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Hindi News उत्तराखंडलोकसभा चुनाव 2024 में मतदान के बहिष्कार पर सीएम धामी की सख्ती, मतदाताओं की नाराजगी की क्या वजह?

लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान के बहिष्कार पर सीएम धामी की सख्ती, मतदाताओं की नाराजगी की क्या वजह?

प्रशासन को ग्रामीणों की नाराजगी के कारण का विस्तार से जवाब देना होगा। ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बनी सड़क, पेयजल लाइन, बिजली सप्लाई आदि योजनाएं कितने वर्षों से और किन वजहों से लटकी हैं।

लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान के बहिष्कार पर सीएम धामी की सख्ती, मतदाताओं की नाराजगी की क्या वजह?
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानMon, 22 Apr 2024 09:56 AM
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पुष्कर सिंह धामी सरकार ने उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2024 में मतदान का बहिष्कार करने वाले गांवों की रिपेार्ट तलब कर ली। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने प्रमुख सचिव आरके सुधांशु को सभी गांवों की नाराजगी की वजह तलाशने और उसका प्रभावी समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

इस बार चुनाव में राज्य के 35 से ज्यादा गांवों के लोगों ने मतदान का पूर्ण बहिष्कार किया है। इन गांवों में अधिकांश गांव सड़क न बनने के कारण के नाराज हैं। कई क्षेत्रों में कई कई साल पहले स्वीकृत हुए सड़कों का निर्माण भी नहीं हो पाया। ज्ञापन, धरने, प्रदर्शनों के बावजूद कार्रवाई न होने पर लोगों ने इस बार मतदान का बहिष्कार करने की घोषणा कर दी थी।

आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने बीते रोज के अंक में प्रमुखता से इस मुद्दे को प्रकाशित किया था। आज रविवार सुबह ही मुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दे दिए। सुधांशु मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव होने के साथ-साथ वन विभाग का दायित्व भी संभाल रहे हैं।

एक-एक गांव की समस्या का निकाला जाएगा हल मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव आरके सुंधाशु ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन से मतदान बहिष्कार करने वाले गांवों का ब्योरा मांगा जा रहा है।

प्रशासन को ग्रामीणों की नाराजगी के कारण का विस्तार से जवाब देना होगा। ग्रामीणों की नाराजगी का कारण बनी सड़क, पेयजल लाइन, बिजली सप्लाई आदि योजनाएं कितने वर्षों से और किन वजहों से लटकी हैं, इसकी रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। इसके आधार पर समस्याओं का समाधान निकाला जाएगा।

आखिर क्या करते इशाला, रुद्रप्रयाग के प्रधान गजेंद्र राणा ने कहा कि ग्रामीण वर्ष 2008 से सड़क की मांग कर रहे हैं किंतु उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नागककोड़ाखाल से इशाला गांव तक 5 किलोमीटर सड़क की स्वीकृति भी मिली है।

किंतु मामला वनभूमि के कारण लटका हुआ है। चकराता के खत द्वार के युवा संगठन अध्यक्ष राकेश भट्ट का कहना है कि सड़क का निर्माण के वादे तो सभी करते रहे, लेकिन किसी ने काम नहीं किया। ऐसे में ग्रामीणों को मतदान बहिष्कार का निर्णय लेना पड़ा।

ग्रामीण क्यों थे नाराज
-चकराता में खारसी मोटरमार्ग पर दावापुल से बैरावा तक 16 किलोमीटर मोटर मार्ग मंजूरी के बाद भी नहीं बन पाया
-मसूरी में क्यारा धनोल्टी मोटर मार्ग का शिलान्यास तो वर्ष 2019 में हो गया था, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ।
-रुद्रप्रयाग के इसाला गांव के लोगों को भी अपनी सड़क का आठ साल से है इंतजार ।
-यमकेश्वर में लोगों की गंगाभोगपुर तल्ला-मल्ला को राजाजी टाइगर रिजर्व के दायरे से हटाने की मांग
-यूएसनगर में जलाशय भीतर गांव के ग्रामीण भी सड़क न बनने से नाराज
-पिथौरागढ़ के धारचूला में साइपोलू बूथ पर भी ग्रामीणों ने सड़क न बनने से किया बहिष्कार

मामलों का परीक्षण कर त्वरित कार्रवाई होगी मुख्यमंत्री
सीएम पुष्कर धामी ने कहा कि प्रमुख सचिव-वन को सभी प्रकरणों का अध्ययन कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। वन भूमि हस्तांतरण से जुडे कई मामलों में थोड़ा अधिक समय लग जाता है। ऐसे प्रत्येक मामले का परीक्षण कर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक गांव तक बुनियादी सुविधाओं को पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विगत कुछ समय में रेल,रोड, रोपवे, हवाई सेवा और पेयजल आदि बुनियादी सुविधाओं को मज़बूत करने की दिशा में काफी कार्य हुआ है। जहां मामले लंबित हैं उनके निस्तारण और स्वीकृति के लिए प्रयास तेज किया जाएगा।