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Lok Sabha Election Result 2019 : उत्तराखंड में दो बार लगातार पांचों संसदीय सीटें जीतने का बना रिकॉर्ड


उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद पहली बार कोई राजनीतिक दल लोकसभा की पांचों सीटें लगातार दूसरी बार जीतने का इतिहास बनाने में कामयाब हुआ है। इसकी प्रमुख वजह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जनता में जादू बरकरार रहना और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की जीरो टॉलरेंस नीति को माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से लगाव रहा। पांच साल के कार्यकाल में वे दस बार उत्तराखंड आ चुके हैं। यहां तक कि लोकसभा चुनावों का प्रचार खत्म होने के बाद वे उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे पर आए और बाबा केदार के दर्शन के बाद कई घंटे गुफा में ध्यान किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले आम चुनाव में उत्तराखंड में चार चुनावी जनसभाएं की थीं, जबकि इस दफा देहरादून और रुद्रपुर में दो ही रैलियां कीं। इसके बावजूद भाजपा के पांचों दावेदार बड़े अंतर से जीते।

प्रधानमंत्री ने जिस अंदाज में उत्तराखंड के दौरे किए, उससे जनता का भाजपा के प्रति अपनत्व भी बढ़ा है और इसका फायदा जनता ने उन्हें चुनाव में दिया।  उत्तराखंड में त्रिवेंद्र रावत सरकार के सवा दो साल के कार्यकाल पर भी जनता ने एक तरह से मुहर लगाई है। खासकर, सीएम की छवि, सचिवालय को दलालों से छुटकारा, भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति, इन्वेस्टर्स समिट के जरिए निवेश को बढ़ावा, उत्तराखंड के सभी लोगों को पांच लाख रुपये    तक फ्री इलाज आदि नीतियां जनता को भा गईं। त्रिवेंद्र रावत उत्तराखंड के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हो चुके हैं जो राज्य में सत्ता में रहते हुए लोकसभा की पांचों सीटें पार्टी को जिताने में कामयाब रहे। इससे पहले वे थराली विस उपचुनाव और फिर निकाय चुनावों में जीत हासिल कर चुके हैं।  निश्चित तौर पर पार्टी हाईकमान की नजरों में वे और मजबूती के साथ उभर कर आए हैं, जिसका निकट भविष्य में उन्हें फायदा भी मिलेगा।

 

पहली बार टूटा तिलिस्म
उत्तराखंड बनने के बाद राज्य में सरकार रहते कभी भी कोई राजनीति दल लोकसभा की पांचों सीटें नहीं जीत पाया था, लेकिन इस बार सीएम त्रिवेंद्र रावत ने इस तिलिस्म को तोड़ डाला। वर्ष 2002 में राज्य में कांग्रेस की एनडी सरकार थी। वर्ष 2004 में हुए आम चुनाव में तब तीन सीटें भाजपा व एक-एक सीट कांग्रेस व सपा के खाते में गई। 2007 के विस चुनाव में भाजपा की खंडूड़ी सरकार आई तो 2009 के आम चुनाव में राज्य की पांचों सीटों पर कांग्रेस कब्जा करने में कामयाब रही। 2012 के विस चुनाव में कांग्रेस सत्ता में आई, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में पांचों सीटों पर भाजपा ने परचम फहराया। वर्ष 2017 के विस चुनाव में भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार ने सत्ता संभाली और इस बार भाजपा ने पुरानी परंपरा तोड़ते हुए पांचों संसदीय सीटें लगातार दोबारा जीतने का इतिहास रचा।  

 

त्रिवेंद्र ने अकेले कीं 52 चुनावी सभाएं
लोकसभा चुनावों के आचार संहिता लागू होने के बाद सीएम त्रिवेंद्र ने 23 मार्च से लेकर नौ अप्रैल तक राज्य में अकेले ही 52 चुनावी सभाएं की। उन्होंने इनमें से सबसे ज्यादा अल्मोड़ा संसदीय क्षेत्र में फोकस किया। दरअसल, केंद्र में मंत्री होने के बावजूद अजय टम्टा अपने को साबित नहीं कर पाए थे। इस वजह से उनके कमजोर स्थिति को भांप कर सीएम ने इस संसदीय क्षेत्र के 11 से ज्यादा सभाएं की। इस दौरान उन्होंने लगभग पार्टी संगठन, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के साथ 200 बैठकें भी की। वहीं राज्य में चुनाव संपन्न होने के बाद पांच राज्यों में 13 से ज्यादा चुनावी सभाओं में पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में बिगुल फूंका। 
 

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  • Web Title:bjp wins five lok sabha seats for second consecutive term in uttarakhand