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छात्रवृत्ति घोटाला: नेताओं का नंबर कब आएगा ?

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समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति घोटाले में अफसरों की धरपकड़ तो शुरू हो गई है, लेकिन जिन नेताओं की शह पर यह लूट हुई, उन पर अब तक जांच की आंच नहीं पहुंची है। वर्ष 2011 से 2017तक चले इस घोटाले में सरकार दर सरकार रहे समाज कल्याण मंत्रियों की ‘खामोशी’ पर भी सवाल उठते रहे हैं।  समाज कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति बांटने में धांधली यूं तो राज्य बनने के बाद से ही हो रही थी, लेकिन इसने संगठित लूट का स्वरूप 2011 के बाद लिया। इस दौरान कॉलेजों के खातों में बिना वेरिफिकेशन के करोड़ों की छात्रवृत्ति जमा कराई गई। इनमें से ज्यादातर कॉलेज नेताओं के सगे संबंधियों के ही रहे।  खास बात यह थी कि तब से लेकर 2017 में मामला कोर्ट में पहुंचने तक किसी भी मंत्री ने इस लूट पर अपनी तरफ से अंकुश लगाने का प्रयास नहीं किया। 2017 में मामला सामने भी आया तो नेताओं का प्रयास चहेतों अफसरों को अभयदान देने का ही रहा। इस कारण अब सवाल उठ रहा है कि लूट को अंजाम देने वाले नेताओं का नंबर कब आएगा? 

 

घोटाले में नाम आने के बाद कैसे हो गया प्रमोशन?
छात्रवृत्ति घोटाले में नाम सामने आने के बाद भी समाज कल्याण विभाग में उपनिदेशक गीताराम नौटियाल को संयुक्त निदेशक पद पर प्रमोट कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, नौटियाल उस पहली जांच समिति के सदस्य थे, जिसे तत्कालीन निदेशक ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच सौंपी थी। उस वक्त घोटाले की रकम करीब सौ करोड़ रुपये के आस-पास बताई जा रही थी। समिति ने जांच के बाद निष्कर्ष दिया कि घोटाले की शिकायत आधारहीन है। कोई घोटाला नहीं हुआ। तत्कालीन सचिव डॉ.भूपिंदर कौर औलख ने जांच समिति की रिपोर्ट खारिज कर तत्कालीन अपर सचिव डॉ.वी.षणमुगम की अध्यक्षता में नई जांच समिति गठित की। इस समिति की जांच में घोटाले की पुष्टि हुई। इस समिति की रिपोर्ट पर तत्कालीन अपर सचिव मनोज चंद्रन ने घोटाले की सीबीआई या सतर्कता जांच के साथ, घोटाले की शिकायत को निराधार बताने वाली समिति के सदस्यों के निलंबन और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई करने की सिफारिश की थी। इतना सब होने के बाद भी इस वर्ष जनवरी में गीताराम नौटियाल को प्रमोशन दे दिया गया।

 

गिरफ्तारी के साथ ही शंखधर का निलंबन तय 
एसआईटी के हाथों गिरफ्तार होने के साथ ही जनजाति कल्याण निदेशालय के उप निदेशक अनुराग शंखधर के निलंबन की उल्टी गिनती भी शुरू हो गई है। नियमानुसार सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी के 24 घंटे के भीतर ही निलंबन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इस मामले में शुक्रवार तक निदेशालय एसआईटी की औपचारिक सूचना का इंतजार कर रहा था। लेकिन शुक्रवार शाम तक एसआईटी का पत्र नहीं मिला, इसके बाद निदेशालय अब खुद अपनी तरफ से गिरफ्तारी की सूचना शासन को देगा, जहां से शंखघर का निलंबन होगा। हालांकि निदेशालय ने पिछले सप्ताह ही शंखधर की गैरहाजिरी पर उनके निलंबन की संस्तुति की थी, जिस पर तब फैसला नहीं हो पाया था, अब दोनों मामलों को जोड़कर उनका निलंबन तय है।  

 

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  • Web Title:action is still awaited against politicians in scholarship scam in uttarakhand