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उत्तराखंड के मैदानों के बाद पर्वतीय शहरों में भी गर्मी से निकला दम, चढ़ते तापमान में AC-कूलर का सहारा

बीते सालों तक गर्मी के सीजन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक बाजार में केवल फ्रीज की ही ब्रिकी हुआ करती थी, लेकिन इस बार पड़ रही गर्मी ने लोगों को पंखें, कूलर एसी की भी जरूरत महसूस करा दी है।

उत्तराखंड के मैदानों के बाद पर्वतीय शहरों में भी गर्मी से निकला दम, चढ़ते तापमान में AC-कूलर का सहारा
heat wave and hot day
Himanshu Kumar Lallपिथौरागढ़, संतोष आर्यनSun, 02 Jun 2024 03:45 PM
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उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में प्रचंड गर्मी से जूझ रहे लोग ठंडक पाने पहाड़ों की तरफ रुख कर रहे हैं, लेकिन अब यहां भी लोगों का स्वागत ठंडी हवाओं की जगह चुभती गर्मी से हो रहा है।  उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में भी तापमान बढ़ा है, जिससे लोगों को गर्मी का ऐहसास हो रहा है।

पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में शनिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री रहा। लगातार बढ़ती गर्मी के बाद पहाड़ के लोग एसी-कूलर खरीदने को मजबूर हो गए हैं। जबकि कुछ वर्षों पूर्व तक यहां एसी तो दूर की बात है लोग अपने घरों में पंखों तक का भी इस्तेमाल नहीं करते थे। अल्मोड़ा में भी पारे ने छलांग लगाई है। 

सीमांत में बढ़ती गर्मी ने इलेक्ट्रॉनिक बाजार को भी गर्म करने काम किया है। बीते सालों तक गर्मी के सीजन के दौरान इलेक्ट्रॉनिक बाजार में केवल फ्रीज की ही ब्रिकी हुआ करती थी, लेकिन इस बार पड़ रही गर्मी ने लोगों को पंखें, कूलर एसी की भी जरूरत महसूस करा दी है।

नतीजन इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक बाजार ऐसे खरीदारों से गुलजार है। शहर में रहने वाले लोग हो या फिर गांव के, कोई गर्मी से छुटकारा पाने को पंखा खरीद कर ले जा रहा है तो, वहीं आर्थिक तौर पर सक्षम लोग एसी, कूलर की खरीदारी कर रहे हैं।

सिमलगैर स्थित बाजार में इलेक्ट्रॉनिक का कारोबार करने वाले दो व्यापारी ही अब तक 39 एसी, छह कूलर और 100 से अधिक पंखें की ब्रिकी कर चुके हैं। इसके अलावा अन्य कई दुकानों से भी लोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की खरीदारी कर रहे हैं।

30 हजार से शुरू है एसी का बाजार मूल्य
 बाजार में एसी का मूल्य 30 हजार से लेकर 70 हजार तक है। लोग जरूरत के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं। कूलर छह से सात हजार के बीच में बिक रहा है। टेबल फेन का मूल्य एक से दो हजार रुपये के आसपास है। सिलिंग फैन 1400 और फ्लोर फैन का मूल्य ढाई से तीन हजार रुपये के करीब निर्धारित है।

पिथौरागढ़ में 33 डिग्री अधिकतम तापमान
पिथौरागढ़। शनिवार को इस सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन रहा। आपदा प्रबंधन अधिकारी भूपेंद्र महर ने बताया कि यहां अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री दर्ज किया गया है। मुनस्यारी में शनिवार को यहां अधिकतम तापमान 18 और न्यूनतम तापमान 11 डिग्री रिकॉर्ड दर्ज किया गया।

बढ़ती गर्मी के बीच बाजार में एसी, कूलर, पंखों की मांग बढ़ गई है। बड़ी संख्या में लोग दुकान पहुंचकर उक्त सामाग्री खरीद रहे हैं।
दिनेश पांडे, इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी सिमलगैर बाजार

पूर्व की अपेक्षा यहां भी अब गर्मी अधिक हो रही है। लोग एसी की खरीद को पहुंच रहे हैं। अब तक 35 एसी की बिक्री हुई है। 
शेखर पंत, इलेक्ट्रॉनिक कारोबारी सिमलगैर बाजार

अल्मोड़ा में पारा 33 डिग्री पहुंचा, बढ़ाई परेशानी
अल्मोड़ा जिले में दिनों दिन भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शनिवार को मुख्यालय का अधिकतम तापमान एक डिग्री की बढ़ोतरी के साथ 33 डिग्री पहुंच गया। तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी और उमस से लोग पेरशान हैं।

शनिवार सुबह से ही लोगों को उसम भरी गर्मी का सामना करना पड़ा। वहीं, दिन चढ़ते ही चटख धूप ने लोगों की और मुश्किलें बढ़ा दीं। दिन भर चटख धूप खिली रही। इससे तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिन के समय बाजार में भी अन्य दिनों की अपेक्षा लोगों की चहल पहल कम दिखाई दी। वहीं, न्यूनतम तापमान में बढ़ोत्तरी से अब रात में भी लोगों को उमस भरी गर्मी परेशान कर रही है।

गर्मी से बचने के लिए लोग पंखे का सहारा ले रहे हैं। जिला आपदा कंट्रोल रूम से मिली जानकारी अनुसार शनिवार को अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री दर्ज किया गया। लोग गर्मी से बचने के लिए बाजार में छाता का सहारा ले रहे हैं।

अल्मोड़ा से बागेश्वर तक गहराया जल संकट, जोशीगांव में प्रदर्शन
अल्मोड़ा/बागेश्वर। अल्मोड़ा से बागेश्वर तक लोग पेयजल और सिंचाई के पानी के संकट से जूझ रहे हैं। अल्मोड़ा जिलेभर में गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट विकराल होती जा रही है। बीते ढाई माह से ग्रामीण क्षेत्र के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। शनिवार को भी लोग दिन भर पानी की व्यवस्था में जुटे रहे।

जिले के कई विकासखंडों के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से जल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों ने कहा है कि जल संस्थान औपचारिकता के नाम पर सड़क से लगे कस्बों में एक बार टैंकर भेजकर पानी बंटवा रहा है। लेकिन, वह भी लोगों के लिए नाकाफी साबित हो रहा है। वहीं, गांवों में बनी करोड़ों की पेयजल योजनाएं पूरी तरह धरासाई हो गई हैं।

इससे जल संकट और अधिक गहरा गया है। हालांकि जल संस्थान रोजाना सड़क मार्ग से सटे इलाकों में टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति कर रहा है। शनिवार को विभाग ने डोबा, कनरा, चितई, रामकृष्ण कुटीर आश्रम, डीनापानी, गिरचोला, स्यालीधार, काफली, भानादेवली, हवालबाग, शीतलाखेत, लमगड़ा, सिरसौली, जैंती समेत कई जल संकट इलाकों में टैंकरों और पिकअप के माध्यम से पानी का वितरण किया।