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देहरादून में जमीनों का खरीद-फरोख्त अब बिल्कुल भी नहीं होगा आसान, उत्तराखंड सरकार ने लगाई रोक

उत्तराखंड के इस शहर में जमीन की खरीद-फरोख्त बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है। जमीन मालिकों द्वारा नियमों की अनदेखी गई है। उत्तराखंड सरकार ने अब सख्त ऐक्शन करने का मन बना लिया है।

देहरादून में जमीनों का खरीद-फरोख्त अब बिल्कुल भी नहीं होगा आसान, उत्तराखंड सरकार ने लगाई रोक
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, मुख्य संवाददाता। Wed, 17 May 2023 08:45 PM
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उत्तराखंड के इस शहर में जमीन की खरीद-फरोख्त बिल्कुल भी आसान नहीं होने वाली है। जमीन मालिकों द्वारा नियमों की अनदेखी गई है। उत्तराखंड सरकार ने अब सख्त ऐक्शन करने का मन बना लिया है। शिकायत मिलने के बाद ऐसी जमीनों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी है।

देहरादून में ग्रामीण सीलिंग से जमीन को बचाने के लिए पहले भूमि मालिकों ने चाय बागान के नाम पर छूट ले ली। अब नियमों का ताक में रखकर उस जमीन का सौदा किया जा रहा है। शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने देहरादून में चाय बागान की ऐसी जमीनों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी है।

रायपुर, प्रेमनगर, विकासनगर समेत कई इलाकों की करीब 1100 एकड़ जमीन इस कार्रवाई के दायरे में आएगी।  अपर जिलाधिकारी प्रशासन डॉ. शिव कुमार बरनवाल की ओर से इसके आदेश जारी हुए हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण 1960 का उल्लंघन मानते हुए देहरादून सदर, विकासनगर एसडीएम के साथ ही दोनों तहसीलों के सब रजिस्ट्रार को आदेश जारी करते हुए जमीन के क्रय-विक्रम पर रोक लगाई है।

आदेश में संबंधित जमीनों के खसरा नंबरों का भी उल्लेख है।  दरअसल, अधिवक्ता विकेश सिंह नेगी ने इस संबंध में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। शिकायत की कि देहरादून के जमीनपुर, एटनबाग, बदामावाला, अंबाड़ी, जीवनगढ़, एनफील्ड ग्रांट, रायपुर, नत्थनपुर, चक रायपुर, आरकेडिया ग्रांट, कांवली, हरबंसवाला, मिट्ठी बेहड़ी, मलुकावाला, खेमादोज, मोहकमपुर खुर्द, बंजारावाला माफी, ईस्ट होम टाउन, लाडपुर में चाय बाग की जमीनें हैं।

1975 के बाद चाय बागान वाली भूमि को बिना सरकार की अनुमति के परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इसका क्रय-विक्रय दंडनीय अपराध है। इसमें दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिबंध के बावजूद इन जमीनों का सौदा हो रहा है। रजिस्ट्री और दाखिला खारिज हो रहे हैं। उन्होंने चाय बागान की जमीनों को खुर्द-बुर्द करने का भी आरोप लगाया। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए डीएम सोनिका ने एडीएम प्रशासन को कार्रवाई के आदेश दिए थे। 

एमडीडीए को भी सूचित किया
एडीएम प्रशासन बरनवाल ने आदेश की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि यूपी के समय ग्रामीण सीलिंग से जमीन को बचाने के लिए कई भूमि स्वामियों ने चाय बाग बताकर छूट मांगी थी। ग्रामीण सीलिंग से चाय बागान की छूट वाली ऐसी जमीनें उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम 1960 के तहत बेची नहीं जा सकतीं। ऐसी जमीनों के खरीद-बिक्री की शिकायत मिली है। ऐसे में इसपर रोक के आदेश जारी किए गए हैं। एमडीडीए को इस बाबत सूचित कर दिया है।