Hindi Newsउत्तराखंड न्यूज़SIR Major Challenges in uttarakhand nepali Daughters in laws Migration and Changing Demographics Election Commission
इस राज्य में विदेशी बहुओं ने चुनाव आयोग का बढ़ाया सिरदर्द, SIR की राह में कई रोड़े

इस राज्य में विदेशी बहुओं ने चुनाव आयोग का बढ़ाया सिरदर्द, SIR की राह में कई रोड़े

संक्षेप:

उत्तराखंड में निर्वाचन आयोग प्री- एसआईआर करने जा रहा है। इसमें 70% तक मतदाताओं का सत्यापन पूरा करना लक्ष्य है। प्रारंभिक चरण में बीएलओ अपने-अपने बूथों पर 40 से अधिक आयु के लगभग 30 मतदाताओं से रोज संपर्क कर रहे हैं।

Dec 08, 2025 07:06 am ISTGaurav Kala संतोष चमोली, देहरादून, हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

निर्वाचन आयोग उत्तराखंड में एसआईआर से पहले प्री-एसआईआर अभियान चलाएगा, लेकिन बड़े पैमाने पर हुआ पलायन एसआईआर के लिए बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। पहाड़ों में खाली हुए गांव हों या मैदानी क्षेत्र, जहां दस साल में मतदाताओं की संख्या में बड़ा बदलाव हुआ है। यहां वोटरों के साथ बीएलओ को भी चुनौती से जूझना पड़ेगा। एसआईआर में ऐसी शादीशुदा महिलाओं को खुद को मायके से साबित करना होगा। एसआईआर में ऐसी महिलाएं भी चुनौती होगी, जिनका मायका नेपाल है।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

अभी प्री-एसआईआर में बीएलओ अपनी पहुंच हर मतदाता तक बनाएगा। लेकिन, उत्तराखंड के खाली हो चुके गांवों में मतदाता के सत्यापन को लेकर बीएलओ को माथापच्ची करनी होगी। खासतौर पर राज्य से बाहर जा चुके लोगों से संपर्क और प्रमाण जुटाना भी चुनौती से कम नहीं होगा। उत्तराखंड से पहले जिन राज्यों में एसआईआर हो चुका होगा, अगर वहां ऐसे प्रवासियों का नाम नहीं होगा तो भी उन्हें भी अपने नाम को उत्तराखंड में यथावत रखने के लिए गांव-घर में संपर्क की चुनौती से पार पाना होगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम कहते हैं कि यूपी-दिल्ली में एसआईआर चल रहा है। उत्तराखंड से सबसे ज्यादा पलायन इन दोनों ही जगह है। ऐसे में उत्तराखंड में एसआईआर से पहले इन दोनों राज्यों की फाइनल सूची आ जाएगी।

ये भी पढ़ें:उत्तराखंड में पहले प्री-SIR, वोटरों को क्या करना होगा? चुनाव आयोग ने सब बताया

मैदानी क्षेत्र की स्थिति

एसआईआर का सबसे ज्यादा असर उन सीटों पर पड़ेगा, जहां सबसे ज्यादा वोटर बढ़े हैं या फिर सबसे ज्यादा कम हुए हैं। उत्तराखंड में सबसे ज्यादा 12 ऐसी मैदानी सीटें हैं, जहां मतदाताओं की संख्या 72 फीसदी तक बढ़ी। यहां हाल के वर्षों में बढ़े वोटरों का 2003 की लिस्ट के रिकॉर्ड के साथ मिलान किया जाएगा। इन सीटों में धर्मपुर विस क्षेत्र शीर्ष पर हैं, जहां 10 साल में सर्वाधिक

वोटर बढ़े हैं

इसके साथ ही डोईवाला, ऋषिकेश, सहसपुर, रुद्रपुर, कालाढुंगी, काशीपुर, रायपुर, किच्छा और भेल रानीपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।

पहाड़ी क्षेत्र का हाल

बढ़ती जनसंख्या और बाकी सीटों पर बढ़ते मतदाताओं के बीच उत्तराखंड में ऐसी भी विधानसभा सीटें हैं, जहां पर पलायन के कारण मतदाताओं की संख्या लगातार घट रही है। इन क्षेत्रों में सल्ट, रानीखेत, चौबट्टाखाल, लैंसडौन, पौड़ी, घनसाली, देवप्रयाग, केदारनाथ ऐसी सीटें हैं, जहां मतदाता कम हुए हैं। एसआईआर में इन सीटों पर भी नजर रहेगी। यहां के पुराने मतदाता वापस अपने घर-गांव में फिर से वोटर बनते हैं या फिर वोटर रहते हुए रोजगार के लिए बाहर गए लोग अपने नाम यथावत रख पाते हैं या नहीं, देखना होगा।

शादीशुदा महिलाओं को मायके से करना होगा साबित

एसआईआर में ऐसी शादीशुदा महिलाओं को खुद को मायके से साबित करना होगा, जिनका नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची में ससुराल में दर्ज नहीं था। अगर उनका नाम तब मायके में दर्ज था, तो वोटर लिस्ट से यह जानकारी ससुराल क्षेत्र के बीएलओ को देनी होगी। मायके भी नाम नहीं था तो अपने माता-पिता, दादा-दादी के नाम के आधार पर खुद को सत्यापित करना होगा।

विदेशी बहुएं भी चुनौती

एसआईआर में ऐसी महिलाओं भी चुनौती होगी, जिनका मायका नेपाल है। क्योंकि, यह मामला उनकी नागरिकता से जुड़ा होगा। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुरुषोत्तम का कहना है कि यह नागरिकता नहीं, बल्कि वोटर लिस्ट के सत्यापन से जुड़ा मामला है। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन का ही पालन किया जाएगा।

Gaurav Kala

लेखक के बारे में

Gaurav Kala
गौरव काला को नेशनल, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय, क्राइम और वायरल समाचार लिखना पसंद हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में 10 साल कार्य का अनुभव। लाइव हिन्दुस्तान से पहले अमर उजाला, दैनिक जागरण और ईटीवी भारत जैसे मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। इन्होंने हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की है। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।