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2 अगस्त, 2020|3:57|IST

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जिले में आया डेढ़ लाख बोरे यूरिया, फिर भी कमी बरकरार

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जिले के अधिकांश सरकारी गोदामों से यूरिया खाद फिर नदारद है। जुलाई महीने में यूरिया के डेढ़ लाख से अधिक बोरे जिले में आ चुके हैं, इसके बावजूद किसान यूरिया को तरस रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिला प्रशासन ने जो यूरिया मंगवाया था, वो किसानों के नहीं तो फिर किसके पास गया है। इस समय गन्ने और धान की फसल के लिए हर किसान को यूरिया की जरूरत है। किसान अपनी गन्ना समिति या फिर सहकारी समिति से यूरिश की खरीद करते हैं। यहां से एक तो उन्हें अगले सीजन के लिए उधार खाद मिल जाती है, दूसरे समितियों पर सीधे इफ्को से खरीद होने के कारण मिलावट की संभावना नहीं होती है। पर इस साल समितियों से किसानों को मांग के अनुरूप यूरिया नहीं मिल पा रहा है। किसान सत्यपाल राणा, महक सिंह, गोरख सिंह ने बताया कि जुलाई में दो बार समितियों पर यूरिया आया था, पर अधिकांश किसानों को उनकी जरुरत के मुताबिक आपूर्ति नहीं हो सकी है। भंवर सिंह, संदीप चौधरी, सतवीर सिंह का कहना है कि समय पर पर्याप्त यूरिया न मिलने से धान, गन्ने और चारे की फसल पर असर पड़ा है। यूरिया की कमी तब हुई है, जबकि पिछले एक महीने में जिला प्रशासन 26-26 सौ मीट्रिक टन यूरिया की तीन रैक (कुल 1 लाख 56 हजार बोरे) मंगवाकर सरकारी गोदामों पर भेज चुका है। इतनी बड़ी खेप आने के बावजूद जिले में यूरिया की कमी इसकी कालाबाजारी होने की तरफ संकेत कर रही है। जुलाई में इफ्को से दो रैक मंगवाकर सीधे सरकारी गोदामों पर भिजवाई गई थी, जबकि कृभको की एक रैक जिले के दुकानदारों को दी गई थी। समितियों के सदस्य किसानों को ही यूरिया दिया गया है। जरूरत पड़ने पर और रैक मंगवाई जाएगी।मानसिंह सैनी, जिला सहायक निबंधक, हरिद्वार

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  • Web Title:One and a half lakh sacks of urea came in the district yet the shortage continues