Need for revision of history of freedom revolution - आजादी की क्रांति के इतिहास में संशोधन की जरुरत DA Image

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आजादी की क्रांति के इतिहास में संशोधन की जरुरत

झबरेड़ा विधायक ने आजादी की लड़ाई के इतिहास को त्रुटिपूर्ण बताते हुए इसमें संशोधन किए जाने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि आजादी की क्रांति की शुरुआत 1857 में मेरठ से न होकर 1822 में हरिद्वार के झबरेड़ा से हुई थी। बताया कि संशोधन के बाबत उन्होंने पिछले विधानसभा सत्र में प्रस्ताव भी सरकार को दिया है। शुक्रवार को लक्सर में सीएम की सभा से पहले झबरेड़ा के भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल ने लक्सर में पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि अभी तक देश के लोगों को आजादी के लिए हुई क्रांति की शुरुआत 1857 में मेरठ से होना ही पढ़ाया जा रहा है। जबकि हकीकत यह है कि इससे भी 35 साल पहले हरिद्वार के कुंजा बहादुरपुर गांव के गुर्जर राजा विजय सिंह ने अपने सेनापति कल्याण सिंह व चार सौ सैनिकों के साथ अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की शुरुआत कर दी थी। हालांकि बाद में अंग्रेजी सेना ने इन सभी कां बंदी बना लिया था और फिर रुड़की से सटे सुनहरा गांव में मौजूद एक बरगद के पेड़ के नीचे इन सभी को फांसी दे दी गई थी। वहां इसके पूरे प्रमाण भी मौजूद हैं। बताया कि अंग्रेजी सरकार ने इस घटना को आजादी की लड़ाई न कहकर गुर्जर विद्रोह का नाम देते हुए गजेटियर में दर्ज भी किया था। यही वजह है कि इसे आजादी की लड़ाई माना ही नहीं गया। विधायक ने बताया कि उन्होंने क्रांति के इतिहास में संशोधन करने की मांग का प्रस्ताव पिछले विधानसभा सत्र में सरकार को सौंपा था। सरकार इस पर विचार कर रही है। जल्दी ही इस प्रस्ताव कां संशोधन की संस्तुति के साथ केंद्र को भेजा जाएगा। उनके साथ नगरपालिका अध्यक्ष अंबरीश गर्ग, सरदार रुपिंदर सिंह सोनु, सचिन चौधरी, प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।

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