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राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन दी जाए

राज्य आंदोलनकारियों को बीस हजार रूपए पेंशन दी जाए

संक्षेप:

खटीमा के वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भगवान जोशी ने उक्रांद के अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती के बयान का स्वागत किया है, जिसमें उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों और किसानों की मांगों का समर्थन किया। जोशी ने भाजपा और कांग्रेस की आलोचना की, जिनका ध्यान केवल अपने विधायकों की पेंशन बढ़ाने पर है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलनकारी चुनावों में चुनौती देंगे।

Jan 14, 2026 11:30 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, रुद्रपुर
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खटीमा। तराई किसान भूमि सुधार संघर्ष समिति के केंद्रीय महासचिव एवं वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी भगवान जोशी ने बुधवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती के उस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने खटीमा शहीद स्थली आगमन पर राज्य आंदोलनकारियो, पूर्व सैनिकों तथा किसानों की लंबित मांगों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा तथा उनकी न्यायोचित मांगों का समर्थन किया। चिन्हित वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी एवं किसान संगठन के महासचिव भगवान जोशी ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा और कांग्रेस की इस बात पर निंदा की कि उपरोक्त दोनों पार्टियां एक राय होकर पूर्व विधायकों तथा वर्तमान विधायकों की पेंशन और वेतन में अंधाधुंध पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी कर अपने निजी हित साधने में लगी हुई हैं।

वहीं, 15 हजार चिन्हित राज्य आंदोलनकारी परिवारों को पेंशन के नाम पर केवल सरकार द्वारा झुनझुना पकड़ाया गया है, जो कि राष्ट्रीय पार्टियों के स्वार्थी चरित्र को उजागर करता है। जोशी ने दोनों राष्ट्रीय पार्टियों की घोर निंदा करते हुए चेतावनी दी है कि अगर लोकतंत्र सेनानी की तर्ज पर चिन्हित आंदोलनकारियों को पेंशन 20 हजार रुपये स्वीकृत नहीं की गई, तो 2027 में समूचे उत्तराखंड के चिन्हित आंदोलनकारी, आवश्यकता पड़ने पर अपने हितों की रक्षा के लिए क्षेत्रीय ताकतों से हाथ मिलाकर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों का चुनावी खेल बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जोशी ने चिह्नीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण हेतु सरकार से मांग की है कि अविलंब शासनादेश जारी कर चिह्निकरण की प्रकिया पुनः प्रारंभ की जाए तथा किसान संगठन के महासचिव भगवान जोशी ने खटीमा में लंबित थारू-गैर थारू भूमि विवाद के समाधान हेतु सरकार से मांग की हैं कि बरसो से लंबित भूमि विवाद के समाधान हेतु सरकार द्वारा एक उच्चस्तरीय सक्षम कमेटी गठित किया जाए जिससे खटीमा क्षेत्र के हजारों गैर-थारू कृषक को थारू गैर-थारू भूमि विवाद से मुक्ति प्रदान की जा सके। अगर समय रहते उपरोक्त सभी समस्याओं का समाधान 2027 चुनाव से पूर्व नहीं किया गया तब क्षेत्र के किसान ,पूर्व सैनिक तथा राज्य आंदोलनकारी संगठित होकर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को 2027 में सीधे चुनौती देने को मजबूर होंगे।

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