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रिवर ट्रेनिंग पर टिके हैं सितारगंज में बाढ़ सुरक्षा कार्य

बाढ़ रोकने के लिए स्थायी इंतजाम करने में असफल सिंचाई विभाग को अब नदियों को डिसिल्टिंग कर बाढ़ रोकने का प्रयास शुरू किया है। क्षेत्र की 92 करोड़ की बाढ़ सुरक्षा योजनाएं केन्द्र और प्रदेश में वित्तीय स्वीकृति के लिए लटकी हैं। सरकार ने रिवर ट्रेनिंग के सहारे नदियों को चैनलाइज कर गहरा करने की बनाई है। बैगुल नदी में बैगुल पुल से 500 मीटर दूरी पर डिसिल्टिंग का कार्य भी अब तक शुरू नहीं हुआ है। सिंचाई विभाग के ईई संजय राज के अनुसार वन विभाग एनओसी नहीं दे रहा है। सरकार ने मिट्टी की रायल्टी भी काफी अधिक की है। इससे बैगुल पुल के आसपास मिट्टी रायल्टी देकर हटायी नहीं जा सकी है। इससे सिंचाई विभाग जो भी मिट्टी हटाकर किनारे कर रहा है। तेज पानी आने पर फिर नदी में समाने की उम्मीद है। ईई संजय राय ने बताया कि नदियों ने बोल्डर नहीं मिलने से स्थायी बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं हो रहे हैं। नदियों से सिल्ट हटाकर नदियों को गहरा कर चैनलाइज के प्रयास हो रहे हैं। इससे काफी हद तक बाढ़ को रोका जा सकेगा। इधर कैलाश से खेतों व गांवों की ओर हो रहे कटाव को रोकने के लिए कहीं कोई कार्य धरातल में होते नहीं दिख रहे हैं।बैगुल नदी में 18 लोगों को सौंपा है सितारगंज। सितारगंज और शक्तिफार्म को बाढ़ से बचाने के लिए इस बार प्रशासन ने कैलाश व बैगुल नदी में 18 लोगों को डिसिल्टिंग का काम सौंपा है। इसमें 14 काम शुरू कर रहे हैं। कैलाश नदी के उकरौली क्षेत्र में 9 पट्टे हैं। दो दिन पूर्व यहां रात में भी खनन होने की शिकायत पर एसडीएम विनोद कुमार ने छापेमारी कर 6 वाहनों को सीज कर दिया था। प्रशासन ने अवैध खनन रोकने के लिए 24 घंटे पुलिस व राजस्व कर्मियों की तैनाती की गई है। यहां कांटे लगाये गये हैं। वीडियो रिकार्डिंग करने के आदेश दिये गये हैं। एसडीएम विनोद कुमार ने बताया कि बैगुल पुल में दो लोगों को अनुमति दी थी लेकिन दोनों ने रायल्टी अधिक बताकर उठान नहीं किया। एसडीएम ने बताया कि 300 मीटर की सीमा में संयुक्त रुप से पिलर लगाये गये है। सीमा क्षेत्र से बाहर खनन होने पर सख्त कार्यवाही होगी।

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