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Lok Sabha Elections Result 2019: भाजपा के कितने विधायकों ने दिलाई लीड, पढ़िए

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लोकसभा चुनावों में राज्य में सर्वाधिक मतों से लीड दिलाने का रिकॉर्ड भाजपा के रुद्रपुर विधायक राजकुमार ठुकराल के नाम रहा। उन्होंने अपने विस क्षेत्र में नैनीताल-यूएसनगर सीट से भाजपा के उम्मीदवार रहे अजय भट्ट को 59 हजार 183 मतों से बढ़त दिलाई। निर्वाचन आयोग ने ईवीएम-पोस्टल बैलेट के मतों के आंकड़े जारी कर दिए हैं। पोस्टल बैलेट के मत जुड़ने के बाद भाजपा प्रत्याशियों की जीत का अंतर भी बढ़ गया। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के ऋषिकेश विस क्षेत्र से बढ़त का अंतर सबसे अधिक यानी 63 हजार 219 रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत के विधानसभा क्षेत्र डोईवाला से हरिद्वार संसदीय क्षेत्र के उम्मीदवार डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को 52,228 मतों से बढ़त मिली। लेकिन, विधायकों में राजकुमार ठुकराल का जलवा रहा। 

इसके बाद विधायक बंशीधर भगत के विस क्षेत्र कालाढुंगी से अजय भट्ट को 51 हजार 927 मतों से बढ़त मिली। भाजपा के विधायकों में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा बढ़त दिलाने वाली विस सीट रायपुर रही। यहां उमेश शर्मा काऊ विधायक हैं। चौथे नंबर पर विधायक विनोद चमोली की विस सीट धर्मपुर रही। यहां से निशंक को 36,436 मतों से बढ़त मिली। हालांकि, भाजपा को लीड दिलाने का सबसे ज्यादा श्रेय नरेंद्र मोदी को जाता है। उनका जादू जनता में ऐसा चला कि विरोधी चारों खाने चित हो गए, लेकिन इस मामले में थोड़ी बहुत भूमिका विधायकों ने भी निभाई। मंत्रियों में सुबोध रहे सुपर: कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल मंत्रियों में सबसे सुपर रहे। उनके नरेंद्रनगर विस क्षेत्र से तीरथ को 30,715 मतों से बढ़त मिली। कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के विस क्षेत्र कोटद्वार से 27,257 की लीड रही। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के विस क्षेत्र चौबट्टाखाल से भाजपा को 15 हजार 296 वोटों की लीड मिली। सबसे कम लीड दिलाने वाले मंत्रियों में रेखा आर्य और यशपाल आर्य शामिल रहे। रेखा ने सोमेश्वर से अजय टम्टा को 9,302 और यशपाल ने भट्ट को 14 हजार 495 मतों से बढ़त दिलाई।


कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए विधायकों में काऊ अव्वल
कांग्रेस पार्टी को छोड़कर भाजपा में शामिल नेता और विधायकों में सर्वाधिक लीड रायपुर के विधायक उमेश शर्मा काऊ के विधानसभा क्षेत्र में मिली। यहां से टिहरी सीट की प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह को 45,053 वोटों से बढ़त मिली। वहीं, सितारगंज विधायक सौरभ बहुगुणा ने अजय भट्ट को 27,775 वोटों की लीड दिलाई। इसके बाद रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा रहे और निशंक को 17,977 मतों से बढ़त दिलाने में कामयाब रहे। नैनीताल विधायक संजीव आर्य सबसे कम वोट 11,224 ही दिला पाए। खानपुर से विधायक कुंवर प्रणव चैंपियन 17,748 और यमुनोत्री विधायक केदार रावत 15,062 वोटों से अपनी पार्टी के प्रत्याशियों को बढ़त दिला पाए।

मोदी जी! सरकार में उत्तराखंड को जरूर तरजीह देंगे
देहरादून। देवभूमि के आशीर्वाद से भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला। पांचों सीटें रिकार्ड अंतर से पार्टी ने जीतीं। ऐसे में मोदी जी, सरकार में राज्य को जरूर तरजीह देंगे। आम चुनाव में जीत के बाद शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय में इस तरह की चर्चाएं होती रहीं। सुबह से ही यहां कार्यकर्ताओं की चहल पहल रही। हर आधे-एक घंटे में कोई ना कोई कार्यकर्ता मिठाई का डिब्बा लेकर पहुंचता रहा। धर्मपुर विधायक विनोद चमोली और राजपुर रोड के विधायक खजानदास भी पहुंचे। उन्होंने कार्यकर्ताओं को जीत की बधाई दी। प्रदेश प्रवक्ता वीरेंद्र बिष्ट और सह मीडिया प्रभारी संजीव वर्मा भी दिनभर कार्यकर्ताओं के साथ खुशी बांटते रहे। कुछ नेता तो केंद्रीय मंत्रिमंडल को लेकर कयासबाजी में लगे रहे। भाजपा के प्रांतीय महामंत्री संगठन नरेश बंसल, मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन भी कार्यकर्ताओं के साथ जीत के अंतर पर चर्चा करते रहे।

