बोले रुद्रपुर : महिला मजदूरों ने अपने अधिकारों को लेकर उठाई आवाज
रुद्रपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला मजदूरों ने अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने समान कार्य के लिए समान वेतन और न्यूनतम वेतन की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि श्रम कानूनों में बदलाव और कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण की आवश्यकता है। महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की मांग की गई।
रुद्रपुर में रविवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर गांधी पार्क में प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, प्रगतिशील भोजन माता संगठन व इंकलाबी मजदूर केन्द्र की ओर से संयुक्त सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम में महिला मजदूरों ने अपने अधिकारों व समस्याओं को लेकर आवाज उठाई और सरकार से समाधान की मांग रखी। वक्ताओं ने कहा कि कई क्षेत्रों में महिला मजदूरों को पुरुष मजदूरों की तुलना में कम वेतन दिया जाता है। इससे महिला मजदूरों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है। साथ ही बड़ी संख्या में काम करने वाली आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है और उन्हें केवल मानदेय दिया जा रहा है।
उन्होंने इसे सुधारने की मांग उठाई। कहा कि 8 मार्च 1908 में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में हजारों महिला मजदूरों ने काम के घंटे कम करने, वेतन बढ़ाने व मतदान का अधिकार देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उसी ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति में हर वर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। सभा में महंगाई व रोजगार से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया गया।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला मजदूरों की कार्य परिस्थितियों व श्रमिक अधिकारों से जुड़ी समस्याओं को प्रमुख रूप से उठाया गया व उनके समाधान की मांग रखी गई। वक्ताओं ने कहा कि श्रम क्षेत्र में अस्थायी रोजगार व ठेका प्रथा बढ़ने से महिला मजदूरों के सामने रोजगार की स्थिरता का प्रश्न गंभीर रूप से सामने आया है। कई स्थानों पर महिलाएं लंबे समय तक काम करने के बाद भी स्थायी रोजगार से वंचित रहती हैं। मांग रखी गई कि महिला मजदूरों के लिए रोजगार की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिया जाए। वक्ताओं ने कहा कि कई कार्यस्थलों पर काम के घंटे अधिक होने की समस्या भी सामने आती है। लंबे समय तक काम करने से महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है। कामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल के साथ घर की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। इससे उनका श्रम और बढ़ जाता है। मांग की कि कार्य समय की व्यवस्था संतुलित बनाई जाए और श्रमिकों के स्वास्थ्य व पारिवारिक जीवन को ध्यान में रखते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। सभा में महिला मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। कहा गया कि घर से कार्यस्थल तक आने-जाने के दौरान कई महिलाओं को असुरक्षा का अनुभव होता है। कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए। साथ ही महंगाई के कारण मजदूर परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहे प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। कहा गया कि सीमित आय व बढ़ते खर्च के कारण महिला मजदूरों के सामने परिवार का भरण पोषण करना कठिन हो जाता है। मांग रखी गई कि मजदूर वर्ग के लिए आय के अवसर बढ़ाए जाएं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को मजबूत किया जाए। महिला मजदूरों को पुरुषों के बराबर वेतन देने की मांग : सभा में महिला मजदूरों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि देश के कई क्षेत्रों में महिला मजदूर पुरुषों के साथ समान कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें कम वेतन मिलता है। यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। इससे महिला मजदूरों की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती है। कहा कि खेतों से लेकर कारखानों, दुकानों, होटलों व अन्य कार्यस्थलों तक बड़ी संख्या में महिलाएं श्रम कर रही हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर महिलाओं को पुरुष मजदूरों की तुलना में कम भुगतान किया जाता है। इससे उनके परिवार के भरण पोषण और बच्चों की शिक्षा स्वास्थ्य जैसी जरूरतों पर सीधा असर पड़ता है। सभा में कहा गया कि समान वेतन का अधिकार श्रमिकों के सम्मान व सामाजिक न्याय से जुड़ा विषय है। जब महिला मजदूर पुरुष मजदूरों के साथ समान श्रम करती हैं तो उनके वेतन में अंतर उचित नहीं माना जा सकता है। मांग उठाई कि सरकार व संबंधित विभाग इस दिशा में ठोस कदम उठाएं। सभी कार्यस्थलों पर समान वेतन का नियम प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। साथ ही निरीक्षण व्यवस्था को मजबूत किया जाए। आंगनबाड़ी, आशाओं और भोजन माताओं को न्यूनतम वेतन दिया जाए : वक्ताओं ने कहा कि आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताएं और भोजन माताएं समाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाती हैं। वे बच्चों के पोषण स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं। इसके बावजूद उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं मिल रहा है। वक्ताओं ने कहा कि इन महिलाओं को मानदेय के रूप में सीमित राशि दी जाती है, जो उनके कार्य के अनुरूप नहीं मानी जाती है। कई बार यह राशि परिवार के खर्चों के लिए भी पर्याप्त नहीं होती है। कहा गया कि आंगनबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में भोजन व्यवस्था से जुड़े कार्यों में लगी महिलाएं नियमित रूप से जिम्मेदारी निभाती हैं। वह