avalanche was reason behind kedarnath tragedy in uttarakhand - केदारनाथ धाम में हिमस्खलन से आई थी भीषण आपदा DA Image
15 दिसंबर, 2019|9:16|IST

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केदारनाथ धाम में हिमस्खलन से आई थी भीषण आपदा

kedarnath disaster

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) के शोध के मुताबिक, केदारनाथ में 2013 में हिमस्लखन के कारण भीषण आपदा आई थी। चौराबाड़ी झील के नजदीक ऐसी ढलान थी, जहां ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा था। इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं को केदारनाथ मंदिर के आसपास बर्फ के बड़े  बड़े टुकड़े भी मिले थे। यह निष्कर्ष सेटेलाइट इमेज के शोध के आधार पर निकाला गया है। बुधवार को आईआईआरएस के वैज्ञानिकों ने यमुना कॉलोनी स्थित कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के सामने कई तथ्य रखे। वाडिया के वैज्ञानिकों ने भी इसरो की इस बात का समर्थन किया है। वाडिया ने बताया कि शोध के दौरान उन्हें भी चौराबाड़ी झील के बेहद करीब एवलांच (हिमस्खलन) का सुराग मिला था। वैज्ञानिकों के अनुसार, बड़े-बड़े हिमखंड टूटने से चौराबाड़ी झील का पानी तेजी से केदारनाथ धाम के आबादी क्षेत्र को तहस-नहस करता हुआ आगे बढ़ चला था। प्रत्यक्षदर्शियों ने चौराबाड़ी झील से बहुत सारा पानी मंदिर की तरफ बढ़ते देखा था। वैज्ञानिक डॉ. पीके चम्पती राय के अनुसार, एवलांच से इस झील में जमा काफी पानी एक  झटके में ढलान में बहने लगा और चंद मिनटों में मंदिर तक पहुंच गया था। उन्होंने यह भी कहा कि झील टूटने जैसी बातें निराधार थीं।

 

वैज्ञानिक डोभाल बोले, चौराबाड़ी झील से फिलहाल नुकसान की आशंका नहीं
वाडिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीपी डोभाल ने बताया कि फिलहाल केदारनाथ मंदिर के ऊपर चौराबाड़ी ताल से नुकसान की कोई आशंका नहीं है। जून 2013 में केदार घाटी में आपदा के बाद ताल का मुहाना पूरी तरह से खुल चुका है। हिमालयी क्षेत्र की झीलों पर वाडिया की नजरें बनी हुई हैं। बदरीनाथ धाम के पास सतोपंथ ग्लेशियर की झील से पानी बाहर निकल रहा है। गंगोत्री ग्लेशियर में बन रही झील को लेकर भी वैज्ञानिक चिंतित हैं।  

 

केदारनाथ में इस साल पड़ी रिकार्ड 41 फीट बर्फ
देहरादून। वाडिया इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.डीपी डोभाल के अनुसार इस साल केदारनाथ में रिकार्ड 41 फीट तक बर्फबारी हुई है। पिछले दस सालों में ये आंकड़ा अधिकतम है। वाडिया के वैज्ञानिक अभी केदारनाथ में इस साल हुई बारिश के आंकड़े भी जुटा रहे हैं। संस्थान के वैज्ञानिक डा.डीपी डोभाल के अनुसार वर्ष 2014-15 में अधिकतम बीस फीट तक बर्फबारी रिकार्ड की गई थी। जबकि पिछले दस सालों में इस बार केदारनाथ में इतनी बर्फबारी हुई है। बर्फबारी से संस्थान के चौराबाड़ी ताल के पास स्थित संस्थान के बेस कैंप को नुकसान पहुंचा। लगाए उपकरण भी बर्फ में दब गए। अधिक बर्फ गिरना अच्छा संकेत है। पर मौसम चक्र में लगातार बदलाव के चलते ये स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि आने वाले सालों में क्या स्थिति बनती है। 
 

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