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दो साल में 683 जच्चा-बच्चा की हुई मौत, इस वजह से ज्यादा मौतें

मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने पद संभालते ही अपनी पहली बैठक इसी संवेदनशील मुद्दे पर ली। जिससे विभाग में हड़कंप मचा है। डीएम सोनिका ने भी स्वास्थ्य विभाग के रैवये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है।

दो साल में 683 जच्चा-बच्चा की हुई मौत, इस वजह से ज्यादा मौतें
Himanshu Kumar Lallदेहरादून। चांद मोहम्मदSat, 24 Feb 2024 05:22 PM
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मातृ-शिशु मृत्यु को लेकर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग हर महीने रिव्यू बैठक तक नहीं कर पा रहा है। ऐसे में मातृ-शिशु मृत्यु के बढ़ते आंकड़े और इन्हें कम करने को एक्शन प्लान तक नहीं बन पा रहा।

जबकि देहरादून जिले में दो साल में 108 प्रसूताओं और 575 शिशुओं की मौत हुई है। इस पर शासन-प्रशासन ने भी हैरानी जताई है। देहरादून में बीते दो साल में 683 प्रसूताओं और बच्चों की मौत हुई। सीएमओ स्तर पर हर माह रिव्यू करने की गाइडलाइन है।

ऐसे में इन दो साल में कुल 24 रिव्यू बैठक हो जानी चाहिए थी, लेकिन विभाग 17 बैठकें ही कर पाया। इस वजह से कई प्रसूताओं और नवजात की मौतों की समीक्षा तक नहीं हो पाई। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने पद संभालते ही अपनी पहली बैठक इसी संवेदनशील मुद्दे पर ली।

जिससे विभाग में हड़कंप मचा है। डीएम सोनिका ने भी स्वास्थ्य विभाग के रैवये को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है।

सोलह जगह सुविधा, 10 जगह डॉक्टर नहीं
जिले में दो साल में 37259 प्रसव हुए हैं। जिला अस्पताल, चार उप जिला अस्पताल, पांच सीएचसी, पांच पीएचसी, दून मेडिकल कॉलेज में प्रसव की सुविधा है। लेकिन दून अस्पताल, कोरोनेशन, ऋषिकेश, रायपुर, प्रेमनगर, विकासनगर के अलावा अन्य जगह पर महिला चिकित्सक नहीं हैं।

सेप्टिक शॉक-हेमरेज से सबसे ज्यादा मौतें
दो साल में सबसे ज्यादा 39 मौत सेप्टिक शॉक एकेआई विद मेटाबॉलिज्म और 34 हेमरेज, शॉक डीआईएस विद सेप्सिस से हुई। इनकी वजह अत्यधिक रक्तस्त्रत्तव, एनीमिया, शुगर और उच्च रक्तचाप आदि रहे।

एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ा, एसीएमओ बदले
रिव्यू में कमी पर मुख्य सचिव-डीएम की नाराजगी पर सीएमओ कार्यालय में एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। डीएम की नाराजगी पर सीएमओ ने दोनों कार्यक्रमों की जिम्मेदारी दूसरे एसीएमओ को दी है। उधर, डीएम द्वारा शुरू कराए गए कंट्रोल रूम में भी आशा की ड्यूटी लगा दी गई है।

मासिक बैठक में ज्यादातर मेटरनल डेथ के रिव्यू किए गए। बच्चों की मौत के रिव्यू कम हुए। दूसरे एसीएमओ को एमडीआर और सीडीआर की जिम्मेदारी दी है।
डॉ. संजय जैन, सीएमओ

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