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श्रद्धा के अनुसार की व्यक्ति का आचरण होता है-- आचार्य ममगांई

मनुष्य जब तक ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति व सांसारिक सुख लेने की प्रवृत्ति को नहीं मिटाता है तब तक कितना ही समझदार व पढ़ा लिखा क्यों न हो उसे आनन्द की प्राप्ति नहीं हो सकती है। श्रद्धा के अनुसार ही व्यक्ति का आचरण होता है। उक्त विचार जखोली के कोटी लस्या में आयोजित श्रीमद् भागवतकथा महापुराण के दूसरे दिन चारधाम विकास परिषद् के उपाध्यक्ष प्रसिद्व कथावाचक आचार्य पं.शिव प्रसाद ममगांई ने रखे। कथावाचन करते हुए कहा कि त्याग व शान्ति मनुष्य को गुणवान बनाती है और यह करूणा की तरह एक पुष्प है जिसकी सुगन्ध कभी भी मलिन नहीं होती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत एक मोक्षपरक ग्रन्थ है,जिसके श्रवण मात्र से ही जीतेजी क्रोध, लोभ, मोह आदि से मुक्ति मिलती है। आचार्य ममगांई ने कहा कि भागवत, आयोजनकर्ता ही नहीं अपितु सुनने वालों के भी पितृ संतुष्ट होते हैं और ईष्ट की संतुष्टि से सुख की प्राप्ति होकर मनुष्य को दु:खों से मुक्ति मिलती है। इस मौके पर आयोजक जसवीर सिंह,गम्भीर सिंह,कमल सिंह,सोहन सिंह आदि उपस्थित थे।

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  • Web Title:bhagwat katha