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क्रोध, लोभ और मोह छोड़कर भगवान की शरण लें: आचार्य

रुड़की, संवाददाता। हर मिलाप धर्मशाला साकेत में चल रही भागवत कथा में सोमवार को कथा व्यास आचार्य द्वारिका प्रसाद शास्त्री ने कहा कि भागवत का मतलब है,...

क्रोध, लोभ और मोह छोड़कर भगवान की शरण लें: आचार्य
हिन्दुस्तान टीम,रुडकीMon, 27 May 2024 06:30 PM
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हर मिलाप धर्मशाला साकेत में चल रही भागवत कथा में सोमवार को कथा व्यास आचार्य द्वारिका प्रसाद शास्त्री ने कहा कि भागवत का मतलब है, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य। इससे संपूर्ण संसार का उद्धार होता है। मनुष्य जीवन का उद्धार होता है और परम तत्व परमात्मा को भागवत कथा के माध्यम से हम प्राप्त कर सकते हैं। कुंती माता ने द्रौपदी ने प्रहलाद ने भगवान की भक्ति से भगवान को प्राप्त किया। कलयुग में भगवान की भक्ति ही श्रेष्ठ है। शबरी मैया ने अपने झूठे बेर भगवान को खिला दिए।

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