बच्चों के पोषण कार्यक्रमों को सफल बनाने में योगदान देती हैं। आशा कार्यकर्ताएं स्वास्थ्य सेवाओं को गांव व शहर के मोहल्लों तक पहुंचाने में सहयोग करती हैं। इसके बावजूद उनकी आय सीमित बनी हुई है। मांग रखी कि इन सभी स्कीम वर्करों को न्यूनतम वेतन का लाभ दिया जाए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में उन्हें शामिल किया जाए। श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर चिंता जताई : सभा में श्रम कानूनों में हुए बदलाव को लेकर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि श्रम कानूनों को नए स्वरूप में लागू किया गया है। इस बदलाव को लेकर मजदूर वर्ग के बीच कई प्रकार की चिंताएं सामने आई हैं। वक्ताओं ने कहा कि मजदूरों के लिए काम के घंटे, रोजगार की स्थिरता व सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे लंबे समय से संघर्ष का विषय रहे हैं। मजदूर संगठनों का कहना है कि इन अधिकारों को सुरक्षित रखना जरूरी है। सभा में कहा गया कि श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने के लिए कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन होना चाहिए। सभा में वक्ताओं ने कहा कि श्रम क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों को सुरक्षित कार्य वातावरण व उचित कार्य समय मिलना जरूरी है। इसके साथ ही मजदूरों को संगठित होने व अपनी समस्याओं को रखने का अवसर भी मिलना चाहिए। यह अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वक्ताओं ने कहा कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा से ही उद्योग व समाज दोनों का संतुलित विकास संभव है। मजदूरों की स्थिति मजबूत होने से उत्पादन व्यवस्था भी स्थिर रहती है। सभा में मांग उठाई गई कि श्रम कानूनों से जुड़े प्रावधानों की समीक्षा की जाए और मजदूरों की समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय लिए जाएं। 'कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण हो' : सभा में कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा व सम्मानजनक व्यवहार का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि बड़ी संख्या में महिलाएं आज विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। ऐसे में कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण उपलब्ध होना जरूरी है। कई स्थानों पर महिलाओं को कार्य के दौरान मानसिक दबाव व अनुचित व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इससे उनके आत्मसम्मान पर प्रभाव पड़ता है और कार्य करने की स्थिति भी प्रभावित होती है। कहा गया कि कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। साफ व सुरक्षित शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था और विश्राम के लिए उपयुक्त स्थान जैसी सुविधाएं कार्यस्थलों का सामान्य हिस्सा होना चाहिए। इससे महिलाओं के स्वास्थ्य व कार्य क्षमता दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। वक्ताओं ने कहा कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान का माहौल बनाना सभी की जिम्मेदारी है। कार्यस्थलों पर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि महिलाओं को किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या अनुचित व्यवहार का सामना न करना पड़े। मांग रखी गई कि कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी तंत्र मजबूत किया जाए। शिकायतों के समाधान की स्पष्ट व्यवस्था हो और महिलाओं को न्याय मिलने की प्रक्रिया सरल बनाई जाए।'कामकाजी महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा मजबूत की जाए' : वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई और बेरोजगारी का असर कामकाजी महिलाओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। कई परिवारों में महिलाएं भी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन चुकी हैं। ऐसे में उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक माना गया। वक्ताओं ने कहा कि घरेलू जिम्मेदारियों के साथ रोजगार की जिम्मेदारी निभाना महिलाओं के लिए आसान नहीं होता है। वह परिवार के भरण पोषण में योगदान देती हैं और बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को पूरा करने में भी भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके रोजगार को स्थिर व सुरक्षित बनाना जरूरी है। कहा गया कि रोजगार के अवसर बढ़ाने से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। आर्थिक रूप से मजबूत महिलाएं परिवार व समाज दोनों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण व रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। इससे वह विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही छोटे व्यवसाय व स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को भी मजबूत किया जाना चाहिए। मांग की कि सरकार रोजगार व सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करे। इससे कामकाजी महिलाओं को आर्थिक स्थिरता मिलेगी और उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।शिकायतें 1- कई कार्यस्थलों पर महिला मजदूरों को पुरुष मजदूरों की तुलना में कम वेतन मिलता है। समान कार्य करने के बाद भी भुगतान में अंतर बना रहता है। इससे महिला मजदूरों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।2- यह शिकायत सामने आई कि आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं को केवल मानदेय दिया जा रहा है। यह राशि उनके कार्य के अनुरूप नहीं मानी जाती है। इससे परिवार का भरण पोषण करना कठिन होता है।3- कई कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की कमी है। सुरक्षित वातावरण की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इससे महिलाओं को काम के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है।