बैठकी होली में गूंजे शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गीत
रविवार को पूर्व सभासद कैलाश कांडपाल के निवास पर पारंपरिक बैठकी होली का आयोजन किया गया। इस अवसर पर होल्यार कलाकारों ने शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई और डॉ. हरिदत्त कांडपाल की स्मृति में यह आयोजन किया गया।
किच्छा, संवाददाता। रविवार देर शाम पूर्व सभासद कैलाश कांडपाल के निवास पर पारंपरिक बैठकी होली का आयोजन किया गया। होल्यार कलाकारों ने शास्त्रीय रागों पर आधारित होली गीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। डॉ. हरिदत्त कांडपाल की स्मृति में उनके निवास पर प्रतिवर्ष बैठकी होली आयोजित की जाती है। कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और राधा-कृष्ण को अबीर-गुलाल अर्पित कर किया गया। इसके बाद गिरीश जोशी ने राग काफी में ‘गाओ सुहागिन होरी’, नंदा बल्लभ पाठक ने राग काफी में ‘सबको मुबारक होरी’, चक्रवर्ती जोशी ने राग सहाना में ‘कलंक लगे सो लगे, मोरी आली पिया के गरवा लगूंगी’ प्रस्तुत किया। रमेश लोहनी ने राग खमाज में ‘चतुर खिलाड़ी जाने नहीं पाओगे’, हरीश पंत ने राग सहाना में ‘अपने वीरन मोहे देरी ननदिया’, कैलाश उपाध्याय ने ‘चलती होली ऐसे चटक रंग डारो’ सुनाया।
हरीश जोशी एवं बाल कलाकारों ने राग झिझोटी में ‘आओ जी गोपाल करूं श्रृंगार तोरा’, ललित मोहन पंत ने राग देश में ‘आवन देखे चतुर खिलाड़ी’ और सुरेश जोशी ने राग भैरवी में ‘बाजूबंद खुल-खुल जाए’ की प्रस्तुति दी। इस मौके पर मनोज पांडेय, सुरेश जोशी, चंपा कांडपाल, भगवती कांडपाल, मीनाक्षी शर्मा, तनुज कांडपाल, तुषार कांडपाल अरुण शर्मा, महेश शर्मा, अशोक चड्डा, गोपेश पंत आदि रहे।
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