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उत्तराखंड में जंगलों में आग लगाने पर ऐक्शन, 39 लोगों को किया गया गिरफ्तार

बताया कि विभाग की ओर से जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ अब तक 227 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 31 मामलों में 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ ऐकशन हेा रहा।

उत्तराखंड में जंगलों में आग लगाने पर ऐक्शन, 39 लोगों को किया गया गिरफ्तार
Himanshu Kumar Lallदेहरादून, हिन्दुस्तानMon, 29 Apr 2024 08:52 PM
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उत्तराखंड में जंगलों में आग लाग लगाने वालों के खिलाफ वन विभाग का सख्त ऐक्शन हुआ है। वन विभाग ने राज्य भर के जंगलों में आग लगाने के आरोप में अब तक 39 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि साल की शुरुआत से जंगलों में मानव निर्मित आग के 227 मामले दर्ज किए हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एडिशनल मुख्य वन संरक्षक और जंगल की आग के लिए राज्य के नोडल अधिकारी निशांत वर्मा ने कहा कि राज्य में जंगलों में आग की ज्यादातर घटनाएं मानव निर्मित हैं। हम जंगलों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।

बताया कि विभाग की ओर से जंगलों में आग लगाने वालों के खिलाफ अब तक 227 मामले दर्ज किए हैं, जिनमें से 31 मामलों में 39 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बताया कि जंगलों में आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों के बारे में पता लगाने के लिए एक खुफिया नेटवर्क विकसित करने का भी निर्देश दिया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में जंगल की आग को लेकर कोई दहशत की स्थिति नहीं है और केवल पांच बड़े जंगल आग की चपेट में हैं। विदित हो कि भारतीय वायु सेना के दो एमआई-17 हेलिकॉप्टरों और सेना के जवानों को उत्तराखंड के नैनीताल शहर में जंगल की आग को बुझाने के लिए सेवा में लगाया गया था।

जंगल में आग की लपटें लारियाकांता के पास एक वायु सेना स्टेशन के आसपास तक पहुंच गई थीं। भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने भीमताल झील से बांबी बाल्टी का उपयोग करके पानी एकत्र किया और इसे वायु सेना स्टेशन के पास जलते जंगलों पर डाला।

हेलिकॉप्टरों ने एक दर्जन से अधिक उड़ानें भरीं और दोपहर तक आग बुझाने में सफल रहे। पिछले साल नवंबर से राज्य में जंगल में आग लगने की 663 घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें 832 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को नुकसान पहुंचा है।

कुल क्षतिग्रस्त भूमि में से 267.825 हेक्टेयर गढ़वाल क्षेत्र में, 498.8525 हेक्टेयर कुमाऊं  क्षेत्र में और 65.52 हेक्टेयर प्रशासनिक वन्यजीव क्षेत्रों में क्षतिग्रस्त हुई। इससे सरकारी खजाने को 17 लाख रुपये से अधिक का नुकसान भी हुआ है।