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बोले रुद्रपुर : स्वरोजगार की राह में अटकते कदम योजना का लाभ नहीं ले पा रहे युवा

बोले रुद्रपुर : स्वरोजगार की राह में अटकते कदम योजना का लाभ नहीं ले पा रहे युवा

संक्षेप:

ऊधमसिंह नगर जिले के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जिला उद्योग केंद्र ने 2025-26 में प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए, लेकिन सीमित सीटें और जानकारी की कमी के कारण कई युवा लाभ नहीं उठा पाए। योजना का प्रचार ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं हो रहा है।

Nov 11, 2025 11:42 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रुद्रपुर
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ऊधमसिंह नगर जिले के कई युवा स्वरोजगार की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन अवसर तक पहुंच नहीं बना पा रहे। जिला उद्योग केंद्र की ओर से वर्ष 2025-26 में युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो दिवसीय और 21 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए। इनमें कुल 460 लोगों ने भाग लिया, जिनमें से केवल 95 युवाओं ने प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार अपनाया। सीमित सीटें, समय पर सूचना का अभाव और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता के कारण कई अभ्यर्थी इससे जुड़ नहीं सके। युवाओं का कहना है कि योजनाओं की जानकारी अक्सर देर से मिलती है, जिससे आवेदन का मौका हाथ से निकल जाता है।

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ग्रामीण प्रतिभागियों ने बताया कि प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचना भी कठिन होता है। अधिकांश कार्यक्रम मुख्यालय या नजदीकी कस्बों तक ही सीमित रहते हैं। युवाओं की मांग है कि प्रशिक्षण का प्रचार हर गांव तक पहुंचे, ताकि अधिक लोगों को अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत जिले में रोजगार से जुड़ने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन सीमित संसाधनों और प्रशिक्षण की एकरूपता के कारण कई युवा अब भी योजना तक नहीं पहुंच पा रहे। इस योजना की शुरुआत जून 2025 में हुई थी, जो वर्ष 2030 तक चलेगी। वर्ष 2025-26 के लिए 650 युवाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 326 लक्ष्य पूरे हुए हैं, जबकि आवेदन 816 प्राप्त हुए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1804 आवेदन आए थे, जिनमें से 769 लोगों को लाभ मिला। इससे स्पष्ट है कि योजना में रुचि बढ़ी है, लेकिन इसकी पहुंच सीमित बनी हुई है। युवाओं का कहना है कि चयन प्रक्रिया लंबी है और आवेदन के बाद स्वीकृति आने में महीनों लग जाते हैं। दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया भी अक्सर अटक जाती है, जिससे आवेदन अधूरे रह जाते हैं। प्रशिक्षण भी पारंपरिक कार्यों तक सीमित है। जैसे पार्लर, हैंडीक्राफ्ट, बेकरी और मूंजा घास उत्पाद। जबकि युवाओं की मांग है कि मोबाइल रिपेयरिंग, डिजिटल सेवाएं, कंप्यूटर कौशल और ऑनलाइन व्यापार जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाए। जिला उद्योग केंद्र की ओर से इस वर्ष 29 प्रशिक्षण सत्र कराए गए। इनमें 15 दो दिवसीय कार्यक्रमों में 96 और 14 इक्कीस दिवसीय कार्यक्रमों में 365 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें से केवल लगभग 20 प्रतिशत लोग ही स्वयं का रोजगार शुरू कर सके। इस वर्ष प्रशिक्षण के लिए 16 लाख 70 हजार रुपये का बजट प्रस्तावित था, लेकिन स्वीकृति