सरकारी जांच से वंचित रखने का आरोप, आशा कार्यकर्ता को नोटिस
रुद्रपुर में सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिला लिपिका ने स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। आशा कार्यकर्ता ने सरकारी स्वास्थ्य जांच नहीं कराई और निजी लैब्स का सुझाव दिया। स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई शुरू की है और संबंधित कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

रुद्रपुर, संवाददाता। सुरक्षित मातृत्व योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शिमला पिस्तौर निवासी गर्भवती महिला लिपिका ने क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता पर लापरवाही और निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। संबंधित आशा कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। महिला का कहना है कि गर्भावस्था के पांच माह बीत जाने के बावजूद उसकी कोई भी सरकारी स्वास्थ्य जांच नहीं कराई गई। इस दौरान आशा कार्यकर्ता ने न तो उसकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और न ही किसी प्रकार का फॉलोअप किया।
आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बजाय उसे लगातार निजी लैब और निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों में जांच कराने की सलाह दी जाती रही। गर्भवती महिला के अनुसार, सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए निशुल्क जांच, परामर्श और नियमित निगरानी की व्यवस्था उपलब्ध है, लेकिन उसे इन सुविधाओं से वंचित रखा गया। मामले की शिकायत सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित आशा कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नोटिस के जवाब में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिलने पर निलंबन सहित विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सीएमओ ने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं को सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित करना और निजी संस्थानों में जांच कराने के लिए दबाव बनाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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