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28 सितम्बर, 2020|12:33|IST

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अंतिम श्राद्ध पर किया भूले बिसरे पितरों का तर्पण

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गुरुवार को पितृ विसर्जन अमावस्या के साथ सोलह दिन तक चले पितृ पक्ष का समापन हो गया। श्राद्ध पक्ष के अंतिम दिन लोगों ने अपने भूले बिसरे पितृों के लिए पूजापाठ के साथ पिंडदान कर उन्हें परलोक के लिए विदा कर दिया। अब 29 दिन के अधिकमास के बाद 17 अक्तूबर से नवरात्र शुरू होंगे।

आईआईटी रुड़की स्थित श्री सरस्वती मंदिर के पुजारी आचार्य राकेश कुमार शुक्ल ने बताया कि गुरुवार को तीन संयोग बने। सूर्य के कन्या राशि में परिवर्तन, पितृ विसर्जन अमावस्या और विश्वकर्मा पूजन रहा। लक्सर निवासी पंडित संदीप शर्मा ने बताया कि हर साल भाद्रपद शुक्ल माह की पूर्णिमा से आश्विन महीने की अमावस्या तक कनागत (पितृ पक्ष) चलते हैं। इन सोलह दिनों में हिंदू अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पूजापाठ कर उनका श्राद्ध करते हैं। इस साल पितृ पक्ष 2 सितंबर में शुरू हुआ था। 17 सितंबर को इसका समापन हो गया। पंडित अवनीश शर्मा के मुताबिक जिन पितृों की मृत्यु की तिथि याद नहीं होती, उस सभी को पितृ पक्ष के आखिरी दिन पितृ विसर्जन अमावस्या पर याद कर उनके नाम का तर्पण किया जाता है। लिहाजा गुरुवार को लोगों ने भूले बिसरे पितरों को याद करके उनके नाम तर्पण व पिंडदान किया। इसके साथ ही सोलह दिन तक धरती पर हमारे साथ रहे पूर्वज एक साल के लिए फिर विदा हो गए। ज्योतिषि डॉ. सतीश कुमार शास्त्री ने बताया कि इसके साथ ही शुक्रवार से अधिकमास या पुरुषोत्तम मास शुरू हो गया है। अधिकमास की समाप्ति पर 17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएंगे।

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व्यापारियों को बाजार में रौनक बढ़ने की उम्मीद

पौराणिक मान्यता के मुताबिक हिंदू समाज के लोग कनागत में न तो नया सामान खरीदते हैं, और न ही कोई नया काम शुरू करते हैं। ऐसे में दो सप्ताह से बाजार सुनसान दिख रहे थे। अब कनागत समाप्त होने पर कारोबारियों को दुकानों पर फिर से रौनक लौटने की उम्मीद है। अब एक महीने बाद फिर त्योहारों के साथ ही शादियों का सीजन शुरू होने की भी व्यापारी अभी से तैयारी करने लगे हैं।

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  • Web Title:The funeral of the forgotten fathers was done on the last shraddh