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गीले कूड़े से बनाई जाएगी जैविक खाद, जानिए कैसे

Garbage dump (Symbolic image)

उत्तराखंड की सभी सरकारी कॉलोनियों में अब सूखा और गीला कूड़ा अलग- अलग जमा किया जाएगा। इसके साथ ही गीले कूड़े से जैविक खाद भी बनाई जाएगी। मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों को निर्देश जारी कर अपने नियंत्रण वाली विभागीय कॉलोनियों में इस नियम को सख्ती से पालन कराने को कहा है।  सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमावली 2016 के तहत केंद्र सरकार पहले ही सूखे और गीले कूड़े को स्रोत पर अलग करना अनिवार्य कर चुकी है। इसके तहत पांच हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल वाली आवासीय कॉलोनियों, होटल- रेस्टोरेंट, कमर्शियल भवनों के लिए भी गीले कूड़े को अपने ही परिसर में अलग जमा कर जैविक खाद बनाने पर जोर दिया गया है।  मुख्य सचिव ने कहा है कि  गीले कूड़े से खाद बनाने पर जोर दिया जाए। इसकी शुरुआत सरकारी कॉलोनियों से करने का निर्णय लिया गया है।  इस योजना को लागू करने की जिम्मेदारी शहरी विकास विभाग को दी गई है। दरअसल घरेलू कूड़े में गीले कूड़े की हिस्सेदारी करीब पचास प्रतिशत होती है।यदि इसे अलग कर दिया जाए तो  शेष सूखे कूड़े को प्रोसेस करना आसान होगा। शहरी विकास सचिव शैलेश बगौली का कहना है कि सरकारी कॉलोनियों से इसे शुरू किया जा रहा है।

 

देहरादून के लिए अहम
देहरादून में आईएएस, आईपीएस, सचिवालय, पुलिस लाइन सहित राज्य सरकार के तमाम प्रमुख विभागों की कॉलोनियां तो है ही, साथ ही केंद्र सरकार की भी दो दर्जन से अधिक कॉलोनियां है। जिनमें अधिकांश का क्षेत्रफल पांच हजार वर्गमीटर से अधिक है। इन कॉलोनियों में करीब एक लाख आबादी रहती है। इसके साथ ही होटल, रेस्टोरेंट, कॉलेज, हॉस्टल भी बड़ी संख्या में हैं। इस तरह अगर इन कॉलोनियों में गीला कूड़ा अलग कर लिया जाए तो, कूड़े की समस्या काफी हद तक कम जो जाएगी।

 

 

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