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Hindi News उत्तराखंड144 घंटे तक ऑनलाइन गिरफ्तारी और फ्रॉड का अनोखा तरीका, साइबर ठगों ने वैज्ञानिक से 56 लाख ठगे

144 घंटे तक ऑनलाइन गिरफ्तारी और फ्रॉड का अनोखा तरीका, साइबर ठगों ने वैज्ञानिक से 56 लाख ठगे

देहरादून के हाथीबड़कला में आईआईआरएस में सुरेंद्र कुमार शर्मा बतौर वैज्ञानिक तैनात हैं। वे मूल रूप से राजस्थान के हैं। पांच जून की सुबह साढ़े आठ बजे उनको अनजान नंबर से कॉल आई थी। पुलिस जांच कर रही है।

144 घंटे तक ऑनलाइन गिरफ्तारी और फ्रॉड का अनोखा तरीका, साइबर ठगों ने वैज्ञानिक से 56 लाख ठगे
Himanshu Kumar Lall  देहरादून, अंकित कुमार चौधरीTue, 25 Jun 2024 12:15 PM
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग यानी आईआईआरएस के युवा वैज्ञानिक को 144 घंटे तक ऑनलाइन गिरफ्तार दिखाकर 56 लाख रुपये ऐंठ लिए गए।  साइबर ठगी के इस अनोखे तरीके से पुलिस भी हैरान रह गई। पुलिस ने केस दर्ज कर इस मामले की जांच शुरू कर दी है। पीड़ित मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। 

साइबर ठगों ने एयरपोर्ट पर संदिग्ध पार्सल की बरामदगी और मनी लॉन्ड्रिंग में फंसने का डर दिखाकर इस वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित की तहरीर पर साइबर थाना पुलिस ने हाल ही में मुकदमा दर्ज किया। साइबर थाने के डिप्टी एसपी अंकुश मिश्रा ने सोमवार को बताया कि इस मामले की जांच निरीक्षक विकास भारद्वाज कर रहे हैं।

देहरादून के हाथीबड़कला में आईआईआरएस में सुरेंद्र कुमार शर्मा बतौर वैज्ञानिक तैनात हैं। वे मूल रूप से राजस्थान के हैं। पांच जून की सुबह साढ़े आठ बजे उनको अनजान नंबर से कॉल आई थी। फोन करने वाले ने खुद को कोरियर कंपनी का कर्मचारी बताया। उसने कहा, सुरेंद्र के नाम-दस्तावेज के आधार पर ताइवान भेजा जा रहा पार्सल मुंबई हवाई अड्डे पर पकड़ा गया है।

इसे कस्टम ने नशीले पदार्थ होने के चलते रोका है। लेकिन, सुरेंद्र ने इससे साफ इनकार किया। ठगों ने पीड़ित को एक नंबर देकर कहा कि आप मुंबई क्राइम ब्रांच में बात करके जानकारी दे दें। पीड़ित ने संपर्क किया तो विक्रम सिंह नाम के व्यक्ति ने मुंबई क्राइम ब्रांच कार्यालय बुलाया। लेकिन, सुरेंद्र ने इनकार कर दिया।

विक्रम ने पीड़ित को वीडियो कॉलिंग पर जोड़ा, जहां मुंबई क्राइम ब्रांच शाखा जैसा दृश्य नजर आया। वीडियो में सभी लोग वर्दी में दिखे। खुद को विक्रम बताने वाले ने पीड़ित से आधार कार्ड की फोटो मांगी। कहा गया कि उनका आधार कार्ड अपराधी नवाब मलिक के नेटवर्क से जुड़ा है, जिसे ईडी की गिरफ्त में बताया गया। पीड़ित ने उससे किसी तरह के लिंक से मना किया।

इसके बाद ऑनलाइन सत्यापन के नाम पर संपत्ति और बैंक खातों के बारे में पूछा गया। इसकी जांच के लिए मिलिंद को डीसीपी बताकर पीड़ित से 56 लाख रुपये अपने खातों में जमा करवा लिए गए। इस घटनाक्रम के दौरान ठगों ने पीड़ित को गिरफ्तारी का पत्र भेजकर 144 घंटे ऑनलाइन गिरफ्तार दिखाया था। इस दौरान उनको केवल अपने कार्यालय जाने की ‘अनुमति’ थी।

पैसे भरने के लिए शेयर बेचे, लोन भी उठा लिया
आरोपियों ने युवा वैज्ञानिक को यह कहकर डराया कि आरबीआई के जरिए सुरेंद्र के खातों का सत्यापन होना है। इसके लिए पीड़ित से एक बैंक खाते में 3 लाख 71 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए गए। विक्रम सिंह नाम का व्यक्ति पांच जून को पूरी रात वीडियो कॉलिंग पर पीड़ित की निगरानी करता रहा।

अगले दिन खुद को मिलिंद बताने वाले ने फोन किया, जिसने पीड़ित के शेयर बिकवाकर 13.38 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। इसके बाद केस बंद करने के लिए 14 लाख रुपये मांगे। इन पैसों का इंतजाम करने के लिए पीड़ित ने पांच लाख रुपये का ऑनलाइन लोन लिया। बाकी रकम इधर-उधर से जुटाकर दी गई।

उत्तराखंड में इस तरह ठगी का दूसरा मामला
राज्य में डिजिटल गिरफ्तारी दिखाकर दस लाख रुपये से ज्यादा की ठगी में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में यह दूसरा मामला दर्ज किया गया है। इससे पहले मई महीने में साइबर थाने में ऋषिकेश एम्स के एक डॉक्टर से इसी तरह की ठगी का मामला दर्ज किया गया। उनको साइबर ठगों ने ऑनलाइन गिरफ्तार दिखाकर तेइस लाख रुपये का चूना लगाया। यह डॉक्टर मूल रूप से जम्मू के रहने वाले हैं।

हेल्पलाइन में दर्ज कराएं शिकायत
साइबर ठगी की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन-1930 पर तत्काल दर्ज कराएं। अगर आपको डराने या धमकाने का ऐसा कॉल आता है तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। अगर कोई खास एजेंसी जैसे सीबीआई, ईडी या आयकर विभाग का अफसर बनकर बातचीत कर रहा है तो आप उस एजेंसी के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके जानकारी दें।