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13 अप्रैल, 2021|4:05|IST

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अतिक्रमण करने वालों पर होगी सख्ती,पंचायत चुनाव लड़ने पर पूरी तरह रोक

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पंचायत या सरकारी जमीन के कब्जेदार अब पंचायत में किसी भी स्तर पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसी तरह बकायेदारों के लिए भी त्रिस्तरीय पंचायत के दरवाजे बंद हो गए हैं।  सरकार ने विधानसभा में बुधवार को उत्तराखंड पंचायतीराज संशोधन विधेयक 2021 रखा। इसके मुताबिक, बकायेदार अब किसी भी स्तर पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पहले ग्राम पंचायत के बकायेदार के सिर्फ ग्राम पंचायत चुनाव लड़ने पर रोक थी, पर वो क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत का चुनाव लड़ सकता था।

ऐक्ट की कमियों का फायदा उठाकर कई बकायेदार पंचायत प्रतिनिधि बन जाते थे। अब किसी भी पंचायत का बकायेदार, ग्राम, क्षेत्र व जिला पंचायत में किसी तरह से चुनाव नहीं लड़ पाएगा। इसी तरह पंचायत या सरकारी जमीन के कब्जेदारों के भी चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तु अधिनियम में छह महीने से अधिक की जेल की सजा भुगतने वालों के लिए चुनाव की रोक का प्रावधान तकनीकी कारणों से लागू नहीं हो पा रहा था, अब नए विधेयक में इसे भी दुरुस्त कर लागू कर दिया गया है। 

कार्यकाल पूरा कर पाएंगे प्रतिनिधि 
संशोधन विधेयक के जरिए सरकार ने ऐसे पंचायत प्रतिनिधियों को कार्यकाल पूरा करने का मौका दे दिया है, जिनका निर्वाचन क्षेत्र आंशिक या पूर्ण रूप से शहरी निकाय में शामिल हो गया हो। दरअसल तेजी से शहरीकरण के चलते सरकार ग्राम पंचायतों को शहरी निकाय में बदल रही है। शहरी निकाय में शामिल होते ही, यहां निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधि का कार्यकाल स्वत: समाप्त हो जाता है। इस कारण पंचायत प्रतिनिधि शहरी क्षेत्रों में शामिल होने का विरोध करते हैं। अब सरकार ने ऐसे सभी पंचायत प्रतिनिधियों को निर्वाचन क्षेत्र समाप्त होने के बावजूद कार्यकाल पूरा करने की व्यवस्था कर दी है। हालांकि उनके प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। 

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  • Web Title:candidates encroach encroachment on government lands outstanding dues can not contest panchyat elections