वर्ग चार की भूमि के विनियमितीकरण पर सरकार संवेदनशील: धामी

Nov 07, 2025 11:19 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रुद्रपुर
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- शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बोले, किसानों के हित में लेंगे निर्णय

वर्ग चार की भूमि के विनियमितीकरण पर सरकार संवेदनशील: धामी

पंतनगर, वरिष्ठ संवाददाता। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि वर्ग चार और अन्य श्रेणियों की भूमि के विनियमितीकरण के मामलों का सरकार पूरी संवेदनशीलता से परीक्षण करा रही है। जल्द सरलता और सरलीकरण के मंत्र के तहत किसानों के हित में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों के किसानों के लिए अलग-अलग चुनौतियां और समस्याएं हैं। किसानों का परिश्रम और त्याग ही हमारी पूंजी है और पसीना हमारी ताकत है। शुक्रवार को उत्तराखंड राज्य निर्माण की रजत जयंती उत्सव के अवसर पर पंतनगर कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि में आयोजित कृषक सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं।

उन्होंने किसानों को उत्तराखंड राज्य स्थापना के रजत जयंती की बधाई दी। उत्तराखंड निर्माण के सपने को साकार करने में अपना योगदान देने वाले और बीते 25 वर्षों में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने में अपना अतुलनीय योगदान देने वाले किसानों को नमन किया। कहा कि यह सम्मेलन किसान भाइयों और उनके परिवारों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि देश के संतुलित विकास के लिए किसानों का सशक्त होना जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विकसित भारत के निर्माण का सपना भी तभी साकार होगा जब किसान का विकास हो। हमारे शास्त्रों में भी लिखा है कि कृषि संपत्ति और मेधा प्रदान करती है और कृषि ही मानव जीवन का आधार है। हमारे करोड़ों किसान इसी विचार को आधार मानकर मानवता की सेवा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सभी प्रमुख फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि कर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य प्रदान किया जा रहा है। प्रदेश में किसानों को तीन लाख रुपये तक का ऋण बिना ब्याज के उपलब्ध करा रहे हैं। उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट किया स्वीकृत मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए 115 करोड़ रुपये से करीब 350 पॉलीहाउस बनाए हैं। गेहूं खरीद पर 20 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दे रहे हैं। गन्ने के रेट में भी 20 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की है। पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा आधारित खेती के लिए 1,000 करोड़ रुपये की लागत से उत्तराखंड क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव रेन-फेड फार्मिंग प्रोजेक्ट भी स्वीकृत किया है। प्रदेश में 50 से अधिक मशरूम इकाइयां, 30 से अधिक मौनपालन इकाइयां, 30 कोल्ड चौन इकाइयां, 18 कोल्ड स्टोरेज, 5 सीए. स्टोरेज, 128 बड़ी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, 1030 सूक्ष्म खाद्य उद्यम और 2 मेगा फूड पार्क स्थापित हैं। फलों की उत्पादकता पहले 1.82 मैट्रिक टन प्रति हेक्टेयर थी, अब 4.52 मैट्रिक टन हो गई है। मशरूम उत्पादन में आज उत्तराखंड देश में 5वें स्थान पर है। शहद उत्पादन में भी राज्य देश में 8वें स्थान पर पहुंचा है। 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध खेती विकसित की गई मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि बागवानी के समग्र विकास के लिए जापान सहयोगित उत्तराखंड एकीकृत औद्यानिक विकास परियोजना के तहत 526 करोड़ रुपये की बाह्य सहायतित परियोजना टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जनपदों में लागू की जा रही है। उन्होंने कहा कि सुगंध पौधा केन्द्र द्वारा लैमनग्रास, मिन्ट, गुलाब, तेजपात, कैमोमिल जैसी फसलों को प्रोत्साहन देकर 9,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सगंध खेती विकसित की गई है, जिससे 28,000 से अधिक कृषक 109 एरोमा क्लस्टरों के माध्यम से जुड़ चुके हैं। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय केवल 196 हेक्टेयर में चाय की खेती होती थी, आज यह 1,585 हेक्टेयर है। प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख किलोग्राम प्रसंस्कृत चाय तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि टी-टूरिज्म को बढ़ावा देते हुए चम्पावत के सिलिंगटॉग, नैनीताल के श्यामखेत व घोड़ाखाल, तथा बागेश्वर के कौसानी में चाय बागानों को पर्यटन से जोड़ा गया है। ----

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