UCC पर मोहन भागवत की बड़ी बात से खुश उत्तराखंड सरकार, 22 को आ रहे देहरादून
RSS Chief Mohan Bhagwat: आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने हाल ही में यूसीसी कानून को लेकर उत्तराखंड सरकार की पीठ थपथपाई। भागवत की मुहर से सीएम धामी का कहना है कि संघ प्रमुख की बातों से हौसला बढ़ा है।

उत्तराखंड में पुष्कर धामी सरकार की समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी मुहर लगा दी। मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में उन्होंने देश में उत्तराखंड की तर्ज पर यूसीसी लागू करने की पैरवी की। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। डॉ. भागवत 22 फरवरी को देहरादून आ रहे हैं। यहां वे बुद्धिजीवी और पूर्व सैनिक सम्मेलन में शिरकत करेंगे।
उत्तराखंड के यूसीसी पर उनका वीडियो आठ फरवरी को मुंबई में आयोजित कार्यक्रम का बताया गया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी देश में लागू होना चाहिए। उत्तराखंड ने एक बिल बनाया और उसे जनता के बीच रख दिया। जनता से कहा कि हम ऐसा बिल लाने जा रहे हैं, आप भी अपनी राय दीजिए। करीब तीन लाख सुझाव इस पर आए। इसके बाद उत्तराखंड ने उसे लागू किया। ऐसा ही होना चाहिए सबसे संवाद होना चाहिए और उसके बाद यूसीसी लाया जाना चाहिए। कहा कि कानून लाया जाता है उसका पालन भी जरूरी है, इसलिए सबसे संवाद करके लाया जाएगा तो अच्छा रहेगा।
भागवत ने साफ कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि अलग-अलग समुदायों के बीच दूरी पैदा करना। इसलिए इसे जल्दबाजी या दबाव में नहीं, बल्कि भरोसे और संवाद के साथ लागू किया जाना चाहिए।
संघ प्रमुख की टिप्पणी से हौसला बढ़ा: धामी
उधर, सचिवालय में मीडिया कर्मियों बातचीत में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि संघ प्रमुख की टिप्पणी से सरकार का हौसला बढ़ा है। उन्होंने विश्वास जताया कि यूसीसी एक दिन पूरे भारत में लागू होगा। उन्होंने कहा कि देश में सबके लिए एक समान कानून होना चाहिए।
धर्म की आड़ में महिलाओं के शोषण की अनुमति नहीं
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता महिलाओं को समर्पित कानून है। इसमें सुनिश्चित किया गया है कि सभी को समान अधिकार मिलेंगे। यह कानून महिलाओं के हितों को समर्पित कानून है। प्रदेश की 50 फीसदी आबादी के अधिकार को 100 प्रतिशत सुरक्षित रखने वाला कानून है। अब कुरीतियां नहीं चलेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को धर्म की आड़ में महिलाओं का शोषण करने की छूट नहीं दी जा सकती। देश के तमाम तरक्कीपसंद मुस्लिम देशों में भी समान अधिकार लागू हो चुके हैं।
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