4- अस्थायी रोजगार व सीमित आय के कारण कई कामकाजी महिलाओं को आर्थिक असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। रोजगार की स्थिरता नहीं होने से परिवार की जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता है।5- सभा में यह भी कहा गया कि बड़ी संख्या में महिला मजदूरों को अपने श्रम अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होती है। जानकारी के अभाव में कई बार वह अपनी समस्याएं उचित मंच तक नहीं पहुंचा पाती हैं।सुझाव 1- महिला मजदूरों को समान कार्य के लिए समान वेतन देने की व्यवस्था सभी क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू की जाए। श्रम विभाग नियमित निरीक्षण करे और शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई करे। 2- आंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताओं और भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन देने की नीति लागू की जाए। इनके कार्य को नियमित श्रम के रूप में मान्यता दी जाए और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी दिया जाए।3- कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जाए। साफ शौचालय, पीने के पानी और विश्राम की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत की जाए। 4- महिला मजदूरों के लिए रोजगार की स्थिरता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएं। कौशल प्रशिक्षण व स्वरोजगार योजनाओं को बढ़ावा दिया जाए, जिससे महिलाओं को स्थायी आय के अवसर मिल सकें।5- महिला मजदूरों से जुड़े श्रम अधिकारों के बारे में जागरूकता अभियान चलाए जाएं। मजदूर संगठनों व प्रशासन के सहयोग से शिविर आयोजित किए जाएं। इससे महिलाएं अपने अधिकारों की जानकारी प्राप्त कर सकें।साझा किया दर्दमहिला मजदूर समाज और अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण शक्ति हैं। समान कार्य करने के बाद भी कई स्थानों पर उन्हें कम वेतन मिलता है। समान वेतन की व्यवस्था लागू होना जरूरी है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।- खुशी, छात्र संगठनआंगनबाड़ी, आशा कार्यकर्ताएं और भोजन माताएं समाज के लिए महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य व शिक्षा से जुड़े कार्यों में उनकी भूमिका अहम है। इनके लिए न्यूनतम वेतन की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।- वंदना रावत, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र महिला मजदूरों को सुरक्षित व सम्मानजनक कार्यस्थल मिलना जरूरी है। कार्यस्थलों पर साफ शौचालय, पीने के पानी एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था होनी चाहिए। इससे महिलाओं को काम करने में सुविधा मिलेगी।- रविन्दर कौर, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है। यह दिन महिलाओं के अधिकार व सम्मान की चर्चा करने का अवसर है। समाज के सभी वर्गों को मिलकर महिलाओं के प्रति समानता व सम्मान का वातावरण मजबूत करना चाहिए।- पिंकी, महामंत्री, डॉल्फिन संगठनमहिलाएं आज शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग व सेवा क्षेत्र सहित कई क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उनकी मेहनत समाज के विकास में योगदान देती है। महिलाओं को समान अवसर व उचित वेतन मिलना सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।- मोनी देवी, भोजनमातामहंगाई बढ़ने से मजदूर परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है। महिला मजदूर भी इस स्थिति से प्रभावित होती हैं। उनके रोजगार को स्थिर बनाना और आय के अवसर बढ़ाना जरूरी है। इससे परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकेगी।- सुमित्रा, भोजनमाताकामकाजी महिलाओं को कार्यस्थल के साथ घर की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। यह स्थिति उनके श्रम को और बढ़ा देती है। समाज में महिलाओं के श्रम का सम्मान होना चाहिए और उनके लिए सहयोग का माहौल बनना चाहिए।- धनवती, भोजनमातामहिला मजदूरों के अधिकारों की जानकारी सभी तक पहुंचना जरूरी है। जागरूकता बढ़ने से महिलाएं अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकती हैं और समस्याओं को उचित मंच पर रख सकती हैं। इससे न्याय पाने का मार्ग मजबूत होता है।- शकुंतला, भोजनमातासमाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से विकास की गति तेज होती है। शिक्षा, रोजगार व सामाजिक जीवन में महिलाओं को बराबर अवसर मिलना चाहिए। समानता का वातावरण समाज को अधिक मजबूत बनाता है।- राजवती, भोजनमातामहिला मजदूरों की मेहनत से अनेक क्षेत्र आगे बढ़ते हैं। खेत, कारखाने व सेवा क्षेत्र में उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उनके श्रम का उचित मूल्यांकन होना चाहिए और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए।- कमलेश यादव, भोजनमातामहिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं के संघर्ष व उपलब्धियों को याद करना है। यह दिन समाज को यह संदेश देता है कि महिलाओं को सम्मान और समान अवसर देना आवश्यक है। इससे समाज संतुलित व न्यायपूर्ण बन सके।- नसरीन, महिला मजदूरकामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण समाज की जिम्मेदारी है। सार्वजनिक स्थानों व कार्यस्थलों पर सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। इससे महिलाएं आत्मविश्वास के साथ अपने कार्य कर सकती हैं।- मसीदी, महिला मजदूरमहिलाओं की शिक्षा व रोजगार के अवसर बढ़ाने से समाज का विकास मजबूत होता है। शिक्षित व आत्मनिर्भर महिलाएं परिवार व समाज दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।- एहसान नवी, महिला मजदूरमहिला मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं। समाज व प्रशासन के सहयोग से ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए, जिसमें महिलाओं को सम्मान सुरक्षा व समान अवसर मिल सकें।- दिनेश, शहर को-सचिव इंकलाबी मजदूर केन्द्र
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