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उत्तराखंडAspirants के 'एसके सर' का पहाड़ों से गहरा नाता, कही दिल छू लेने वाली बात

देहरादून। ठाकुर सिंह नेगीPublished By: Deep Pandey
Tue, 01 Jun 2021 07:55 AM
Aspirants के 'एसके सर' का पहाड़ों से गहरा नाता, कही दिल छू लेने वाली बात

सिनेमा की दुनिया में सुर्खियां बटोर रही वेबसीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ में एसके सर उर्फ श्वेतकेतु झा का किरदार निभाने वाले अभिलाष बिहारी नहीं पहाड़ी हैं। जी हां, फिल्म में बिहारी टच वाली जुबान और हावभाव से दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिलाष का पहाड़ों से गहरा नाता है। फिल्म में लाजवाब अभिनय की बदौलत वाहवाही लूट रहे अभिलाष के रूप में देवभूमि ने हिंदी सिनेमा को एक नया सितारा दिया है। 

रूपहले पर्दे की दुनिया में पहचान बनाने वाले उत्तराखंडियों में एक नया नाम जुड़ गया है अभिलाष थपलियाल। रेडियो जॉकी (आरजे) से कॅरियर शुरू करने के बाद फिल्मी दुनिया में अपनी धमक दिखाने वाले अभिलाष हाल ही में ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज वेबसीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ से चर्चाओं में आए हैं। फिल्म में ‘एसके सर’ के किरदार से दर्शकों पर छाप छोड़ने वाले अभिलाष मूलरूप से पौड़ी के खातस्युन श्रीकोट के रहने वाले हैं। पिता स्वर्गीय नवीन चंद्र थपलियाल फौजी थे तो उन्हीं के साथ जम्मू कश्मीर, पंजाब, मध्य प्रदेश और दिल्ली में बचपन बीता। पहाड़ के ज्यादातर सैन्य पृष्ठभूमि वाले बच्चों की तरह अभिलाष की स्कूलिंग भी केंद्रीय विद्यालय में हुई। डीयू में आगे की पढ़ाई के बाद दिल्ली में बतौर आरजे कॅरिअर शुरू किया। रेडियो पर लोकप्रियता हासिल कर मुंबई पहुंचे। 

‘हिन्दुस्तान’ से खास बातचीत में अभिलाष ने बताया कि उन्होंने अपने नाम से थपलियाल सरनेम नहीं हटाया, न वह कभी ऐसा सोचेंगे। वह कहते हैं कि यह सरनेम उनकी पहचान है। उत्तराखंड में भले ही मेरा वक्त कम गुजारा हो, लेकिन मातृभूमि से अपना नाता नहीं तोड़ सकते। वह तीन-चार बार ही अपने गांव गए हैं। उनकी मां इस वक्त बहन के साथ दिल्ली में रहती हैं, जबकि वह पत्नी के साथ मुंबई में रह रहे हैं। पहाड़ से दूर बड़े शहरों में रहकर भी उनके घर का माहौल पूरा पहाड़ी है। कहते हैं, आपस में गढ़वाली में बातचीत करते हैं। किसी भी कल्चर की अहम चीजें होती हैं उसकी जुबान, वहां का खाना और उस जगह का अनुभव। जगह का अनुभव उतना नहीं है, लेकिन जुबान और खाना वहीं का है। अभी भी घर में चैंसूड़ा और पांडू बनता है। मूली की थिचौड़ी बनती है। इस तरह अपनी जड़ों से किसी न किसी रूप में आज भी जुड़े हैं।

खुद को पहाड़ी बताने से शर्माना क्यों
बड़े शहरों में हाई क्लास सोसाइटी का हिस्सा बनकर कुछ लोग खुद को गढ़वाली बताने से बचते हैं। इस सवाल के जवाब में अभिलाष कहते हैं कि गर्व से कहता हूं कि मैं पहाड़ी हूं। पता नहीं कैसे और क्यों लोग खुद को गढ़वाली या कुमाउनी बताने से शर्माते हैं। खासकर युवाओं में ऐसी प्रवृति दिख रही है। पहाड़ों ने देश को कितनी बड़ी चीजें दी हैं। हमारी पहचान और इतिहास गौरवशाली है। हम लोगों को अपनी पहचान छुपाने की क्या जरूरत है। 

मुंबई अच्छा शहर, अच्छा काम दे रहा है
मुंबई में अभिलाष एक एफएम चैनल पर शाम का शो करते हैं। कहते हैं, लोगों को मेरा अभिनय पसंद आया तो स्क्रीन पर भी मौका मिलने लगा। मुंबई में करीब पांच साल हो गए हैं। फिल्म-टीवी में लगातार काम मिलता रहा है। अब वेबसीरीज के जरिये और अच्छा मौका मिला है। मुंबई अच्छा शहर है। अच्छा काम दे रहा है। 

