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हैप्रेक करेगा जड़ी-बूटी संरक्षण के लिए कार्य

हैप्रेक करेगा जड़ी-बूटी संरक्षण के लिए कार्य

संक्षेप:

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विवि और उद्योगिनी संस्था ने उत्तराखंड की विलुप्तप्राय हिमालयी जड़ी-बूटियों के संरक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता पौधरोपण, वैज्ञानिक निगरानी और समुदाय सहभागिता के माध्यम से दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करेगा।

Tue, 2 Dec 2025 03:32 PMNewswrap हिन्दुस्तान, श्रीनगर
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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़़वाल विवि के उच्च शिखरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र (हैप्रेक) और उद्योगिनी संस्था ने उत्तराखंड की विलुप्तप्राय हिमालयी जड़ी-बूटियों को बचाने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। एमओयू ऊँचाई वाले क्षेत्रों से विलुप्त होती जा रही जड़ी-बूटी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार उत्तराखंड के बुग्याल विश्व में अद्वितीय जैव-विविधता वाले क्षेत्र हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन, मानव दखल और अवैज्ञानिक दोहन ने इन क्षेत्रों को गंभीर संकट में डाल दिया है। ऐसे में संकटग्रस्त औषधीय पादप के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए हैप्रेक संस्थान और उद्योगिनी संस्था मिलकर कार्य करेगी।

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एमओयू साइन के दौरान हैप्रेक के निदेशक डॉ. विजयकांत पुरोहित ने कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र अनेक औषधीय एवं सुगंधित पौधों का प्राकृतिक घर हैं, लेकिन बदलती जलवायु, बाहरी कारक और अवैध दोहन के कारण ये महत्वपूर्ण प्रजातियां अस्तित्व के खतरे का सामना कर रही हैं, जो कि चिंता का विषय है। हैप्रेक और उद्योगिनी दोनों ही आपसी सहयोग से जड़ी-बूटी और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में कार्य करेगी। उद्योगिनी के प्रोजेक्ट मैनेजर शिवम पंत ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले ये बुग्याल हाथजड़ी, अतीस, चोरा और मीठा जैसी कई औषधीय प्रजातियों से भरे रहते थे, लेकिन अवैज्ञानिक और अस्थिर दोहन ने इन्हें अत्यंत दुर्लभ बना दिया है। यह साझेदारी उस क्षति की पुनर्प्राप्ति का एक आवश्यक कदम है। कहा कि हैप्रेक संस्थान और उद्योगिनी के बीच हुए एमओयू में विलुप्तप्राय प्रजातियों का पुनर्स्थापन करना है। बताया कि यह समझौता चमोली जिले में दुर्लभ, संकटग्रस्त और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि वैज्ञानिक निगरानी एवं समुदाय सहभागिता के माध्यम से दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्थिरता सुनिश्चित करना है। बताया कि हैप्रेक संस्थान तकनीकी मार्गदर्शन और स्थानिक प्रजातियों के पौधे तैयार करेगा। बताया कि जो भी पौध हैप्रेक संस्थान द्वारा तैयार की जायेगी उन्हें वाण, घूनी, पड़ैर नंदानगर, भर्की उर्गम, पाणा दशोली, चामी (थराली) और खैनोली नारायणबागढ़ के बुग्यालों में रोपण किया जायगा। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. सुदीप चंद्र सेमवाल के नेतृत्व में वैज्ञानिक मार्गदर्शन, पौध सामग्री की आपूर्ति और प्रशिक्षण ढांचे की जिम्मेदारी संभालेगा। अभियान में उद्योगिनी के मनीष पंवार, सुनील कुमार, वीरेंद्र, राकेश बिष्ट, महावीर सिंह रावत, लक्ष्मण सिंह, दीपक मिश्रा के साथ ही हैप्रेक संस्थान के डॉ. जयदेव चौहान और कैलाश कांडपाल सहित अनेक विशेषज्ञ सक्रिय रहेंगे।