तीन दिन के लिए ही होगी। विदित है कि केंद्र से राज्य ने 10 लाख डोज मांगी है जिसमें से पांच लाख डोज प्राथमिकता के आधार पर देने को कहा गया है।
दून, अल्मोड़ा में बर्बाद हुई सबसे ज्यादा वैक्सीन,अभी तक राज्य में कुल बीस हजार डोज हो चुकी बर्बाद
राज्य की राजधानी देहरादून में कोरोना वैक्सीन की डोज सबसे ज्यादा बर्बाद हो रही हैं। जबकि अल्मोड़ा जिला इस मामले में दूसरे स्थान पर है। देहरादून में अभी तक वैक्सीन डोज बर्बादी का प्रतिशत 6.3 प्रतिशत है। जबकि अल्मोड़ा में औसत 6.3 प्रतिशत की दर से वैक्सीन डोज बर्बाद हो रही हैं। वैक्सीन डोज खराब करने के मामले में फिर हरिद्वार, उत्तरकाशी, बागेश्वर का नम्बर है। हरिद्वार में 2.6 प्रतिशत, उत्तरकाशी में 1.5 प्रतिशत, बागेश्वर में वैक्सीन डोज बर्बाद होने का औसत 1.2 प्रतिशत है। हालांकि इन सभी जिलों में वैक्सीन डोज खराब होने का प्रतिशन केंद्रीय मानक 10 प्रतिशत से कम है। राज्य में टीकाकरण अभियान 16 जनवरी को शुरू हो चुका था और अभी तक 10 लाख के करीब कोरोना डोज राज्य के लोगों को लग चुके हैं। लेकिन में महज दो प्रतिशत डोज ही टीकाकरण के दौरान खराब हुई है। केंद्र सरकार का मानना है कि टीकाकरण के दौरान दस प्रतिशत तक डोज बर्बादी हो सकती है। इसके लिए अतिरिक्त डोज भी उपलब्ध कराई जाती है। राज्य के प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ कुलदीप मार्तोलिया ने बताया कि राज्य में वैक्सीन डोज बर्बाद होने का प्रतिशत बहुत कम है और केंद्र ने इसके लिए राज्य की सराहना की है।

पांच जिलों में एक भी डोज बर्बाद नहीं
राज्य के पांच जिले ऐसे हैं जहां अभी तक कोरोना वैक्सीन की एक भी डोज खराब नहीं हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य के चम्पावत,पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और यूएस नगर में टीके की एक भी डोज खराब नहीं हुई है। जबकि चमोली, नैनीताल और पौड़ी में भी महज कुछ ही डोज टीकाकरण के दौरान खराब हुई हैं।

राज्य में कुल 20 हजार डोज बर्बाद
राज्य में कोरोना टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद से लेकर अभी तक कुल 20 हजार के करीब वैक्सीन डोज खराब हुए हैं। राज्य में अभी तक टीकाकरण के लिए कुल आठ लाख 47 हजार वैक्सीन डोज मिली थी जिसमें से आठ लाख 27 हजार डोज का उपयोग किया गया है। शेष डोज खराब हुई हैं।

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