केवल 12 लाख रुपये की मिली। युवाओं को योजना का पूरा लाभ न मिलना बड़ी चिंता : मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, लेकिन अनेक युवा आज भी इसके लाभ से वंचित हैं। योजना के तहत स्वरोजगार, प्रशिक्षण व वित्तीय सहयोग की व्यवस्था की गई है, पर जानकारी के अभाव में वह पूरी तरह लाभ नहीं ले पा रहे हैं। कई युवाओं का कहना है कि आवेदन प्रक्रिया लंबी और जटिल है। जिनके पास तकनीकी ज्ञान कम है, वह ऑनलाइन आवेदन में दिक्कत महसूस करते हैं। कुछ युवाओं को बताया गया कि उनके दस्तावेज अपूर्ण हैं, जबकि उन्होंने सभी कागज जमा किए थे। योजना के तहत लाभार्थी सूची भी कई बार अपडेट नहीं होती, इससे वास्तविक जरूरतमंद पीछे रह जाते हैं। युवाओं ने कहा कि यदि प्रशासनिक स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाई जाए और स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए तो अधिक लोग इससे जुड़ सकेंगे। कुछ युवाओं ने यह सुझाव भी दिया कि नगर स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित किए जाएं जहां आवेदन संबंधी समस्याओं का समाधान हो सके। इस योजना से युवा वर्ग की उम्मीदें जुड़ी हैं, पर इसके क्रियान्वयन की गति धीमी होने से निराशा बढ़ रही है। दस्तावेज, सत्यापन प्रक्रिया में अड़चनें : योजना में आवेदन के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया कई युवाओं के लिए मुश्किल साबित हो रही है। रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित विभाग के ओर से सत्यापन में हफ्तों लग रहे हैं। कुछ युवाओं को यह सूचना भी नहीं मिल पा रही कि उनके आवेदन में त्रुटि कहां है। इस वजह से कई आवेदक बीच में ही प्रक्रिया छोड़ देते हैं। गांवों से आए युवाओं ने बताया कि इंटरनेट की कमी व तकनीकी सहायता न मिलने से वह आवेदन पूरा नहीं कर पा रहे। कई युवाओं के दस्तावेज विभागीय वेबसाइट पर अपलोड तो हो जाते हैं, पर सत्यापन रिपोर्ट लंबित रहती है। इस देरी से युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि यदि प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर हेल्प डेस्क संचालित हो और आवेदन की स्थिति की जानकारी एसएमएस या ईमेल से दी जाए तो पारदर्शिता और भरोसा दोनों बढ़ सकते हैं। युवाओं की यह मांग लंबे समय से उठ रही है कि प्रक्रिया को सरल बनाया जाए इससे योजना का उद्देश्य वास्तव में पूरा हो सके। योजना के पोर्टल में कई बार तकनीकी दिक्कतें : योजना का पोर्टल कई बार तकनीकी दिक्कतों से जूझता रहता है। आवेदन करते समय सर्वर डाउन होना, फॉर्म न खुलना या सबमिट के बाद डेटा गायब होना युवाओं के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। कुछ आवेदकों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रयास किए, पर साइट त्रुटि दिखाती रही। इससे उनका समय और मनोबल दोनों प्रभावित हुए। जिन युवाओं ने साइबर कैफे के माध्यम से आवेदन किया, उन्हें भी यह आशंका रही कि डेटा गलत अपलोड न हो जाए। तकनीकी खराबियों के कारण कई युवाओं के आवेदन अधूरे रह गए। यदि पोर्टल की देखरेख के लिए एक स्थायी टीम बनाई जाए और समय-समय पर परीक्षण किया जाए, तो ऐसे अवरोध नहीं आएंगे। युवाओं ने यह भी कहा कि उन्हें प्रशिक्षण सत्र दिए जाएं इससे वह स्वयं आवेदन कर सकें। यह तकनीकी सुधार न केवल आवेदन प्रक्रिया को सहज बनाएगा, साथ ही युवाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ाएगा। ग्रामीण युवाओं को नहीं मिल पाई योजना की जानकारी : ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कई युवाओं को योजना की पूरी जानकारी अब तक नहीं मिल पाई