खामलैंड के भूमिहीन परिवारों से पंजीकरण कराने की अपील
शांतिपुरी के खामलैंड में 1200 भूमिहीन परिवारों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग जोर पकड़ रही है। उत्तराखंड अनुसूचित जाति, जनजाति एवं निर्बल वर्ग समाज कल्याण समिति ने क्षेत्रवासियों से संगठित होकर पंजीकरण कराने की अपील की है। समिति ने राज्य सरकार और प्रधानमंत्री कार्यालय से कई बार मांग उठाई है।

शांतिपुरी, संवाददाता। शांतिपुरी के उत्तरी क्षेत्र स्थित खामलैंड में बसे करीब 1200 भूमिहीन परिवारों को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। उत्तराखंड अनुसूचित जाति, जनजाति एवं निर्बल वर्ग समाज कल्याण समिति ने इस संबंध में क्षेत्रवासियों से संगठित होकर समिति में पंजीकरण कराने की अपील की है। रविवार को आयोजित संयुक्त प्रेसवार्ता में समिति के अध्यक्ष शेरराम नेता और सचिव जगत सिंह पाल ने बताया कि हल्दूधार, शांतिनगर, गांधीनगर, टूटी पुलिया, शीशम भुजिया और प्लॉट नंबर-6 तक के खामलैंड क्षेत्र में निवास कर रहे भूमिहीन परिवारों को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए समिति लंबे समय से संघर्ष कर रही है।
उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों के पंजीकरण से उनकी मांग को शासन-प्रशासन के समक्ष और अधिक मजबूती से रखा जा सकेगा। समिति पदाधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1952 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत के कार्यकाल में इस क्षेत्र को आरक्षित वन क्षेत्र से विमुक्त कर खामलैंड घोषित किया गया था। इसके बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 1958-59 में 422 परिवारों को भूमि आवंटित की गई, लेकिन कई पात्र परिवार व्यक्तिगत पट्टे प्राप्त करने से वंचित रह गए। उन्होंने बताया कि तब से आज तक क्षेत्र के अनेक परिवार खामलैंड को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में राज्य सरकार से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक कई बार मांग उठाई जा चुकी है। समिति ने अब इस लड़ाई को अंतिम चरण तक पहुंचाने के लिए अपने प्रयास तेज करने का निर्णय लिया है।
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