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रेलवे सुरंग में ब्लास्टिंग एक्सपर्ट की मौत के बाद 7 पर केस, उत्तरकाशी के सिलक्यारा में भी कंपनी कर रही निर्माण

आपको बता दें कि यह वही कंपनी है जो उत्तरकाशी जिले में सिल्कयारा सुरंग का निर्माण कर रही है। पिलछे साल टनल के ढहने से 41 मजदूर 17 दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे रहे थे। सात लोगों के खिलाफ केस हुआ है।

रेलवे सुरंग में ब्लास्टिंग एक्सपर्ट की मौत के बाद 7 पर केस, उत्तरकाशी के सिलक्यारा में भी कंपनी कर रही निर्माण
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, लाइव हिन्दुस्तानTue, 18 Jun 2024 05:57 PM
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उत्तराखंड के टिहरी जिले में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन परियोजना के लिए कौड़ियाला के समीप 125 किलोमीटर लंबी सुरंग के निर्माण के दौरान एक ब्लास्टिंग विशेषज्ञ की मौत में लापरवाही के लिए हैदराबाद स्थित नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एनईसीएल) के सात अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। 

हिन्दुस्तान टाइम्स के अमित बाथला की रिपोर्ट के अनुसार, एनईसीएल   परियोजना के लिए एक ठेकेदार एजेंसी है जो रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल ) की ओर से सुरंग का निर्माण कर रही थी। आपको बता दें कि यह वही कंपनी है जो उत्तरकाशी जिले में सिल्कयारा सुरंग का निर्माण कर रही है। पिलछे साल टनल के ढहने से 41 मजदूर 17 दिनों तक सुरंग के अंदर फंसे रहे थे।  

यह घटना 10 जून को परियोजना के पैकेज 3 की सुरंग संख्या 4 (ब्यासी से कौड़ियाला) में हुई थी, जिसमें चार सुरंगें भी शामिल हैं। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पैकेज 5 के अंदर 2 सुरंगें शामिल हैं जिसका निर्माण भी एनईसीएल द्वारा किया जा रहा है। आरवीएनएल की ओर से सुरंग निर्माण के लिए परियोजना को कई पैकेजों में बांटा गया है। 

मृतक के परिजनों का आरोप है कि मृतक कमलेश पंत (29) की मौत के लिए अधिकारी-कर्मचारी अधिकारी जिम्मेदार हैं, क्योंकि उन्होंने सुरंग में स्केलिंग और सफाई को नजरअंदाज किया था। कहना कहा कि अधिकारियों ने खुदाई क्षेत्र में भेज दिया। 

बताया कि रॉक सुरंगों में ड्रिलिंग और ब्लास्टिंग के दौरान स्केलिंग एक महत्वपूर्ण चरण है और हर के बाद किसी भी ढीली चट्टान को हटाने के लिए स्केलिंग किया जाता है। आरोप लगाया कि अगर उन्होंने खुदाई वाले क्षेत्र में भेजने से पहले ढीली चट्टानों को साफ किया होता तो चट्टान कभी नहीं गिरती। 

परिजनों का यह भी आरोप था कि कंपनी ने घटना को छुपाया और परिवार या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी।  आईपीसी की धारा 288 (इमारतों को गिराने या मरम्मत के संबंध में लापरवाहीपूर्ण आचरण), 304-ए (लापरवाही से मौत का कारण) और 337 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाले कार्य से चोट पहुंचाना) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। 

पीड़ित के चचेरे भाई वेद प्रकाश की शिकायत पर 16 जून को मुनि-की-रेती थाने में साइट इंजीनियर रंगनाथ, सुरक्षा अधिकारी मनोज पोखरियाल, जनसंपर्क अधिकारी रंजन भंडारी, टनल प्रभारी नरेंद्र कुमार अत्री, सुपरवाइजर कमल, ठेकेदार जीतेंद्र कुमार तोमर, मानव संसाधन भुवन चंद्र जोशी के खिलाफ केस दर्ज की गई। 

वेद प्रकाश ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि 10 जून को शाम करीब 4 बजे मृतक चट्टान गिरने से घायल हो गया था। वह मलबे के नीचे दब गया था और उसका जौलीग्रांट के हिमालयन हॉस्पिटल में इलाज चला था और जून को सुबह 6:30 बजे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। 

आरोप था कि उनके चचेरे भाई को सुरंग पर काम करने के लिए सीधे भेजा गया था, जिसकी वजह से चचेरे भाई कमलेश और उसके दो साथी इमरान, और प्रमुख कंवर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कहा कि घटना के बाद कंपनी द्वारा परिवार को इसकी जानकारी नहीं दी गई और न ही पुलिस को कोई रिपोर्ट दी गई। कहना था कि घटना के बारे में उन्हें कंपनी के कर्मचारियों से पता चला था। 

वेद प्रकाश का कहना था कि उनका चचेरा मेरा भाई ब्लास्टर का काम करता था।  है। वह माइनिंग वाले इलाकों के अंदर पूर्व निर्धारित स्थानों पर विस्फोटक रखता है। उसे ढीली सामग्री और चट्टानों को साफ किए बिना वहां भेजा गया था, जिसकी वजह चचेरे भाई और उसके दो साथियों पर गिर गया। कहना था कि यदि ढीली चट्टानों को हटा दिया गया होता तो यह घटना कभी नहीं होती।"
 
इस बीच, कंपनी और रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) ने अपनी ओर से किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। आरवीएनएल ने घटना के कारणों की जांच के लिए एक जांच समिति भी गठित की है।
 
कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शशांक कुमार का कहना  कि ऐसी कोई स्थिति नहीं थी जैसा कि अब आरोप लगाया जा रहा है। ब्लास्टिंग की प्रक्रिया ब्लास्टर की देखरेख में की जाती है। वहां कोई इंजीनियर मौजूद नहीं होता है और सब कुछ उनके निर्देशन में होता है। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा सावधानियां और मानदंड अपनाए जाते हैं। 
 
कुमार का कहना था कि मृतक के परिवार ने दबाव में पुलिस में शिकायत दी है। हम नियम और शर्तों के अनुसार मृतक के परिवार को मुआवजा भी देंगे। आरवीएनएल के वरिष्ठ प्रबंधक (परियोजनाएं) ओपी मालगुड़ी का कहना था कि सुरंग निर्माण के दौरान सभी सुरक्षा मापदंडों का ध्यान रखा गया था। यह एक दुर्घटना थी।

हमने घटना के कारणों की जांच के लिए एक जांच समिति भी गठित की है। बताया कि एनईसीएल हमारे लिए दो पैकेज का निर्माण कर रह है, जिसमें 6 सुरंगें शामिल हैं। मुनि-की-रेती पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ उप-निरीक्षक योगेश पांडे ने कहा कहा कि मृतक के भाई की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले में जांच जारी है। 

आपको बता दें कि 125.20 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना पर 16,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने का अनुमान है, जो ऋषिकेश को कर्णप्रयाग से जोड़ेगी। परियोजना में 35 पुल और 17 सुरंगें शामिल हैं।  दावा किया है कि देवप्रयाग और लछमोली के बीच 15.1 किलोमीटर लंबी सुरंग, देश की सबसे लंबी सुरंग है।