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6 मार्च, 2021|5:32|IST

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चुनावी साल में शिक्षकों को खुश करने की कोशिश में जुटी सरकार,ये हैं मुदे 

उत्तराखंड में चुनावी साल शुरू होते ही भाजपा सरकार ने शिक्षकों की लंबित मांगों की फाइलों से धूल झाड़नी शुरू कर दी। फिलहाल बेसिक से माध्यमिक स्तर के शिक्षकों के दस प्रमुख मुद्दों पर फोकस है। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने सचिव और निदेशक को इनके समाधान का रास्ता तलाशने के निर्देश दिए हैं। सचिवालय में मंत्री सोमवार को इन प्रमुख मुद्दों समेत 26 विभिन्न विषयों की समीक्षा करेंगे। बेसिक से माध्यमिक स्तर तक कार्यरत 60 हजार से ज्यादा स्थायी शिक्षकों के साथ ही शिक्षा मित्रों और अतिथि शिक्षकों की 10 मुख्य समस्याएं कई साल से उलझी हुई हैं।

हालांकि, मांगों की फेहरिस्त लंबी है, लेकिन शिक्षकों में सबसे ज्यादा नाराजगी दस मुद्दों पर ही है। पिछली सरकार के समय भी इनका हल नहीं निकला तो वर्तमान सरकार के कई बार आश्वासन देने के बावजूद हालात ‘ढाक के तीन पात’ जैसे ही हैं। चुनावी साल देखते हुए सरकार चाह रही है कि, शिक्षकों को सबसे अधिक प्रभावित करने वाली समस्याओं का कुछ न कुछ हल निकाल लिया जाए। उत्तराखंड की सियासत में शिक्षक-कर्मचारियों की भूमिका हमेशा अहम रही है। इसलिए कोई भी सरकार यह नहीं चाहती कि दोनों वर्ग उससे नाराज हों।

प्रमुख मांगें
-सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार चयन-प्रोन्नत वेतनमान में एक इंक्रीमेंट का लाभ दिया जाए
-एक जनवरी 2006 के बाद पदोन्नत शिक्षकों से अतिरिक्त वेतनमान की वसूली पर रोक लगाए सरकार
-बेसिक से एलटी में समायोजित किए गए शिक्षकों को चयन और प्रोन्नत वेतनमान में पूर्व की सेवा का लाभ
-बेसिक स्कूलों में तैनात औपबंधिक, नॉन टीईटी औपबंधिक और नॉन टीईटी शिक्षा मित्रों के नियमितीकरण का

मुद्दा
-अशासकीय स्कूलों के पीटीए शिक्षकों को तदर्थ नियमितीकरण का लाभ दिया जाए
-हेडमास्टर और प्रधानाचार्य के हजार से ज्यादा खाली पदों पर प्रमोशन-नियुक्ति
-अतिथि शिक्षकों का मानदेय बढ़ाने और उनकी गृह जिले में नियुक्ति का मामला
-उच्च शिक्षा विभाग के समान विद्यालयी शिक्षा के शिक्षकों को यात्रावकाश मिले
-नियुक्ति में देरी और चुनाव आचार संहिता के कारण देर से ज्वाइन करने वालों को पुरानी पेंशन का लाभ दिया जाए
-तबादला ऐक्ट का सौ फीसदी पालन हो

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  • Web Title:bjp government uttarakhand governmetn chief minister trivendra singh rawat led state government trying to oblige teachers during vidhan sabha election year