जीवन के अनुभव से उभरा एसके का किरदार
पहाड़ी होकर भी एक बिहार की पृष्ठभूमि वाले युवक एसके का किरदार कैसे निभाया? इस सवाल के जवाब में अभिलाष कहते हैं कि मैं ट्रेंड एक्टर नहीं हूं। यह मेरे अनुभव का नतीजा है। मेरे किरदार बाहर से आते हैं। मैं जीवन में किसी को देखता हूं तो उसे महसूस करता हूं। मेरे आसपास बहुत सारे ऐसे किरदार हैं। बहुत सारे एसके के साथ जीवन बिताया है तो आसान हो जाता है। 

मुझे एकबार पहाड़ी किरदार करना है बल!
अभिलाष कहते हैं कि मुझे पहाड़ी किरदार करने की बड़ी तमन्ना है। मजाकिया अंदाज में कहते हैं, बल पता नहीं मैं कैसे करूंगा, कब करूंगा पर मुझे गढ़वाली किरदार करना है बल। कहा कि कई फिल्में देखी, जिसमें लगता है कि पहाड़ी किरदार के साथ न्याय किया नहीं गया। भावी योजना को लेकर अभिलाष कहते हैं कि टीवी और सिनेमा से जुड़े काफी सारे लोगों ने संपर्क किया है। अभी तो शूट भी शुरू नहीं हो पाया है, लेकिन कहानियां बहुत सारी आ रही हैं। आने वाले दिनों में अपने किरदारों में बदलाव करना चाहूंगा। 

पहाड़ के लिए कुछ करने की तमन्ना
अभिलाष बताते हैं कि तीन महीने पहले उनके पिता का निधन हो गया था। वे कैंसर से ग्रसित थे। इस फिल्म को उनके पिता नहीं देख पाए, इसका उन्हें जीवनभर मलाल रहेगा। क्योंकि जब फिल्म की शूटिंग चल रही थी उनके पिता का इलाज चल रहा था। अभिलाष चाहते थे कि वह पिता को समय दें, लेकिन पिता ने उन्हें फिल्म पर ध्यान देने के लिए कहा। बताया कि पिता के निधन के बाद वह पितृ-कुड़ी करने के लिए गांव गए थे। कहा कि पहाड़ों के लिए बहुत कुछ करना है। इस धरती ने मुझे बहुत कुछ दिया है। वह कहते हैं कि शिक्षा एक ऐसी चीज है, जो आने वाली पीढ़ी को बदल देती है। इसलिए वह सोच रहा हूं कि पहाड़ में बच्चों की शिक्षा को लेकर योगदान दूं। 

वेबसीरीज के निर्देशक अपूर्व भी उत्तराखंड से
अगर ये कहें कि वेबसीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ की सफलता के पीछे दो उत्तराखंडियों का हाथ है तो कुछ गलत नहीं होगा। फिल्म में प्रमुख भूमिका में जहां अभिलाष नजर आते हैं। वहीं फिल्म के निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की भी उत्तराखंड से हैं। फिल्म में कार्की के काम की भी बहुत तारीफ हो रही है। अपूर्व कुमाऊं से हैं। अभिलाष कहते हैं, अपूर्व के अंदर भी पहाड़ीपन है। पहाड़ी होने के चलते हम बहुत कनेक्ट कर रहे थे। अपूर्व निर्देशक ही नहीं बहुत कमाल के एक्टर भी हैं। अपूर्व कार्की दिल्ली में रहते हैं। 

सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है फिल्म
कोरोना संकट की दूसरी लहर के बीच सोशल मीडिया पर ‘एस्पिरेंट्स’ वेब सीरीज सुर्खियां बटोर रही है। टीवीएफ की इस वेब सीरीज ने बड़े-बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म को हिलाकर रख दिया है। पांच एपिसोड की ये सीरीज ‘द वायरल फीवर’ यू-ट्यूब चैनल पर रिलीज हुई। पिछले करीब दो महीने से सोशल मीडिया में इसकी चर्चा है। इसके एक्टर छाए हुए हैं। अभिलाष, गुरी और एसके तीन मुख्य किरदार हैं, जिनके इर्द-गिर्द फिल्म की कहानी बुनी गई है। तीनों यूपीएससी पास करने की तमन्ना लेकर दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में कोचिंग करते हैं। दोस्ती, सपने, मेहनत और प्यार के एंगल पर कहानी उतार-चढ़ाव लिए बांधे रखती है। वेब सीरीज के प्रत्येक एपिसोड को दो से तीन करोड़ व्यू मिल चुके हैं। रिलीज के वक्त हर एपिसोड यू-ट्यूब के टॉप ट्रेंड में रहा।

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