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28 नवंबर, 2020|5:00|IST

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38 दिन में एक नाम पते की तस्दीक नहीं कर पाई पुलिस

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फर्जी रजिस्ट्रेशन के मामले को पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। जिस तीसरे आरोपी का नाम पता प्रकाश में आया था, उसको अभी तक तस्दीक नहीं किया गया है।

16 अक्टूबर को एआरटीओ की सतर्कता और पुलिस की मदद से फर्जी रजिस्ट्रेशन कराने के आरोप में मनोज कुमार निवासी डिकोली थाना चांदीनगर बागपत और खालिद निवासी गोला रोड बाईपास खंडोली थाना कंकड़ा खेड़ा जिला मेरठ को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि वह अपने एक अन्य साथी शराफत निवासी मोहल्ला किला थाना मंगलौर के साथ एआरटीओ कार्यालय गए थे। वहां एक ट्रक का रजिस्ट्रेशन कराना था। एआरटीओ कर्मचारियों ने कार्यालय में प्रस्तुत किए कागजातों को चेक किया तो गड़बड़ी पकड़ी गई थी। आरोपियों के अनुसार मौका पाकर शराफत तो वहां से फरार हो गया था। लेकिन वह दोनों पकड़े गए थे। एआरटीओ कार्यालय और बागपत से पुलिस ने दो ट्रक बरामद किए थे। दोनों ही ट्रकों के चेचिस नंबर, इंजन नंबर और प्लेट नंबर फर्जी मिली थी। फर्जीवाड़े को 38 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक जिस तीसरे साथी का नाम पता सामने आया था वह तस्दीक ही नहीं हो पाया है। इंस्पेक्टर राजेश साह ने बताया कि विवेचक रणजीत सिंह खनेड़ा को जल्द मामले में अहम सुराग जुटाने के निर्देश दिए हैं। जानकारी मिली है कि शराफत का एक मकान मुजफ्फरनगर में है। जल्द ही एक टीम मंगलौर और मुजफ्फरनगर जाकर जानकारी जुटाएगी।

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  • Web Title:Police could not verify a name address in 38 days