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स्थापना दिवस: राज्य आंदोलन को ‘जनगीतों’ ने दी थी धार

1 / 4गिरीश तिवारी गिर्दा

2 / 4बल्ली सिंह चीमा

3 / 4अतुल शर्मा

4 / 4नरेंद्र सिंह नेगी

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उत्तराखंड आंदोलन के लिए लिखे और गाए गए जनगीतों का जिक्र जरूर होता है। इन जनगीतों ने ही इस विराट जनांदोलन की धार न सिर्फ पैनी कर दी थी, बल्कि यह तमाम शहरों में निकाली जा रही प्रभात फेरियों और मशाल-जुलूसों का अनिवार्य हिस्सा बन गए थे। राज्यांदोलन के कुछ काले अध्यायों को छोड़ दिया जाए तो यह पूरी तरह शांत और रचनात्मक आंदोलन था। सड़कों पर जो जनसैलाब उमड़ता था, उसे थामने के लिए जनगीत गाए जाते थे। लोकप्रिय कवि नरेन्द्र सिंह नेगी, जनकवि स्वर्गीय गिरीश तिवारी गिर्दा, डॉ. अतुल शर्मा, जहूर आलम और बल्ली सिंह चीमा के गीत आंदोलन की आवाज थे। नरेन्द्र सिंह नेगी के गीत ‘भैजी कख जाणा छां तुम लोग उत्तराखंड आंदोलन मां’ लोगों की जुबां पर चढ़ गया था। जनकवि गिरीश तिवारी गिर्दा का जनगीत ‘ततुक नी लखा उदेक, घुनन मुनई ना टेक, जैंता एक दिन तो आलो दिन यो दूने मां’, डॉ. अतुल शर्मा का गीत ‘विकास की कहानी गांव से है दूर दूर क्यों, नदी पास है, मगर ये पानी दूर-दूर क्यों’, ‘लड़के लेंगे भिड़के लेंगे छीन के लेंगे उत्तराखंड’ सवाल उठा रहा था और जवाब भी दे रहा था। जहूर आलम का गीत ‘ये सन्नाटा तोड़ के आ’, बल्ली सिंह चीमा का जनगीत ‘ले मशालें चल पड़े हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के’ आंदोलन का अनिवार्य हिस्सा बना और इतिहास में शामिल हो गया। देहरादून, पौड़ी, नैनीताल, टिहरी, श्रीनगर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ ही नहीं, बल्कि गांवों की प्रभात फेरियों में हरेक की जुबां पर ये जनगीत ही थे।

रुकी नहीं है जनकवियों की कलम
राज्य स्थापना दिवस पर इन जनगीतों के सवाल उत्तरों की तलाश में हैं। सभी जनकवि अपनी आवाजों के संदर्भ में आज भी लिख रहे हैं। नरेन्द्र सिंह नेगी के लिखे राजनेताओं पर कटाक्ष गीत ‘नौछमी नारैणा’, ‘अब कतगा खैल्यो’ इसके उदाहरण हैं। डॉ. अतुल शर्मा भी रुके नहीं हैं। ‘शहीदों की पुकार’, ‘मां जी मेरी याद में तू न रोना, सीढ़ीदार खेत में विकास की नई इबारत बोना’, इसी गीत में वह लिखते हैं कि, ‘सब मिलकर ये सोचो, कैसे गांव में आए पानी, सबको मिले उजाला जीवित रहे तभी कुर्बानी’ को भी लोगों ने पसंद किया। बल्ली सिंह चीमा और जहूर आलम भी कई मंचों से अपनी ताजा तरीन रचनाएं सुनाते रहे। रंगकर्मी सतीश धौलाखंडी और जयदीप सकलानी इन जनगीतों को आवाज देने का काम कर रहे हैं।


 

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  • Web Title:common poems plays pivotal role during statehood agitation