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अयोध्या में श्रीराम-सीता माता के साथ नंदादेवी के लगेंगे जागर, इस दिन को रहें तैयार

जागर गायन में हुड़का एक अहम वाद्ययंत्र है। बसंती बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड में नंदा के जागरों के साथ ही राम-सीता के प्रसंगों से जुड़े अनेक जागर प्रचलित हैं। अयोध्या में प्रस्तुति होगी।

अयोध्या में श्रीराम-सीता माता के साथ नंदादेवी के लगेंगे जागर, इस दिन को रहें तैयार
Himanshu Kumar Lallदेहरादून। शैलेन्द्र सेमवालMon, 26 Feb 2024 02:10 PM
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Ayodhya News Hindi: जागर गायिका पद्मश्री बसंती बिष्ट चार मार्च को अयोध्या में नंदा देवी के साथ प्रभु श्रीराम, माता सीता के जागरों की प्रस्तुति देंगी। श्रीराम मंदिर बनने के बाद अयोध्या में प्रस्तुति देने वाली बसंती बिष्ट पहली उत्तराखंडी लोक गायिका होंगी।

श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने देशभर के पद्मश्री कलाकारों को अयोध्या में अपनी प्रस्तुतियां देने के लिए आमंत्रित किया है। बसंती बिष्ट ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि ट्रस्ट की ओर से उन्हें कार्यक्रम की प्रस्तुति का आमंत्रण मिल गया है।

यह उनका सौभाग्य है कि ट्रस्ट की ओर से उन्हें आमंत्रित किया गया है। उनके भी मन में अन्य लोगों की तरह राम मंदिर दर्शन की उत्कंठा थी। पांच से छह सदस्यीय उनके दल में उत्तराखंड के प्रमुख हुड़का वादक रामचरण जुयाल भी होंगे। 

जागर गायन में हुड़का एक अहम वाद्ययंत्र है। बसंती बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड में नंदा के जागरों के साथ ही राम-सीता के प्रसंगों से जुड़े अनेक जागर प्रचलित हैं। वह अयोध्या में इन्हीं जागरों की प्रस्तुति देंगी।

इन जागरों में भगवान विष्णु के प्रभु राम के रूप में जन्म लेने का प्रसंग और सीता माता का धरती से प्रकट होने का प्रसंग प्रमुख है। जागरों के साथ ही वह आंछरी-ऐड़ी नृत्य का भी प्रदर्शन करेंगी।

मान्यता: सीता के साथ जन्मी थीं आंछरियां
जागर गायिका बसंती बिष्ट के अनुसार, मान्यता है कि जनकपुरी में जब धरती से सीता माता का प्रकाट्य हुईं तो घनघोर बारिश के बीच उनके साथ कई आंछरियां (परी) भी आती हैं। वह सीता से कहती हैं कि आप तो राजघराने जा रही हैं, लेकिन हम कहां जाएंगे?

तो सीता माता सभी को हिमालय जाने को कहती हैं कि वहां पहाड़वासी तुम्हारी पूजा करेंगे। हुआ भी ऐसा ही, उत्तराखंड के उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में आंछरियों का वास माना जाता है और पहाड़ों में आज भी आंछरी पूजी जाती हैं।

क्या है जागर गायन
उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं में प्रचलित पूजा पद्धतियों एवं लोकगीत शैली में ‘जागर’ भी एक है। जागर गायन एक ऐसा तरीका है, जिसमें लोक देवताओं का आह्वान किया जाता है।

उनकी वीरता का बखान कर जागर में देवताओं से जुड़े प्रसंग सुनाए जाते हैं। जागर का अर्थ जगाना होता है। जागर के माध्यम से देवी-देवताओं से अनिष्ट से रक्षा और सुख-शांति की कामना की जाती है।

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