Roorki News: भाईचारे से समाज से नफरत, जुल्म और बुराइयों का हो सकता है खात्मा

हिन्दुस्तान, रुडकी
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Roorki News: सूफी संतों की नगरी पिरान कलियर स्थित खानकाह-ए-फैजान वाहिद में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में एक रूहानी महफिल का आयोजन किया गया। लोग इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश करते हुए उनकी सीरत को अपनाने का संकल्प लिया। महफिल में लंगर का आयोजन भी किया गया।

Roorki News: भाईचारे से समाज से नफरत, जुल्म और बुराइयों का हो सकता है खात्मा

Roorki News: सूफी संतों की नगरी पिरान कलियर स्थित खानकाह-ए-फैजान वाहिद में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और शहीदा ने कर्बला की याद में एक रूहानी महफिल का आयोजन किया गया। महफिल में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर इमाम हुसैन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और कर्बला के संदेश को अपनी जिंदगी में अपनाने का संकल्प लिया।

कर्बला की याद में महफिल

महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन-ए-पाक से हुई। इसके बाद नोहखानी और कर्बला की याद में तकरीरें पेश की गईं। खानकाह के गद्दीनशीन सैय्यद फरीद आलम साबरी ने कहा कि कर्बला का वाकया केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि इंसानियत, सब्र, कुर्बानी, इंसाफ और हक की राह पर डटे रहने की सबसे बड़ी मिसाल है।

इमाम हुसैन की कुर्बानी

हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने परिवार और साथियों के साथ जो कुर्बानी दी वह पूरी इंसानियत के लिए हमेशा एक रोशन चराग बनी रहेगी। कहा कि आज समाज को सबसे अधिक जरूरत इमाम हुसैन की सीरत और उनके बताए हुए रास्ते पर चलने की है। अगर इंसान सच्चाई, ईमानदारी, भाईचारे और इंसाफ को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लें तो समाज से नफरत, जुल्म और बुराइयों का खात्मा हो सकता है।

सामाजिक संदेश

कर्बला हमें यह संदेश देती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, हक और सच्चाई का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। महफिल के दौरान अकीदतमंदों ने इमाम हुसैन और शहीदाने कर्बला की बारगाह में सलाम पेश किया तथा मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआएं की गई।

लंगर का आयोजन

इस दौरान अकीदतमंदों के लिए लंगर का भी आयोजन किया गया। इस दौरान सैय्यद वाशिफ मियां, सैय्यद कैफ जैदी, राव अफाक, राव अबरार, राव सफाकत, राव फरमान, राव सैफ अली, डॉ. तहसीम, मेहरबान, कालू खान, फिरोज साबरी, मेहराज खान, अनीश, गुलफराज, गुफरान, जाबिर समेत अन्य मौजूद रहे।

सामान्य प्रश्न

महफिल की शुरुआत किस चीज से हुई?
महफिल की शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन-ए-पाक से हुई।
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