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हरीश रावत पर कांग्रेस हाईकमान का भरोसा और बढ़ा, 2022 के विधानसभा चुनाव में हो सकती है अहम भूमिका

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत पर पार्टी हाईकमान का भरोसा और भी ज्यादा बढ़ गया है। रावत को दोबारा महासचिव बनाते हुए प्रभारी के रूप में पंजाब की जिम्मेदारी भी देने के फैसले में...

हरीश रावत पर कांग्रेस हाईकमान का भरोसा और बढ़ा, 2022 के विधानसभा चुनाव में हो सकती है अहम भूमिका
देहरादून । चंद्रशेखर बुड़ाकोटीSat, 12 Sep 2020 01:24 PM
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कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व सीएम हरीश रावत पर पार्टी हाईकमान का भरोसा और भी ज्यादा बढ़ गया है। रावत को दोबारा महासचिव बनाते हुए प्रभारी के रूप में पंजाब की जिम्मेदारी भी देने के फैसले में हाईकमान का विश्वास साफ नजर आ रहा है। इस फैसले का दून से दिल्ली तक बड़ा राजनीतिक संदेश भी गया है। रावत का राष्ट्रीय राजनीति में तो प्रमोशन हुआ ही है, साथ ही माना जा रहा है कि भविष्य में रावत को उत्तराखंड में भी बड़े चेहरे के रूप में अहमियत मिल सकती है। खासकर उत्तराखंड में वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव में हरीश रावत भूमिका खासी महत्वपूर्ण होने जा रही है।

कांग्रेस के महासचिव केवी वेणुगोपालन की ओर से शुक्रवार शाम जारी प्रदेश प्रभारियों की लिस्ट में रावत का बढ़ता कद साफ नजर आ रहा है। रावत का नाम इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर मुकुल वासनिक का नाम है। यह क्रम अपने आप में काफी कुछ संकेत दे रहा है। 24 महीने पहले रावत को 18 जुलाई 2018 को असम का प्रभारी बनाया गया था। इन 26 महीनों में रावत ने असम में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। दिल्ली, असम और उसके साथ उत्तराखंड में भी रावत की राजनीतिक सक्रियता का ही नतीजा रहा कि हाईकमान ने उन्हें और बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी।

रावत के प्रमोशन से उत्तराखंड के सियासी हल्कों में भी खासी गरमाहट आ गई है। रावत कैंप का मानना है कि यह भविष्य की राजनीति के लिए हाईकमान का संकेत है। दरअसल, वर्तमान में राज्य में भाजपा बहुमत के साथ सरकार चला रही है। एक वक्त कांग्रेस की ताकत माने जाने वाले ज्यादातर बड़े नेता पार्टी को छोड़कर भाजपा में जा चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस को ऐसे नेता की कमी महसूस हो रही है, जिसकी पहुंच पूरे राज्य में हो। साथ ही उसकी स्वीकार्यता भी औरों से ज्यादा हो। हाईकमान की उम्मीदों के पैमाने पर फिलवक्त हरीश रावत ही फिट बैठते हैं। इसे देखते हुए  माना जा रहा है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की राजनीति में रावत को केंद्रित करते हुए नया समीकरण दिखाई दे सकता है।

रावत ने हाईकमान का आभार जताया

मैं कांग्रेस का छोटा सा सिपाही हूं। हाईकमान ने मुझ पर विश्वास रखा है और जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसका प्राण-प्रण से पालन किया किया जाएगा। महान पंजाब की धरती की सेवा करने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत बड़े सौभाग्य की बात है। 
हरीश रावत, राष्ट्रीय महासचिव कांग्रेस

हरीश रावत चुनाव हारे पर हिम्मत नहीं हारी 

पहले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव में मनमाफिक नतीजे न मिलने के बावजूद रावत ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने न सिर्फ अपनी जीवटता बरकरार रखी बल्कि सियासी मैदान में और भी ज्यादा आक्रामक होकर आगे आए। कांग्रेस के आम कार्यक्रम के बजाए रावत के व्यक्तिगत रूप से किए गए कार्यक्रमों से प्रदेश की भाजपा सरकार ज्यादा असहज हुई है। महंगाई, बेरोजगारी, गैरसैंण, आपदा, गन्ना किसानों का बकाया भुगतान समेत कई मुद्दों पर रावत की घेराबंदी के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में भी नजर आई। 

प्रीतम और इंदिरा से तालमेल बिठाने लगे रावत

राज्य में कांग्रेस की राजनीतिक हरीश रावत और प्रीतम-इंदिरा कैंप के आसपास ही घूमती रही है। कई बार दोनों कैंप आमने-सामने भी हो चुके हैं। हालिया कुछ वक्त से दोनों गुटों के बीच कड़वाहट कम और नजदीकियां ज्यादा दिख रही है। पिछले दिनों प्रदेश उपाध्यक्षों की बैठक नेता प्रतिपक्ष हृदयेश ने रावत की स्वीकार्यता को स्वीकार करते हुए उनसे आगे बढ़कर आने को कहा था। प्रीतम भी रावत के करीब आए हैं। तो रावत भी लगातार प्रीतम और इंदिरा के कार्यक्रमों में शिद्दत के साथ शामिल हो रहे हैं।  

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