
रूस और यूक्रेन की जंग ने कैसे भारत में रोक दी परिंदों की परवाज? तोड़ रहे दम
पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि रूस-यूक्रेन और इजरायल-फिलिस्तीन जंग के दौरान हवा में घुले गोला-बारूद और मिसाइलों से हवा में घुली जहरीली गैसें बेकसूर पक्षियों की जान ले रही हैं।
चार साल में चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण विश्व को एक ओर असीमित जन-धन की हानि का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, इस युद्ध ने दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डाला है। इस युद्ध के सैन्य अभियानों और मिसाइल हमलों में केवल सैनिकों और आम लोगों को ही जान नहीं गंवानी पड़ रही है बल्कि प्रवासी परिंदे भी दम तोड़ रहे हैं। पक्षी विशेषज्ञों का कहना है कि इस जंग के दौरान हवा में घुले गोला-बारूद और मिसाइलों से हवा में घुली जहरीली गैसें इन बेकसूरों की जान ले रही हैं। यही कारण है कि इस युद्ध के कारण पिछले चार साल में साइबेरिया से भारत आने वाले प्रवासी परिंदों की तादाद घटती जा रही है।
इसके साथ इन प्रवासी परिंदों के आगमन के समय में भी अंतर आ रहा है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में उत्तराखंड के आसन वेटलैंड पहुंचने वाले अधिकांश परिंदे बीते साल नवंबर के मध्य में यहां पहुंचे थे। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार रूस-यूक्रेन क्षेत्र से नौ प्रजातियों के परिंदे आसन वेटलैंड पहुंचते हैं। इनमें से साइबेरिया से आने वाले सुर्खाब पक्षी की संख्या युद्ध शुरू होने के बाद घटती जा रही है। भारत आने वाले कुछ मेहमान परिंदों की संख्या सीजन में केवल एक से पांच के बीच रह गई है। कुछ प्रजातियों के परिंदे तो पहुंच ही नहीं रहे हैं।
पूरे देश में कम आ रहे प्रवासी परिंदे
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार भारत आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या में पूरे देश में कमी देखी रही है। बीएचयू की पक्षी विशेषज्ञ चांदना हलदार के अनुसार रूस-यूक्रेन और इजराइल-फिलिस्तीन युद्ध के धमाके और प्रदूषण इन परिंदों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इससे भारत में आने वाले प्रवासी परिंदों की संख्या में भारी गिरावट आई है। इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध का अधिक सबसे अधिक प्रभाव बनारस आने वाले मेहमान परिंदों पर पड़ा है।
चकराता वन प्रभाग पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सेना का कहना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से प्रवासी परिंदों के आगमन पर असर पड़ा है। उनके आने और जाने के समय में बदलाव के साथ साइबेरिया और यूरोपीय देशों से आने वाले परिंदों की संख्या में काफी कमी दर्ज की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि युद्धग्रस्त क्षेत्र में कई परिंदे समाप्त हो गए होंगे। परिंदों की घटती संख्या चिंता का विषय है।
आंकड़े
पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, इजराइल–फिलिस्तीन युद्ध का सीधा असर भारत आने वाले प्रवासी परिंदों की आमद पर पड़ा है। युद्धग्रस्त इलाकों में हो रहे विस्फोटों से निकलने वाली जहरीली गैसों और लगातार असुरक्षित हालात के कारण कई प्रवासी पक्षी अपने पारंपरिक उड़ान मार्ग में ही दम तोड़ रहे हैं, जिससे उनकी संख्या में तेज गिरावट दर्ज की गई है। चकराता वन प्रभाग के आंकड़ों के मुताबिक ग्रे लैग गीज की संख्या 2021 में 20 से घटकर 2024 में सिर्फ 3 रह गई, बार हैडेट 55 से घटकर 2, सुर्खाब 852 से घटकर 302, गैडवाल 575 से गिरकर 80, मर्लाड 2024 में शून्य हो गया, जबकि नार्दन शेवलर 110 से घटकर 24, नार्दन पिनटेल 32 से घटकर 5, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड 500 से गिरकर 63 और कॉमन पोचार्ड 138 से घटकर मात्र 23 रह गए हैं, जो युद्ध और पर्यावरणीय असंतुलन के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है।

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