है। विभाग की ओर से प्रचार सामग्री सीमित क्षेत्रों तक ही पहुंची है। कई ग्राम पंचायतों में सूचना पटल पर योजना के पोस्टर या बैनर तक नहीं लगाए गए। इससे यह लाभ केवल कुछ जागरूक युवाओं तक ही सीमित रह गई। ग्रामीण युवाओं ने बताया कि यदि उन्हें प्रशिक्षण शिविर या ग्राम स्तर पर बैठकें आयोजित कर जानकारी दी जाए तो वह भी आवेदन कर सकेंगे। वर्तमान में जानकारी के अभाव में प्रतिभाशाली युवा अवसर से वंचित हैं। जिला प्रशासन के स्तर पर अभियान चलाकर यह कमी दूर की जा सकती है। इस योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने से स्थानीय उद्यमिता को बल मिलेगा। युवाओं की मांग है कि प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया, विद्यालय और पंचायत स्तर पर संयुक्त प्रयास किए जाएं। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था सीमित : मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की व्यवस्था सीमित है। शहरों में जहां कुछ कार्यशालाएं आयोजित होती हैं, वहीं कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को ऐसे अवसर नहीं मिलते। कई युवाओं का कहना है कि उन्हें रोजगार या स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन नहीं मिल रहा। कुछ संस्थानों की ओर से प्रशिक्षण तो दिया जा रहा है, पर वह केवल औपचारिक स्तर पर सीमित है। युवाओं ने यह भी कहा कि यदि सरकार प्रत्येक ब्लॉक में कौशल विकास केंद्र स्थापित करे तो वह आत्मनिर्भर बन सकते हैं। यह केंद्र न केवल तकनीकी प्रशिक्षण दें, साथ ही मार्केट से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराएं। युवाओं ने यह मांग भी रखी कि स्थानीय उद्योगों को जोड़कर इंटर्नशिप के अवसर दिए जाएं, जिससे वह अनुभव प्राप्त कर सकें। इससे योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा और युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार आएगा। सुझाव और शिकायतें 1. योजना के प्रचार-प्रसार को गांव-गांव तक पहुंचाया जाए, जिससे अधिक युवा इसकी जानकारी प्राप्त कर सकें। 1. युवाओं ने कहा कि योजना की जानकारी केवल शहरों तक सीमित रही। ग्रामीण क्षेत्र के कई अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर सके। 2. प्रशिक्षण में नए विषय जोड़े जाएं जैसे डिजिटल सेवाएं, मोबाइल रिपेयरिंग व ऑनलाइन व्यापार। इससे लाभ होगा। 2. मौजूदा प्रशिक्षण पारंपरिक कार्यों तक सीमित हैं। इसमें आधुनिक रोजगार से जुड़ी ट्रेनिंग न होने से अवसर नहीं मिल पा रहे हैं। 3. योजना में आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। ब्लॉक स्तर पर हेल्प डेस्क स्थापित हों जहां जानकारी मिल सके। 3. ऑनलाइन आवेदन में तकनीकी दिक्कतें आती हैं। साइट बार-बार बंद हो जाती है और दस्तावेज अपलोड नहीं होते। 4. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद युवाओं को आगे की दिशा देने के लिए मेंटरशिप या सलाह केंद्र बनाए जाएं। इससे वह अपने व्यवसाय की योजना बना सकेंगे। 4. प्रशिक्षण खत्म होते ही विभाग का संपर्क टूट जाता है। आगे की योजना, ऋण सहायता या व्यवसाय शुरू करने की प्रक्रिया पर कोई मार्गदर्शन नहीं मिलता। 5. योजना के बजट में वृद्धि की जाए। हर ब्लॉक में नियमित प्रशिक्षण केंद्र बने, जिससे हर पात्र युवा इसका लाभ ले सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़े। 