हादसों से सबक क्यों नहीं लेते? सरकार से नाराज हुई SC समिति, 7 मौतों का भी जिक्र
30 दिसंबर 2025 को अल्मोड़ा बस हादसे में 7 की मौत हुई थी। हादसे की जांच में कई खामियां आई थी। सुप्रीम कोर्ट समिति ने सरकार को फटकार लगाई और पूछा कि हादसों से सबक क्यों नहीं लेते?

चंद्रशेखर बुड़ाकोटी
सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति ने उत्तराखंड राज्य में किए गए इंतजामों की खामियां गिनाते हुए प्रदेश सरकार को प्रभावी सुधार करने की सलाह दी है। 30 दिसंबर 2025 को अल्मोड़ा हादसे का जिक्र भी किया। उस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी।
अल्मोड़ा बस हादसे को नजीर बनाते हुए समिति के सचिव रविकांत ने मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन को पत्र भेजकर हादसे की वजह बनी लापरवाहियों को गिनाया है। समिति ने कहा है कि यदि हादसा खराब सड़क की वजह से होता है तो संबंधित एजेंसी पर कार्रवाई की जाए। समिति ने नाराजगी जताई है कि कई बार कहे जाने के बावजूद सड़क सुरक्षा के मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है।
परिवहन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समिति ने पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत पर्वतीय क्षेत्रों में क्रैश बैरियर लगाने और उनके नियमित रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में गड्ढे भरने, चेतावनी संकेतक लगाने, तीखे मोड़ों से पहले दोनों ओर स्पीड ब्रेकर बनाने, कर्व मिरर और रंबल स्ट्रिप्स लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वाहनों की फिटनेस जांच नियमित रूप से कराई जाए।
ढाई हजार किमी स्टेट हाईवे पर क्रैश बैरियर नहीं
सड़क हादसों के लिहाज से उत्तराखंड देश के संवेदनशील राज्यों में शामिल है। हर साल राज्य में 1700 से 1800 तक सड़क हादसे होते हैं, जिनमें औसतन 1200 लोग जान गंवाते हैं। वर्तमान में राज्य में स्टेट हाईवे के केवल 5683 किलोमीटर हिस्से में ही क्रैश बैरियर लगे हैं। करीब 2598 किलोमीटर स्टेट हाईवे पर क्रैश बैरियर नहीं हैं। हालांकि लोनिवि ने अब अपने पांच वर्षीय मास्टर प्लान में क्रैश बैरियर प्राथमिकता से लगाने का लक्ष्य रखा है।
अल्मोड़ा हादसे के बाद कई खामियां मिली थीं
30 दिसंबर 2025 को द्वाराहाट से रामनगर जा रही 19 यात्रियों से भरी बस विनायक क्षेत्र के पास करीब 150 फीट गहरी खाई में गिर गई थी। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 12 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जांच में हादसे की कई गंभीर वजह सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि दुर्घटनास्थल पर घाटी की ओर क्रैश बैरियर नहीं लगे थे। वहां तीखा मोड़ होने के बावजूद चेतावनी संकेतक (रोड साइनेज) भी नहीं थे। सड़क पर करीब डेढ़ फीट गहरी ट्रेंच खुदी थी।


