Transportation also took place in Kaunvad tour - मार्ग बाधित होने से उद्योगों पर पड़ा असर DA Image
8 दिसंबर, 2019|7:05|IST

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मार्ग बाधित होने से उद्योगों पर पड़ा असर

मार्ग बाधित होने से उद्योगों पर पड़ा असर

1 / 4रुड़की की सौ से अधिक फैक्ट्री संचालक दस दिनों में करोड़ो का नुकसान होने की बात कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हाईवे पर पूरी तरह कांवड़ियों के कब्जे में जाती है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने...

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2 / 4रुड़की की सौ से अधिक फैक्ट्री संचालक दस दिनों में करोड़ो का नुकसान होने की बात कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हाईवे पर पूरी तरह कांवड़ियों के कब्जे में जाती है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने...

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3 / 4रुड़की की सौ से अधिक फैक्ट्री संचालक दस दिनों में करोड़ो का नुकसान होने की बात कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हाईवे पर पूरी तरह कांवड़ियों के कब्जे में जाती है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने...

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4 / 4रुड़की की सौ से अधिक फैक्ट्री संचालक दस दिनों में करोड़ो का नुकसान होने की बात कर रहे हैं। कांवड़ यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हाईवे पर पूरी तरह कांवड़ियों के कब्जे में जाती है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने...

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कांवड़ यात्रा के चलते रुड़की में ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह बंद है। इसका खामियाजा उद्योगों को उठाना पड़ रहा है। रुड़की की सौ से अधिक फैक्ट्री संचालक दस दिनों में करोड़ों के नुकसान होने की बात कर रहे हैं।कांवड़ यात्रा के कुछ दिनों बाद ही हाईवे पर पूरी तरह कांवड़ियों के कब्जे में जाती है। कांवड़ियों की संख्या बढ़ने के बाद से प्रशासन ने हाईवे पर भारी माल वाहक वाहनों की आवाजाही पूरी बंद कर दी है। मालवाहक वाहनों की आवाजाही बंद होने का सीधा असर रुड़की के रामनगर और सलेमपुर की सौ से अधिक छोटी-बड़ी फैक्ट्रियों पर पड़ रहा है। कच्चा माल फैक्ट्री तक नहीं पहुंच रहा है। वहीं, तैयार माल फैक्ट्री से बाहर नहीं जा पा रहा है। उद्योगपति दमन सरीन का कहना है कि पिछले छह दिन से ट्रांसपोर्टेशन पूरी तरह बंद है जबकि अगले चार भी बंद रहेगा। ऐसे में रुड़की रामनगर और सलेमपुर की सौ से अधिक फैक्ट्री में कार्य ठप हो जाता है। उद्योगपति केशव कोहली का कहना है यह समस्या हर वर्ष रहती है। सरकार के चाहिए कि उद्योगों को नुकसान से बचाने के लिए कोई वैक्लपिक मार्ग की व्यवस्था करे। उद्योगपति रवि कुमार का कहना है कि दस दिन तक उद्योग जगत को अच्छा खासा नुकसान होता है। इसका सीधा असर राजस्व पर भी पड़ता है। फैक्ट्री संचालक के बिके माल पर ही सरकार को भी टैक्स मिलना है। उद्योगपति एम मुस्तकीम का कहना है कि कच्चा माल नहीं आने पर कर्मचारी भी खाली बैठे रहते हैं।

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