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उत्तराखंड : गंगा और यमुना नदियों पर तेजी से बढ़ा संकट

River in Uttarakhand (Symbolic Image)

देश के पचास करोड़ से अधिक लोगों को जीवन देने वाली गंगा और यमुना नदियों पर संकट तेजी से बढ़ रहा है। हिमालय क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन की वजह से दोनों नदियों की सहायक जलधाराएं तेजी से सूख रही हैं। इससे नदियों के जल स्तर में भी गिरावट आ रही है।  उत्तराखंड सरकार द्वारा बुधवार को विधानसभा में रखे गए आर्थिक सर्वेक्षण में इसका खुलासा किया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि बीते 150 वर्षों में गंगा और यमुना की 300 जलधाराएं पूरी तरह सूख चुकी हैं। गंगा और यमुना नदियों की कुल 360 सहायक जलधाराएं थीं जिसमें से अब 300 पूरी तरह सूख चुकी हैं।  रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों के कारण दोनों नदियों की हिमालय से निकलने वाली 60 प्रतिशत जल धाराएं सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं। रिपोर्ट में इस पर चिंता जताई गई है। 

पांच साल में चार हजार स्रोत बचाए जाएंगे  
गंगा और यमुना की जलधाराओं के सूखने और जमीन में पानी के स्तर में लगातार आ रही कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने चार हजार जल स्रोतों को चिह्नित किया है। इनके जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इन जल स्रोतों को बचाने के लिए विशेष कार्य योजना तैयार की गई है। अगले पांच सालों में इस पर कार्य किया जाएगा। इसके साथ ही अन्य जल स्रोतों की मैपिंग भी कराई जा रही है। 

नदियों को बचाने की मुहिम कमजोर  
नमामि गंगे योजना के तहत गंगा और यमुना के कैचमेंट एरिया में राज्य में 23, 372 वर्ग किमी यानी कुल 43 प्रतिशत क्षेत्र में वनीकरण कार्य होने थे। इसके लिए 2017-18 में केंद्र सरकार ने 10 करोड़ 87 लाख रुपये दिए गए। लेकिन इसमें से साढ़े पांच करोड़ ही खर्च हो पाए। 

 

 

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  • Web Title:climate change adversely effect rivers ganga and yamuna