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20 सितम्बर, 2020|11:12|IST

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लॉकडाउन:बच्चों में बढ़ने लगा कुपोषण का खतरा, डेढ़ महीने से नहीं हुआ स्वास्थ्य परीक्षण  

many flaws in the campaign on malnutrition in country

बीते डेढ़ महीने से राज्य में 22 हजार से अधिक आंगनबाडी केंद्र बंद होने के चलते यहां पंजीकृत पौने दो लाख बच्चों को पौष्टिक दूध वितरित नहीं हो पा रहा है। इस कारण पहले से ही कुपोषित राज्य के 18 हजार से अधिक बच्चों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बीते डेढ़ महीने से इन बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं हो पा रहा है।

राज्य में आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत छह साल से कम उम्र के बच्चों को महिला बाल विकास विभाग हफ्ते में छह दिन पका पकाया भोजन, केला, अंडा देने के साथ ही फ्लेवर्ड दूध भी उपलब्ध कराता है। केंद्रों पर इन बच्चों की नियमित वजन, लंबाई की जांच कर पोषण की प्रगति देखी जाती है। लेकिन राज्य में 15 मार्च से सभी आंगनबाड़ी केंद्र बंद हैं।

विभाग ने पका पकाया भोजन की जगह  घर पर कच्चा राशन उपलब्ध करा रहा है । लेकिन दूध देने का इंतजाम नई व्यवस्था में नहीं हो पा रहा है। नहीं बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो रहा है। इसी तरह केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कार्यक्रम आयोजित नहीं हो पा रहा है। 

 

18 हजार से अधिक कुपोषित बच्चे
महिला बाल विकास विभाग के अनुसार राज्य में अति कुपोषित बच्चों की संख्या 1600 है, जबकि करीब 17 हजार अन्य कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इन बच्चों में कुपोषण की समस्या दूर करने के लिए विभाग ने सितंबर में पोषण अभियान शुरू किया था। इसके तहत अति कुपोषित बच्चों को विभिन्न जन प्रतिनिधियों और अधिकारियों को सांकेतिक रूप से गोद देकर, उनको पोष्टिक भोजन देने की पहल की गई।
 
कई जगह जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने इस काम में रुचि दिखाई, जिससे कुछ बच्चे समस्या से बाहर निकलने में कामयाब भी हुए हैं, लेकिन डेढ़ महीने से यह अभियान भी रुका हुआ है । निदेशक महिला बाल विकास झरना कमठान के मुताबिक दूध देने और स्वास्थ्य परीक्षण फिलहाल प्रभावित चल रहा है। लेकिन बच्चों को कच्चा राशन नियमित वितरित हो रहा है।
 

दूध, अंडा, केले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इस कारण पोषण अभियान भी प्रभावित है। अलबत्ता कच्चा राशन तय समय पर दिया जा रहा है।
रेखा आर्य, महिला सशक्तिकरण बाल विकास मंत्री
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  • Web Title:children could face malnutrition problem amid lockdown due to corona pandemic in uttarakhand