
पश्चिम बंगाल में ‘बाबरी मस्जिद’ के ऐलान पर शंकराचार्य की चेतावनी, कहा- जो बाबर के साथ…
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के निलंबित विधायक की ओर से किए गए 'बाबरी मस्जिद' वाले ऐलान पर अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी चेतावनी दी है। उत्तराखंड स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने कहा है कि जो कोई भी बाबर के साथ खड़ा होगा तो बाबर जैसा ही सलूक उनके साथ होगा।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के निलंबित विधायक की ओर से किए गए 'बाबरी मस्जिद' वाले ऐलान पर अब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने भी चेतावनी दी है। उत्तराखंड स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य ने कहा है कि जो कोई भी बाबर के साथ खड़ा होगा तो बाबर जैसा ही सलूक उनके साथ होगा। उन्होंने कहा कि बाबर आक्रांता था यदि कोई उसके साथ जुड़कर अपनी पहचान बताता है तो उसको भी आक्रांता मानेंगे और उसी तरह का व्यवहार करेंगे। उन्होंने कहा कि मस्जिद बनाने से आपत्ति नहीं, लेकिन बाबर के नाम पर स्वीकार्य नहीं है।
पश्चिम बंगाल के विधायक हुमायूं कबीर की ओर से 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की नींव रखन के ऐलान से जुड़े सवाल के जवाब में शंकराचार्य ने दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने एक से अधिक बार कहा कि जो बाबर के साथ खड़ा होगा उसके साथ बाबर वाला ही व्यवहार होगा। शंकराचार्य ने कहा, 'बाबर हमारे लिए आक्रांता था, उसने हमारे ऊपर जुल्म ढहाए हैं, यदि कोई व्यक्ति बाबर से जुड़कर अपनी पहचान बताता है तो उसे भी आक्रांता ही समझेंगे और उसी अनुसार व्यवहार करेंगे। बाबर ने भारत में आकर जिस समय आक्रमण किया उसने जो जो किया वह हमें पीड़ा पहुंचाने वाला काम है। आज यदि कोई व्यक्ति उसी के साथ अपने को खड़ा रखता है कि हम बाबर के लोग हैं... तो बाबर के लोग हैं तो बाबर वाला ही ट्रीटमेंट करना चाहिए। बाबर के साथ जो खड़ो होगा उसे बाबर ही समझेंगे और आज जो बाबर के साथ होना चाहिए वही किया जाएगा।'
शंकराचार्य ने कहा कि मस्जिद बनाएं हमें उसमें क्या आपत्ति है, मस्जिद बनाएं और उसमें ईश्वर की आराधना अपने ढंग से करें। इसमें हमने आपत्ति नहीं की है, आगे भी करने की इच्छा नहीं रखते हैं। लेकिन बाबर आएगा, बाबर के साथ हमारा व्यवहार बाबर के अनुरूप ही होगा।
मथुरा-काशी पर विचार करें मुसलमान: शंकराचार्य
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मथुरा काशी जिनका है उनको उपलब्ध होना चाहिए। वहां पूजा अर्चना करें, विश्व कल्याण की कामना करें। विश्व में तो वह भी आते हैं जो कब्जा करके बैठे हैं। उनका भी तो कल्याण होगा। इसलिए जल्दी से जल्दी जो लोग कब्जा करके बैठे हैं, उनको जान लेना चाहिए कि एक समय था जब हमने अपनी राजनीति चमकाने के लिए...। धार्मिक कारण से मंदिर नहीं तोड़े गए, इस्लाम नहीं कहता है कि किसी के उपासना स्थल को तोड़कर अपनी अपासना स्थल बनाओ, इस्लाम में उचित नहीं माना जाता है। लेकिन यदि ऐसा किया गया तो वह धार्मिक नहीं राजनीतिक कारण से किया गया, हम तुमको मिटा देंगे, अपनी हनक बनाने के लिए। जो काम राजनीतिक वजहों से हुआ है, उसको धार्मिक लोग क्यों बनाकर रखना चाहते हैं, इसका मतलब उनके मन में अभी भी वही राजनीति बैठी हुई है। इसलिए हमारा कहना है कि मुसलमानों को बैठकर इस पर विचार करना चाहिए कि मेरे मजहब के अनुसार क्या अच्छा है, यदि वह विचार करें तो अच्छा है। यदि उनके मजहब के अनुसार यह उचित है तो बात अलग है, लेकिन जैसा कि हमने उनके मजहब के ग्रंथ में पाया कि ऐसे स्थल पर उपसना खुदा को कबूल नहीं तो क्यों कर रहे हो।

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Sudhir Jhaलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