बहन ही भारी पड़ी भाई पर
देहरादून। गढ़वाल सीट के तहत यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र में संघर्ष एकतरफा दिखाई दिया। यहां बहन ने भाई के छक्के छुड़ा दिए और वोटों में सेंधमारी नहीं होने दी। रिटायर मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी की विरासत अब उनकी बेटी ऋतु संभाल रही हैं। आम चुनावों में बीसी खंडूड़ी के बेटे मनीष ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। गढ़वाल सीट से किस्मत आजमाई, लेकिन उन्हें राजनीति की पहली पारी में शिकस्त का सामना करना पड़ा। मनीष के कांग्रेस में शामिल होने पर तब बहन ऋतु खंडूड़ी ने शुभकामनाएं दीं और कहा था वे अपनी जगह और भाई अपनी जगह ईमानदारी से काम करेंगे। यही उनके परिवार के संस्कार हैं। माना जा रहा था कि मनीष यमकेश्वर में फायदा उठा सकते हैं, मगर उन्हें मात खानी पड़ी। बहन ने भाई को वोटों में सेंध तक नहीं लगाने दी। इस क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी तीरथ को 31,373 वोट मिले, जबकि मनीष को 9,839 वोट मिले। यानी ऋतु पार्टी प्रत्याशी को 21,534 वोटों से बढ़त दिलाने में सफल रहीं।

बसपा चार फीसदी मतों पर सिमटी 
देहरादून। इस लोकसभा चुनाव में बसपा उत्तराखंड में 4.48 प्रतिशत मत ही जुटा पाई। यह पिछली बार के मत प्रतिशत 4.78 से भी कम रहा। पार्टी ने यहां यूपी की तर्ज पर सपा से महागठबंधन किया था। गढ़वाल सीट को छोड़कर शेष चार जगह प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहे। बसपा का सबसे अच्छा प्रदर्शन हरिद्वार लोकसभा सीट पर रहा। यहां पार्टी के प्रत्याशी डॉ. अंतरिक्ष सैनी 1,73,528 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। सैनी जमानत बचाने वाले बसपा के एक मात्र उम्मीदवार रहे। सैनी के प्रचार के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती तक रुड़की में आई थीं। इसके अलावा नैनीताल में पार्टी प्रत्याशी नवनीत अग्रवाल तीसरे पायदान पर रहे। हालांकि उन्हें 28,455 मत ही मिल पाए। अल्मोड़ा में प्रत्याशी सुंदर धौनी 10,190 मतों के साथ नोटा के बाद चौथे स्थान पर रहे, जबकि टिहरी में बसपा के प्रत्याशी सत्यपाल महज 4,582 मतों के साथ सातवें स्थान पर रहे। वहीं, निर्दलीयों में टिहरी से कथा वाचक गोपालमणि ही एक प्रतिशत से अधिक मत पा सके। उन्हें 10,686 मत मिले। शेष कोई निर्दलीय एक प्रतिशत की बाधा पार नहीं कर पाया। वामदलों ने भी टिहरी, नैनीताल और गढ़वाल में प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन कोई भी उम्मीदवार एक प्रतिशत की सीमा को पार नहीं कर पाया।


अग्निपरीक्षा में पास हो गई ईवीएम 
ंदेहरादून। ईवीएम पर उठे सवालों के बीच, ईवीएम के मतों का वीपीपैट से मिलान का प्रयोग उत्तराखंड में शत-प्रतिशत सटीक बैठा है। भारत निर्वाचन आयोग ने इस बार सभी बूथों पर ईवीएम के साथ वीवीपैट भी लगाई थी। यह प्रयोग पहली बार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उत्तराखंड में 350 बूथों के वीवीपैट औचक मिलान के लिए चुनी गईं। साथ ही मॉक पोल से प्रभावित छह बूथ के वीवीपैट के आंकड़े भी गिने गए। मगर, किसी भी बूथ पर ईवीएम और वीवीपैट के मतों में अंतर नहीं मिला। वहीं, मतगणना के बाद भी निर्वाचन आयोग ने चुनाव में इस्तेमाल की गई ईवीएम और वीपीपैट को डबल लॉक में रखने को कहा है। इसके लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ जगह कोषागार, जबकि कुछ जगह तहसील में कड़ी सुरक्षा के साथ ईवीएम और वीपीपैट सुरक्षित रखी जाएंगी।


 

 

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