
श्रीनगर में श्रीयंत्र टापू कांड के शहीदों को दी श्रद्धांजलि
संक्षेप: राज्य आंदोलनकारियों और सामाजिक संगठनों ने श्रीयंत्र टापू कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। 1994 में लाठीचार्ज के दौरान आंदोलनकारी यशोधर बैजवाल और राजेश रावत की हत्या के बाद उनके प्रति श्रद्धांजलि दी गई। वक्ताओं ने सरकार पर शहीदों की निशानियों को हटाने का आरोप लगाया और शहीद स्थल के रखरखाव की मांग की।
राज्य आंदोलनकारियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुडे लोगों ने श्रीयंत्र टापू कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान श्रीयंत्र टापू कांड के जननायक यशोधर बैजवाल व राजेश रावत को श्रद्धासुमन अर्पित कर याद किया गया। श्रद्धांजलि अर्पित करते वक्ताओं ने कहा कि दस नवंबर 1994 को श्रीयंत्र टापू में आंदोलन कर रहे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंदोलनकारी यशोधर बेंजवाल व राजेश रावत को अलकनंदा नदी में फेंक दिया। नदी का बहाव इतना तेज था कि वह तैरकर भी वापस नहीं आ पाए। कई दिनों बाद उनके मृत शरीर बगवान के समीप मिले। राज्य आंदोलनकारी देवेंद्र फर्स्वाण ने कहा कि उत्तराखंड सरकार शहीदों की निशानियों को हटाने का काम कर रही है।

कहा कि श्रीनगर स्थित शक्ति विहार कॉलोनी के गेट में बदलाव करते हुए प्रदेश सरकार के नुमाइंदों द्वारा शहीद की याद में बनाए गए गेट को राजनीति की भेंट चढ़ा दिया गया है। राज्य आंदोलनकारी विमला कोठियाल ने कहा कि श्रीनगर के शहीद स्थल का रख रखाव नहीं किया जा रहा है। कहा कि सभी को एकजुट होकर शहीद स्थल के रख रखाव का कार्य करना होगा। उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष पूरन सिंह कठैत ने कहा कि भाजपा-कांग्रेस के सत्ता में रहते हुए राज्य में केवल लूट खसोट की है। कहा कि शहीदों ने जिस मंसा से राज्य का निर्माण किया था वह कहीं भी नहीं दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लड़ाई को लड़़ने के लिए हम सभी को एकजुटता से कार्य करना होगा। इस दौरान शक्ति विहार को जाने वाले गेट के सम्मुख राज्य आंदोलनारियों ने प्रदर्शन भी किया। अरुण नेगी ने कहा कि शहीद के अपमान को बख्शा नहीं जाएगा। कहा कि यह अपमान पूरे उत्तराखंड का अपमान है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की। मौके पर प्रगतिशील जन मंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, यशोधर बेंजवाल की पत्नी उमा देवी, सरस्वती देवी, अर्जुन नेगी, कृष्णानंद मैठानी, प्रभाकर बाबुलकर, बीर बिक्रम सिंह आदि मौजूद थे।

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