5. इस वर्ष योजना के लिए 16 लाख 70 हजार का प्रस्ताव भेजा गया था पर स्वीकृति 12 लाख की ही मिली। बजट घटने से कई प्रशिक्षण सत्र रद्द हुए। साझा किया दर्द स्वरोजगार अब युवाओं के लिए उम्मीद का नया रास्ता बन रहा है। यदि प्रशिक्षण और मार्गदर्शन समय पर मिले तो हर युवा अपने कौशल से आत्मनिर्भर बन सकता है। ऐसे अवसर लगातार मिलने चाहिए। - काजल मौर्या रोजगार की कमी के बीच स्वरोजगार सबसे स्थायी विकल्प है। यदि लोन की प्रक्रिया सरल हो तो अधिक लोग अपने काम शुरू कर सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं। - मोहित राजपूत कई युवा प्रशिक्षण लेकर भी आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे में बाजार की जानकारी नहीं होती। यदि जिला उद्योग केंद्र की ओर से विपणन का सहयोग मिले तो फायदा दोगुना हो सकता है। इस पर ध्यान दिया जाए। - अमृता मंडल स्वरोजगार योजना से अब तक कई युवाओं को नया जीवन मिला है। फिर भी जानकारी के अभाव में बहुत से पात्र युवा पीछे रह जाते हैं। प्रचार का दायरा और बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे अधिक लोगों को लाभ मिले। - मयंक टम्टा प्रशिक्षण में सीखी गई बातें तभी उपयोगी बनती हैं, जब उसके बाद पूंजी का इंतजाम हो। बैंक और विभाग मिलकर युवाओं की आर्थिक मदद करें तो नए व्यवसाय खड़े हो सकते हैं। - विशाल राजपूत अब युवा नौकरी की जगह खुद का काम शुरू करना चाहते हैं। जिला स्तर पर स्वरोजगार मेलों का आयोजन हो तो युवाओं को एक ही स्थान पर सभी जानकारी मिल सकती है। इससे अधिक युवा लाभान्वित होंगे। - सोनाली कुछ योजनाओं में प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि युवा आवेदन करने से पहले ही हतोत्साहित हो जाते हैं। आवेदन की प्रणाली आसान बने तो ज्यादा लोग लाभ ले सकेंगे। इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। - चंद्रेश तिवारी स्वरोजगार से गांवों में भी आय के स्रोत बढ़ सकते हैं। यदि हर ब्लॉक में प्रशिक्षण केंद्र खुलें तो ग्रामीण युवाओं को शहर जाने की जरूरत नहीं रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में समय-समय पर प्रशिक्षण आयोजित किए जाने चाहिए। - अभय यादव स्वरोजगार सिर्फ व्यवसाय नहीं, आत्मसम्मान भी देता है। यदि महिलाएं भी इसमें अधिक जुड़ें तो परिवार की आय बढ़ेगी और सामाजिक स्थिति मजबूत होगी। महिलाओं को इससे जोड़ा जाए। - अनमोल त्रिपाठी विभाग की ओर से प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीक की जानकारी भी दी जानी चाहिए। इससे युवा नए उत्पाद और सेवाएं बाजार की मांग के अनुसार तैयार कर सकेंगे। रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। - सचिन वर्मा कुछ योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं, जिससे युवाओं का विश्वास कम होता है। यदि प्रशिक्षण व ऋण वितरण तय समय पर हो तो भरोसा बढ़ेगा। इससे लोग जल्द स्वरोजगार शुरू कर सकेंगे। - मंथन युवाओं को अपने व्यवसाय के लिए बाजार से जोड़ना भी जरूरी है। यदि उत्पाद बेचने के लिए प्लेटफॉर्म उपलब्ध हों तो उनकी आय में बड़ा सुधार होगा। युवाओं को आधुनिक रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जाएं। - पल्लव शील स्वरोजगार योजना ने नई दिशा दी है, पर जरूरत यह है कि सभी तक समान अवसर पहुंचे। हर युवा को अपनी योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण और सहायता मिलनी चाहिए। - अशोक बोलीं जिला उद्योग केंद्र मैनेजर कई बार लोगों के आवेदन इस लिए लंबीत हो जाते हैं क्योंकि वह स्थायी निवासी नहीं होते हैं इसके अलावा दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण भी समस्या लोगों को देखने को मिलती है इसे अलावा अगर किसी भी तरह की समस्या युवाओं को रही है तो ऐसे में समस्या की जांच कर समाधान किया जाएगा। - योगिता जोशी, मैनेजर, जिला उद्योग केंद्र